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भतीजे की फिर ताज पोशी, चाचा चुन सकते है अपना रास्ता

मुलायम सिंह यादव के कुनबे में पिछले नौ महीने से कलह चलरही है। इसी कलह के बीच में ही सपा का 10  वां राष्ट्रीय सम्मेलन शुरू हो गया। इस सम्मेलन में अखिलेश यादव को दोबारा पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुन लिया गया। अब अखिलेश के चाचा व धुर विरोधी शिव पाल सिंह यादव अपना रास्ता चुनने के अलावा कोई विकल्प नही बचा है।
जनवरी 2017 में  लखनऊ में हुए राष्ट्रीय अधिवेशन में अखिलेश को मुलायम सिंह यादव के स्थान पर सपा का अध्यक्ष बनाया गया था लेकिन अब अधिवेशन में दोबारा अध्यक्ष चुना जाना और कार्य काल तीन से बढ़ाकर पांच साल करना इस बात का संकेत है कि वर्ष 2019 का लोकपाल चुनाव और उत्तर प्रदेश का विधानसभा चुनाव अखिलेश यादव की देखरेख में लडा जायेगा।

सपा का यह अधिवेशन ऐसे समय में हुआ जब पार्टी में अखिलेश यादव और शिवपाल खेमे में रस्साकशी चल रही है। अभी पिछले महीने मुलायम सिंह यादव ने प्रेस वार्ता में ऐलान कर दिया था कि उनका समर्थन अखिलेश के साथ है लेकिन इन्होेंने यह भी स्पष्ट कर दिया था कि वह अखिलेश के तमाम कार्यो से खुश नही है। उनके इस संकेत से अलग पार्टी या मोर्चे के गठन की संभावना खत्म हो गई थी और उनके हर बयान के बाद शिवपाल खेमे में मायूसी छा गई थी।

शिवपाल तो मुलायम के सहारे समाजवादी सेक्युलर मोर्चे के गठन की उम्मीद लगाये बैठे थे। लेकिन तब उन्हे करारा झटका लगा था। अब उनके पास अपनी राह चुनने का रास्ता है। शिवपाल के समर्थक मानते हैं कि सपा के राष्ट्रीय अधिवेशन के बाद कोई फैसला हो सकता है।

इस बीच यह भी खबर है कि सम्मेलन के बहाने अखिलेश और शिवपाल के बीच दूरिया कम करने की कोशिश की जा रही है अखिलेश पहले ही कह चुके है कि चाचा शिवपाल का आर्शीवाद हमारे साथ है। वैसे सम्मेलन में चाचा शिवपाल और मुलायम सिंह यादव की गौर मौजूदगी से पार्टी के जमीनी कार्यकर्ता असमंजस में है।

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