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गुजरात चुनाव में बढ़ रहा है कांग्रेस का समर्थन मोदी और राहुल में सीधा मुकाबला

जैसे जैसे गुजरात में मतदान की तारीखें नजदीक आती जा रही है, कांग्रेस का समर्थन भी बढ़ता दिखाई पड़ रहा है। कांग्रेस दो दशकों से भी ज्यादा समय के बाद इस बार सत्ता पर एक बार फिर काबिज करने की लड़ाई लड़ रही है। गुजराती मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए पार्टी हर संभव प्रयास कर रही है। एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता का कहना है कि इस बार गुजरात चुनाव में जमीनी हकीकत उनके पक्ष में है। उनका कहना है कि भारतीय जनता पार्टी सरकार विरोधी हवा का सामना कर रही है और यह हवा काफी तेज है। अर्थव्यवस्था में मंदी का माहौल है। ओबीसी, दलित, मुस्लिम और पाटीदार समाज के लोग भाजपा के खिलाफ हो गए हैं। नोटबंदी और वस्तु व सेवा कर के कारण छोटे और मझोले व्यापारियों मंे जबर्दस्त गुस्सा है। भाजपा के पास इस वक्त स्थानीय स्तर पर किसी बड़े नेता का अभाव भी है। पिछले चुनावों में भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच मतों का अंतर 11 फीसदी ही रहा करता था, जबकि सीटों भाजपा के पास कांग्रेस से दूनी आ जाया करती थीं।

कांग्रेस के लिए इस बार राहुल गांधी का अभियान भी बहुत फायदेमंद साबित हो रहा है। वे इस बार लोगों से सीधे जुड़ रहे हैं। वे बड़ी बड़ी रैलियों की जगह रोड शो पर ध्यान केन्द्रित कर रहे हैं। वे लोगों से बातचीत करते भी दिखाई पड़ते हैं। राहुल गांधी का सौराष्ट्र इलाके में अच्छा असर देखा जा रहा है। गौरतलब हो कि यह इलाका भारतीय जनता पार्टी का गढ़ रहा है। यहां से विधानसभा के 52 विधायक जीत कर आते हैं। पाटीदार नेता हार्दिक पटेल के साथ गठबंधन का सबसे ज्यादा फायदा कांग्रेस को इसी इलाके में मिलने वाला है। उनके साथ गठबंधन कर कांग्रेस ने अपने कौशल का सबूत दिया है।

गुजरात में कांग्रेस की तरफ से राहुल गांधी ने अकेले मोर्चा संभाल रखा है। सोनिया गांधी चुनाव अभियान से दूर ही हैं। विदेशी दौरे से राहुल पिछले सितंबर महीने में भारत आए थे। उसके बाद वे अपना समय ज्यादातर गुजरात में ही बिता रहे हैं। वे न केवल चुनाव प्रचार में खुद शामिल हैं, बल्कि वे चुनाव अभियान को नजदीकी से माॅनिटर भी कर रहे हैं।

इस बार कांग्रेस चुनाव जीतने के लिए सभी तरीके आजमा रही है। वह कास्ट कार्ड भी खेल रही है और साॅफ्ट हिन्दुत्व की ओर लौटते भी दिखाई दे रही है। राहुल मंदिरों में दर्शन के लिए लगातार जा रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी कांग्रेस इस समय बहुत सक्रिय है। विकास को भी उसने मुद्दा बना रखा है। कांग्रेस इस चुनाव को मोदी बनाम राहुल नहीं बनाना चाहती, लेकिन इतना तो तय हो गया है कि कांग्रेस की ओर से राहुल गांधी और भाजपा की ओर से खुद नरेन्द्र मोदी ने मोर्चा संभाल रखा है। यानी दोनों नेता गुजरात चुनाव में आमने सामने आ गए है।

कांग्रेस कोशिश कर रही है कि उस पर मुस्लिम तुष्टिकरण की पार्टी होने का जो धब्बा लगा है, वह समाप्त हो जाय। पार्टी के एक धड़े का मानना है कि उसके ऊपर जो हिन्दू विरोधी होने का प्रचार किया जाता है, उसका सामना किया जाय और यह संदेश दिया जाय कि वह हिंदू विरोधी नहीं है। राहुल गांधी के मंदिरों में जाने की राजनीति की आलोचना भारतीय जनता पार्टी कर रही है, लेकिन राहुल गांधी ने स्पष्ट किया है कि वे शिव के भक्त हैं और जिन्हें जो कहना है, वे कहें।

इस बार कांग्रेस जाति का इस्तेमाल भी जीत के लिए कुशलता से कर रही है। आरक्षण के लिए पाटीदारों ने बड़ा आंदोलन किया था। आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल को कांग्रेस ने अपने भरोसे में ले लिया है। पाटीदार आंदोलन के खिलाफ ओबीसी आंदोलन का नेतृत्व अल्पेश ठाकोर ने किया था। अल्पेश भी कांग्रेस के साथ ही हैं। जिग्नेश ने दलितों के लिए आंदोलन चलाया था। वे भी कांग्रेस के पाले में ही है।



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