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राम के खिलाफ कृष्ण समाजवादी पार्टी की नई रणनीति

जब भारतीय जनता पार्टी और संघ उत्तर प्रदेश में राम मन्दिर के निर्माण के लिए कमर कस रहे हैं और मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी भी मंदिर निर्माण की बात कर रहे हैं, तो प्रमुख विपक्षी समाजवादी पार्टी ने कृष्ण का राग अलापना शुरू कर दिया है। वे राम की काट कृष्ण में ढूंढ़ रही है।

इस सिलसिले में समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव का वह बयान काफी मायने रखता है, जिसमंे उन्होंने कहा है कि राम की पूजा तो सिर्फ उत्तर भारत में होती है, जबकि कृष्ण पूरे भारत में पूजे जाते हैं।

गौरतलब हो कि मुलायम सिंह गौपालकों की जाति से आते हैं और गोपालकों की यह जाति अपने को कृष्ण के वंश का दावा करती है। समाजवादी पार्टी अब कृष्ण का इस्तेमाल कर पिछड़े वर्गों के लोगों को अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रही है।

पूर्व मुख्यमंत्री सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपने गांव सफई में कृष्ण की 50 फीट की प्रतिमा बनाने की घोषणा की है। मूर्ति की स्थापना सफई मेला कमिटी के सौजन्य से की जाएगी।

मुख्यमंत्री योगी ने अभी हाल ही में अयोध्या के सरयू तट पर राम की 100 फीट की प्रतिमा स्थापित करने की घोषणा की थी। वह प्रमिता एक बड़ी परियोजना का हिस्सा है। उस परियोजना पर 300 करोड़ रुपया खर्च किया जाना है। उसके तहत अयोध्या के इन्फ्रास्ट्रक्चर का विकास किया जाएगा और सड़कों को चैड़ा किया जाएगा।

राम मन्दिर निर्माण के प्रयासों को हवा देने के लिए विवादास्पद धर्मगुरू श्री श्री रविशंकर उत्तर प्रदेश के दौरे पर थे। उन्होंने लखनऊ में योगी से मुलाकात की और अयोध्या में राम लला के दर्शन भी किए।

जाहिर है राम को मुख्य मुद्दा बनाकर भाजपा आगामी विधानसभा का चुनाव लड़ना चाहती है। वैसे अतीत में भी समाजवादी पार्टी ने नर्म हिन्दुत्व का इस्तेमाल अपनी राजनीति में किया है।

1990 में मुलायम सिंह यादव ने मुख्यमंत्री की हैसियत से अयोध्या में जमा हुए रामभक्तों पर गोली चलाने का आदेश दिया था। उन्होंने वह आदेश बाबरी मस्जिद को बचाने के लिए दिया था। उसके बाद उन्हें मौलाना मुलायम सिंह तक कहा जा रहा था।

लेकिन बाद में मुलायम सिंह ने अपना हृदय परिवर्तन होने का संकेत दिया था। उन्होंने कल्याण सिंह से हाथ मिला लिया था, जबकि बाबरी मस्जिद का ध्वंस कल्याण सिंह के मुख्यमंत्रित्व काल में ही हुआ था।

राम मन्दिर निर्माण से जुड़े साक्षी महाराज को मुलायम सिंह ने राज्यसभा में भेज दिया था और कल्याण सिंह के बेटे राजवीर को प्रदेश का मंत्री बनवा दिया था। जब 2012 में समाजवादी पार्टी की हार हो गई, तो फिर मुलायम ने अपना पुराना तेवर अख्तियार कर लिया था।

अब राजनैतिक विश्लेषकों को मुलायम के बदले रूप पर आश्चर्य हो रहा है। वे हमेशा से कट्टरपंथी हिन्दुत्व के खिलाफ रहे हैं और मंदिर की राजनीति से दूर रहे हैं। पर अब वे खुद कृष्ण की मूर्ति बनवाकर धर्म की राजनीति का सहारा ले रहे हैं।



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