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अंतिम 15 चुनौतियों पर टिका है ISRO का Moon Mission

नई दिल्ली, 

चांद की सतह पर चंद्रयान-2 की सॉफ्ट लैंडिंग आज देर रात करीब दो बजे करीब होगी। इसके साथ ही भारत चंद्र मिशन में एक नया कीर्तिमान स्थापित कर देगा। हालांकि, ये चुनौती इतनी आसान नहीं है। लैंडिंग के अंतिम 15 मिनट बेहद चुनौतीपूर्ण होंगे। पूरे मिशन की कामयाबी इन अंतिम 15 मिनट पर ही टिकी है। आइये जानतें हैं क्या हैं ये चुनौतियां?

इसरो अध्यक्ष के. सिवन के अनुसार कंट्रोल रूम में वैज्ञानिकों की टीम पूरी एक्यूरेसी से काम कर रही है। चंद्रयान-2 को चंद्रमा के साउथ पोल पर सफलतापूर्वक उतारना सबसे बड़ी चुनौती है। एक छोटी सी चूक पूरे मिशन को खत्म कर सकती है। उन्‍होंने कहा, 'जब हम सब कुछ सही पाएंगे तो चंद्रयान-2 को चांद पर उतारने की प्रक्रिया शुरू होगी।' उन्‍होंने बताया कि 7 सितंबर को प्रात: काल 1:55 बजे, लैंडर चंद्रमा के साउथ पोल की सतह पर लैंड करेगा।

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अंतिम 15 मिनट पर टिकी है कामयाबी
इसरो वैज्ञानिकों के अनुसार चंद्रयान-2 का सफर जैसे-जैसे खत्म हो रहा है, कंट्रोल रूम में मौजूद वैज्ञानिकों की धड़कने बढ़ती जा रही हैं। सात सितंबर की सुबह करीब दो बजे चंद्रयान चांद की सतह को छुएगा। इसके ठीक पहले के अंतिम 15 मिनट पर पूरे मिशन की कामयाबी टिकी हुई है। अगर उन 15 मिनट में सबकुछ ठीक ठाक रहा तो भारत अपने अंतरिक्ष मिशन में इतिहास लिखेगा और अगर थोड़ी भी असावधानी हुई तो सारे मेहनत पर पानी फिर सकता है।

ऐसे होगी लैंडिंग
चांद पर उतरने से पहली सात सितंबर की सुबह करीब 1:40 बजे विक्रा का पावर सिस्टम शुरू होगा। उस वक्त विक्रम चांद की सतह के बिल्कुल सीध में होगा और अपने ऑनबोर्ड कैमरों की मदद से चांद की सतह की तस्वीरें लेनी शुरू कर देगा।

विक्रम अपनी खींची हुई तस्वीरों का, धरती से खींची गई चांद की सतह की तस्वीरों से मिलान करेगा। इसके आधार पर वह लैंडिंग के लिए सही जगह का चुनाव करेगा। इसरो ने लैंडिंग के लिए पहले से ही जगह चिन्हित कर रखी है। अब वैज्ञानिकों का पूरा प्रयास है कि चंद्रयान ठीक उसी जगह पर लैंड करे।

क्या है सॉफ्ट लैंडिंग
इसरो अध्यक्ष के. सिवन ने पूर्व में बताया था कि चंद्रयान 2 की लैंडिंग किसी साइंस फिक्शन फिल्मों की तरह होगी। साइंस फिक्शन फिल्मों में जिस तरह उड़नतश्तरियों को उतरते हुए दिखाया जाता है, 'विक्रम' भी चांद की सतह पर उसी तरह से उतरेगा। लैंडिंग की इस विशेष प्रक्रिया को ही सॉफ्ट लैंडिंग कहा जा रहा है।

इस प्रक्रिया में लैंडर पर लगा कैमरा, लेजर आधारित सिस्टम, कंप्यूटर और सभी सॉफ्टवेयर को बिलकुल सही समय पर व एक-दूसरे से तालमेल बैठाना होगा। इसरो अध्यक्ष ने कहा था, 'मुझे नहीं लगता किसी देश ने इस प्रक्रिया के जरिये लैंडिंग की है। इसमें लैंडर पर लगे कैमरे की मदद से वहां की तस्वीरें ली जाएंगी। फिर इसी आधार चंद्रयान के कंप्यूटर लैंडिंग की सही जगह तय करेंगे।'

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