प्रभुश्री राम की प्राण प्रतिष्ठा के शुभ अवसर पर, "भव्य, दिव्य एवं अद्भुत" आतिशबाजी कार्यक्रम के साक्षी बनेंगे झांसीवासी

22 जनवरी को प्रभु श्री राम की प्राण प्रतिष्ठा के लिए पूरे भारतवर्ष में अपार खुशी और हर्ष का वातावरण है...

प्रभुश्री राम की प्राण प्रतिष्ठा के शुभ अवसर पर, "भव्य, दिव्य एवं अद्भुत" आतिशबाजी कार्यक्रम के साक्षी बनेंगे झांसीवासी
सांकेतिक फ़ोटो - सोशल मीडिया

वे देखेंगे श्री राम मंदिर के भव्य स्वरूप का दर्शन

सांसद अनुराग शर्मा और बुंदेलखंड दशहरा कमेटी के संयुक्त तत्वाधान में, लक्ष्मी व्यायाम मंदिर झांसी में, आयोजित होगा एक भव्य कार्यक्रम

"राम सबके हैं, राम एक आदर्श व्यक्तित्व हैं जो भारत की मूल अवधारणा है," अनुराग शर्मा ने कहा

22 जनवरी को प्रभु श्री राम की प्राण प्रतिष्ठा के लिए पूरे भारतवर्ष में अपार खुशी और हर्ष का वातावरण है, और इस उपलक्ष्य में अनेक-अनेक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। झांसीवासियों के लिए इस शुभ घड़ी को और अद्भुत बनाने के लिए सांसद अनुराग शर्मा और बुंदेलखंड दशहरा कमेटी ने अपने संयुक्त तत्वाधान में एक "भव्य, दिव्य एवं अद्भुत" आतिशबाजी कार्यक्रम का आयोजन किया है, जिसमें प्रत्येक झांसीवासी राम मंदिर की दिव्य छवि में बने राम मंदिर रथ का भी दर्शन कर सकेगा। 22 जनवरी के शुभ अवसर पर, सांसद अनुराग शर्मा और बुंदेलखंड दशहरा कमेटी के संयुक्त तत्वाधान में, लक्ष्मीव्यायाम मंदिर झांसी में शाम 5 बजे को आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम के प्रति हर झांसीवासी में स्पष्ट उत्साह दिखाई दे रहा है।

इस कार्यक्रम से पूरी झाँसी दीवाली की तरह सुंदर और जगमगाती दिखेगी, साथ ही अनुराग शर्मा शहीद हुए कारसेवक और उनके परिवारों को भी प्रशस्ति पत्र प्रदान करेंगे। इसका उद्देश्य है कि हर कार्यसेवक गौरव अमित महसूस करें, जिन्होंने राम जन्मभूमि आंदोलन में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हम सभी जानते हैं कि 1528 में मीर बाकी ने श्रीराम मंदिर को गिराने और उसकी जगह मस्जिद बनाने के बाद से ही अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि संघर्षों की साक्षी रही है। 1528 से लेकर देश की आजादी तक श्रीराम जन्मभूमि की मुक्ति के लिए 77 से अधिक छोटे-बड़े युद्ध लड़े गए और सैकड़ों लोगों ने अपने प्राणों की आहुति दी। 1885 से लेकर नवंबर 2019 तक भगवान राम की अदालती यात्रा जारी रही। केंद्र में श्री नरेंद्र मोदी सरकार आने के बाद से अदालती प्रक्रिया में तेजी आई और अंततः 09 नवंबर 2019 को देश की सर्वोच्च अदालत ने अपना सर्वोच्च फैसला सुनाया और प्रभु श्री राम मंदिर के निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ।

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राम जन्मभूमि आंदोलन में स्व. डॉक्टर पंडित विश्वनाथ शर्मा जी का योगदान

राम जन्मभूमि आंदोलन में स्व. डॉक्टर पंडित विश्वनाथ शर्मा ने भी राम मंदिर आंदोलन के समय झांसी क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। 1984 के दशक से उन्होंने विश्व हिंदू परिषद के अंतर्गत आयोजित राम जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन के संयोजक के रूप में अहम भूमिका का निर्वहन किया, इसी दौरान झांसी के कारसेवक जगत प्रकाश अग्रवाल का बलिदान हुआ, जो भगवान राम के चरणों में अपने प्राणों की आहुति देने वाले शहीद थे। झांसी इसे भगवान श्री राम की प्राण-प्रतिष्ठा के रूप में याद करती है और उनके परिवार को इस पर गर्व है।

आंदोलन का झांसी प्रमुख गढ़

तीन दशक पहले हुए आंदोलन के झांसी प्रमुख गढ़ की बात करें, तो 30 अक्टूबर 1990 को झांसी ने दूसरी अयोध्या बन गई थी। लाखों कारसेवक इस स्थान पर आए थे और झांसी के लोगों ने उनका स्वागत पूरे उत्साह से किया। घर-घर से कारसेवकों को मदद पहुंचाई गई थी, और उसी दिन झांसी और अयोध्या में गोलियां चलीं। इस दौरान झांसी के कारसेवक जगत प्रकाश अग्रवाल ने अपने प्राणों की आहुति दी, जिन्हें हमेशा झांसी याद रखती है। आज भगवान श्री राम की प्राण-प्रतिष्ठा होने से जगत प्रकाश जी का परिवार बहुत खुश है।

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ओरछा और अयोध्या का संबंध

ओरछा और अयोध्या का संबंध करीब 600 वर्ष पुराना है। संवत 1631 में चैत्र शुक्ल नवमी को, जब भगवान राम ओरछा आए, तो उन्होंने संत समाज को यह आश्वासन दिया कि उनकी राजधानी दोनों नगरों में रहेगी। इस समय ओरछा बुन्देलखण्ड की 'अयोध्या' बन गई थी।

मीडिया से बातचीत करते हुए, अनुराग शर्मा ने कहा कि 22 जनवरी के इस शुभ दिवस पर करोड़ों हिंदुओं का सपना अब साकार हो रहा है, भगवान श्री राम की प्राण-प्रतिष्ठा होने से यह सपना पूरा हो जाएगा। इस शुभ दिवस को और बुंदेलखंड दशहरा कमेटी के संयुक्त तत्वाधान में, लक्ष्मीव्यायाम मंदिर झांसी में "भव्य, दिव्य एवं अद्भुत" आतिशबाजी कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। प्रत्येक व्यक्ति इस कार्यक्रम के लिए उत्साहित है, और मैं एक बार पुनः प्रत्येक झांसी वासी से अपील करता हूं कि वे इस भव्य दिवस के साक्षी बनें। मैं आनंदित हूं कि मेरे प्रभु श्री राम की अपने जन्म स्थान पर 22 जनवरी के इस शुभ दिवस पर प्रण प्रतिष्ठा होगी। इससे हम श्रीराम जन्मभूमि से जुड़े पांच सदी पुराने विवाद और संघर्षों का इतिहास देखेंगे।

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अयोध्या के साथ पीएम नरेंद्र मोदी की भूमिका में बदलाव ने मुझे उनकी अतीत से वर्तमान तक की यात्रा का उल्लेख करने को मजबूर किया है। 1990 में वे गुजरात के सोमनाथ से अयोध्या के लिए लालकृष्ण आडवाणी जी की रथ यात्रा के साथ चले थे। अब उन्हें रामलला की प्राण प्रतिष्ठा करनी है। मोदी की सारथि से रथी तक की यात्रा यह दिखाती है कि निष्ठा के साथ लक्ष्य की प्राप्ति के लिए कौन-कौन से पथ चलने पड़ते हैं। मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ, जो अब गोरक्षपीठ के वर्तमान पीठाधीश्वर हैं, अपने दादा गुरु दिग्विजय नाथ और गुरु अवैद्यनाथ के संकल्प के साकार होने के इतिहास के साथी और भागीदार नहीं हैं, बल्कि वे सीएम के रूप में भी इसे जोड़कर इतिहास बना रहे हैं।

दुनिया में कोई भी देश हो, अगर उसे विकास की नई ऊंचाई पर पहुंचना है, तो उसे अपनी विरासत को संभालना होगा। हमारी विरासत हमें प्रेरणा देती है, हमें सही मार्ग दिखाती है। इसलिए आज का भारत, पुरातन और नूतन दोनों को आत्मसात करता हुआ आगे बढ़ रहा है। शर्मा परिवार की धर्म के प्रति कर्तव्य निष्ठा और समर्पण का भाव सदैव नजर आता है, और हाल ही में हीराम मंदिर के निर्माण के लिए अनुराग शर्मा और बैद्यनाथ परिवार ने करीब एक करोड़ से अधिक का निधि समर्पण भी किया था।

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