एक सिर मे, दूसरी गर्दन मे और तीसरी सीने मे और हत्या


बैंगलुरू मे अज्ञात तीन हमलावर द्वारा एक महिला पत्रकार की गोली मारकर हत्या कर दी गई। गौरतलब है कि इनकी जानी दुश्मनी बीजेपी के किसी नेता से होना बताया जा रहा और हत्या कराने का शक उसी पर जाहिर हो रहा है। हालांकि राजनीति की दुनिया मे कब क्या हो इसका अंदाजा लगाना मुश्किल होता है। वक्त तय करेगा कि गौरी लंकेश की हत्या का गुनहगार कौन है ?

इस हत्या को सच की हत्या करने की प्रासंगिकता से प्रसारित किया जा रहा है। हालांकि तमाम हत्याएं पूर्व मे भी होती रही हैं। लेकिन हमारे देश मे कुछ हत्या विशेष हो जाती है।
वैसी ही एक विशेष हत्या पत्रकार गौरी लंकेश की है। जिसकी कड़ी निंदा मे राहुल गांधी सहित तमाम सामाजिक कार्यकर्ता और पत्रकार सड़क पर उतर आए हैं।

दृष्टि के साथ दृष्टिकोण को अवश्य अपनाना चाहिए। जिस प्रकार से इनकी हत्या हुई वास्तव मे लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की आजादी पर चांदनुमा दाग है, जो कभी मिट नहीं सकता।
लेकिन बदलते दौर मे पत्रकार और राजनीति पर खूब सवाल खड़े होने लगे हैं।

संभव है कि इस हत्या के साथ देश मे फिर एक बार भूचाल आएगा। जिसमे तमाम साहित्यकार, पत्रकार एक विशेष मुद्दा बनाकर कैमरा, लाइट और एक्शन मे दिखेगें।

इस मुद्दे के गरमाने का एक और बड़ा कारण है कि अगले वर्ष यहाँ चुनाव भी होने वाले हैं। राजनीति की कड़ाही मे हत्या की पूड़ियां की कितने बनेगी वक्त पर साफ हो जाएगा।
समस्त पत्रकार जगत ने महिला पत्रकार की हत्या पर रोष जताया है। साथ ही सोशल मीडिया मे भी श्रद्धांजलि देने का तांता लगा हुआ है।



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