बाँदा का पांच दिवसीय दशहरा : अनोखी परंपरा

बांदा में दशहरा का पर्व पूरे देश से अलग हटकर विशेष परंपराओं के साथ मनाया जाता है...

Oct 12, 2024 - 08:39
Oct 12, 2024 - 08:52
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बाँदा का पांच दिवसीय दशहरा : अनोखी परंपरा

बांदा में दशहरा का पर्व पूरे देश से अलग हटकर विशेष परंपराओं के साथ मनाया जाता है। जहां देशभर में एक ही दिन रावण वध कर दशहरा मनाया जाता है, वहीं बांदा में यह पर्व पांच दिनों तक चलता है। हर दिन रावण के पुतले का अलग-अलग स्थानों पर दहन किया जाता है, और साथ ही दशहरा मिलन समारोह का आयोजन होता है जो पांच दिनों तक जारी रहता है।

प्रागी तालाब से हुआ शुभारंभ आज, पहले दिन प्रागी तालाब में रामलीला का मंचन हुआ, जिसमें राम-रावण युद्ध का दृश्य प्रमुख आकर्षण रहा। जैसे ही राम ने रावण की नाभि में बाण मारा, दूसरी तरफ रावण का पुतला धू-धू कर जलने लगा और इस प्रकार बांदा में पांच दिवसीय दशहरे का पहला दिन संपन्न हुआ। यह रावण दहन प्रागी तालाब के आसपास के इलाकों जैसे छोटी बाजार, मढ़िया नाका, और खुटला सहित एक दर्जन मोहल्लों में उत्साहपूर्वक मनाया गया।

हर दिन अलग स्थान, अलग उत्साह दूसरे दिन का रावण दहन अलीगंज रामलीला में होता है। इस दिन अलीगंज, बाबूलाल चौराहा, गूलर नाका और चौक बाजार में दशहरे का पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। तीसरे दिन नाई रामलीला मैदान में रावण वध होता है, जहां मानिक कुइयां के आसपास के क्षेत्रों में यह उत्सव मनाया जाता है। इस दिन की खास बात यह होती है कि पूरे क्षेत्र में दशहरा मिलन समारोह का आयोजन किया जाता है, जो लोगों को एक दूसरे से जोड़ने का माध्यम बनता है।

चौथे दिन सिविल लाइन के जहीर क्लब मैदान में रावण वध होता है। इसके बाद, स्वराज कॉलोनी, पुलिस लाइन और केन पथ रोड जैसे क्षेत्रों में दशहरे का उत्सव देखने लायक होता है। पांचवे और अंतिम दिन, काशीराम कॉलोनी के पास रावण दहन किया जाता है, जहां पिछले कुछ सालों से यह परंपरा चली आ रही है।

पांच दिन की परंपरा और सौहार्द बांदा में दशहरे की खासियत यह है कि यहां पांच अलग-अलग स्थानों पर पांच दिन तक रावण का पुतला दहन किया जाता है। इन पांच प्रमुख स्थानों में प्रागी तालाब, अलीगंज, छाबी तालाब, जहीर क्लब, और काशीराम कॉलोनी शामिल हैं। इस पर्व का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि लोग इन पांच दिनों के दौरान खास पकवान बनाते हैं और एक दूसरे के घर जाकर दशहरे की शुभकामनाएं देते हैं। यह पर्व केवल बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक नहीं है, बल्कि लोगों को एकजुट करने और आपसी मतभेदों को भुलाकर मिलन समारोह के माध्यम से नए सिरे से दोस्ती का प्रारंभ करने का अवसर भी प्रदान करता है।

बांदा का यह पांच दिवसीय दशहरा अनोखी परंपराओं और उत्साह के साथ मनाया जाता है, जो इसे पूरे देश में विशेष बनाता है।

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