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क्या सरकार तीन चार शादी करने वाले मुस्लिमों पर भी ला सकती है कान"/>

महिला ने बहुविवाह पर किया सवाल, केन्द्रीय कानून मंत्री ने कहा बड़ा आंदोलन खड़ा करें

क्या सरकार तीन चार शादी करने वाले मुस्लिमों पर भी ला सकती है कानून ?

तीन तलाक इस वर्ष का सबसे गर्म मुद्दा था। जिसके साए में उत्तर प्रदेश से लेकर हिमाचल और गुजरात के चुनाव संपन्न हुए। कोर्ट के दखल के बाद तीन तलाक को असंवैधानिक करार दिया गया। तत्पश्चात छह महीने के अंदर सरकार को कानून बनाने का निर्देश मिला। इससे पहले मुस्लिम पर्सनल लाॅ बोर्ड कोर्ट के फैसले को भी मानने से इशारों इशारों में इंकार करता रहा। जबकि इसके पीछे हलाला और बहुविवाह की प्रथा भी प्रचलित है। अन्य धर्म के मुकाबले इस्लाम में तीन चार शादी करना अनैतिक नहीं माना जाता। बल्कि आसानी से ऐसा कोई भी कर सकता है।

अब जब तीन तलाक पर सजा का ऐलान हो गया तब तीन चार विवाह करने के खिलाफ भी महिलाओं की आवाज मुखर होने लगी है। एक मुस्लिम महिला ने कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद से इस बाबत सवाल किया कि क्या सरकार इसके खिलाफ भी कानून ला सकती है ? उनका जवाब था कि महिलाएं इसके खिलाफ बड़ा आंदोलन खड़ा करें। संभव है कि सरकार इस पर भी विचार करे।

किन्तु तीन चार शादी करने के इस मामले पर सरकार कब और कैसे निर्णय ले सकेगी अथवा तीन तलाक में कमी की वजह से बहुविवाह पर स्वयं कमी आ सकती है। बहरहाल भविष्य में इस बात का भी विवाद छिड़ सकता है। एक चिंगारी उठती हुई महसूस हो रही है। फिलहाल तीन तलाक पर बने कानून का कितना पालन हो सकता है और पीड़ित महिला कानून के दरवाजे खटखटाती है अथवा नहीं। जैसे कि शक जाहिर किया गया कि आवश्यक नहीं कि थाने पर बैठा दरोगा पीड़ित की रिपोर्ट दर्ज कर ही ले। इस पर भी केन्द्रीय कानून मंत्री का यह कहना था कि थाने में ना सुनी जाए तब एसपी से लेकर सीएम तक शिकायती पत्र भेजा जाए। शिकायत अमल में अवश्य ली जाएगी और संविधान व कानून के मुताबिक पीड़ित को न्याय अवश्य मिलेगा।

यहाँ से न्याय की उम्मीद के साथ एक बड़ा सफर फिर शुरू हो चुका है। बहुविवाह भी निशाने पर आ रहा है पर बड़ा सवाल यही है कि निजता के मामले के साथ समाज व सरकार इस पर अपनी अंतिम मुहर कैसे लगाएंगे ?



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