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बेबी को बेस पसंद है, राहुल गांधी को शार्ट्स पसंद है

गुजरात चुनाव नजदीक आते ही राहुल गांधी ने गुजरात पर डेरा डाल लिया है। वो नरेन्द्र मोदी के घर में घुसकर खुली चुनौती दे रहे हैं। गुजरात सरकार एवं केन्द्र सरकार को संयुक्त रूप से घेरकर हर दर्द बयां कर रहे हैं। वो यहीं नहीं रूके बल्कि गैर राजनीतिक संगठन आरएसएस पर भी तल्ख टिप्पणी कर रहे हैं। इस पर उन्होंने आरएसएस पर महिलाओं की उपेक्षा करने का आरोप लगाया। एक ऐसा बयान दे दिया जो द्विअर्थी है। उन्होंने कहा कि कभी संघ की शाखा में शार्ट्स पहनी हुई लड़की देखी है ? मतलब कम कपड़ो वाली लड़की संघ की शाखा में राहुल गांधी को नहीं दिखती है।

अपरिपक्व बयान

सामाजिक विदों की माने तो गुजरात चुनाव जैसे नाजुक मौके पर राहुल गांधी का बतौर राजनीतिक एक अपरिपक्व बयान कहा जा सकता है। ये द्विअर्थी बयान का एक अर्थ भी इतना महत्व नहीं रखता जितना कि कम कपड़ो वाली लड़की के अर्थ से कांग्रेस और राहुल गांधी को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है, तब तो और जब सामने नरेन्द्र मोदी जैसा राजनीतिक व्यक्तित्व हो। पहले भी वो राहुल गांधी की खूब चुटकियां ले चुके हैं और गुजरात चुनाव तक पता नहीं अभी कितना कुछ होना बाकी है कि कोई ना कोई इस प्रकार के बयान और चुटकियों से लहूलुहान ना हो जाए।

भाजपा ने दिया जवाब
गुजरात चुनाव के मद्देनजर भाजपा राहुल गांधी को कम से कम हल्के में नहीं ले रही है। यही कारण था कि स्वयं राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह दलबल के साथ अमेठी में सभा कर डाली और राहुल गांधी की तीन पीढ़ियों तक वार किया गया। अमेठी से हारना वाली केन्द्रीय मंत्री स्मृति इरानी लगातार राहुल गांधी के खिलाफ अमेठी की जनता के कान भरती रहती हैं एवं उनका दर्द सहलाकर मुहब्बत जताती रहती हैं। गुजरात में क्या होगा यह अभी गर्भ में है लेकिन जिस प्रकार से लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी की जीत का अंतर कम हुआ एवं अमेठी की चार विधायक सीट पर गैरकांग्रेसी दल का परचम लहराया, उससे प्रतीत हुआ कि राहुल की अमेठी खतरे में पड़ती जा रही है।

राष्ट्र सेविका समिति
केन्द्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने एक बयान में कहा कि संघ में राष्ट्र सेविका समिति एक शाखा है। जिसमें महिलाएं प्रतिभाग करती हैं। अलबत्ता यह सच है कि कम कपड़े में महिलाएं शाखा आदि सार्वजनिक स्थल पर नहीं होती हैं। कुलमिलाकर भाजपा के वार से इस बयान पर राहुल गांधी धर्म और संस्कृति को लेकर महिलाओं के पहनावे के मुद्दे पर घिर सकते हैं। जहाँ गुजराती गरबा में महिलाएं इतना प्रतिभाग करती हैं, वहाँ ऐसे बयान का कितना राजनीतिक लाभ मिलेगा यह राहुल गांधी के सलाहकार ही समझ सकते हैं।



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