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छठे चरण में होगी राजनीति की असली जंग, इन दिग्गजों का भविष्य होगा EVM के कैद में

लोकसभा चुनाव के छठे दौर के चुनाव के लिए शाम प्रचार समाप्त हो गया। इस चरण में सात राज्यों में 59 सीटों पर 12 मई को मतदान कराए जाएंगे। जिन सीटों पर मतदान कराए जाएंगे, उनमें से उत्तर प्रदेश की 14, हरियाणा की 10, तीन राज्यों बिहार, पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश में आठ-आठ सीटें और दिल्ली की सात तथा झारखंड की चार सीटें शामिल हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में इनमें से भाजपा ने 45, तृणमूल कांग्रेस ने आठ, कांग्रेस ने दो और सपा एवं लोजपा ने एक-एक सीट जीती थी। शाम लाउडस्पीकरों का शोर थम गया। चुनाव आचार संहिता के प्रावधानों के मुताबिक मतदान से पहले 48 घंटे की अवधि में उम्मीदवार किसी भी माध्यम से प्रचार अभियान नहीं कर सकते हैं।

उत्तर प्रदेश : दिग्गजों का इम्तिहान

उत्तर प्रदेश में छठवें चरण का चुनाव कई दिग्गजों के भाग्य का फैसला करेगा। प्रदेश के 14 संसदीय क्षेत्रों में 12 मई को होने वाले मतदान में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव, केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी, योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री रीता बहुगुणा जोशी, मुकुट बिहारी वर्मा, जगदंबिका पाल, रमाकांत यादव और संजय सिंह जैसे दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर है। बात आजमगढ़ से शुरू करें। पिछले चुनाव में यहां से सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव सांसद निर्वाचित हुए थे, लेकिन इस बार उनके पुत्र अखिलेश यादव अपने पिता की सीट बरकरार रखने के लिए मैदान में हैं।

 

पिछली बार सपा की जीत का अंतर बड़ा नहीं था, लेकिन इस बार बसपा से गठबंधन होने और कांग्रेस द्वारा समर्थन मिलने के कारण अखिलेश समर्थकों में आत्मविश्वास अधिक दिखता है। सपा से सीट छीनने के लिए भाजपा ने भोजपुरी फिल्मों के कलाकार दिनेश लाल यादव निरहुआ को मैदान में उतारा है।

सुलतानपुर से वरुण गांधी सांसद हैं, लेकिन उन्होंने अपनी मां मेनका गांधी से सीटों की अदला-बदली की है। वरुण पीलीभीत से उतरे और मेनका सुलतानपुर से चुनाव लड़ रही हैं। बसपा ने चंद्रभद्र सिंह सोनू को गठबंधन प्रत्याशी बनाया है।कांग्रेस ने पूर्व सांसद डॉ. संजय सिंह को मैदान में लाकर मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है। इलाहाबाद सीट से सांसद श्यामाचरण शुक्ल भाजपा से बगावत कर चुके हैं।

उनके स्थान पर भाजपा ने योगी सरकार में मंत्री रीता बहुगुणा जोशी को मैदान में उतारा है। इस सीट पर गठबंधन ने पिछड़ा कार्ड चलते हुए सपा के राजेंद्र सिंह पटेल को टिकट दिया है। कांग्रेस के योगेश शुक्ला मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने की कोशिश में हैं। फूलपुर सीट पर सबकी निगाहें है। 2014 में यहां पहली बार कमल खिला था।

भाजपा उम्मीदवार के तौर पर केशव प्रसाद मौर्य सांसद चुने गए थे। लेकिन 2017 के विधानसभा चुनाव के बाद मौर्य उप्र के उपमुख्यमंत्री बने, जिसके चलते उपचुनाव हुए और तब भाजपा ने सीट खो दी। सपा के नागेंद्र पटेल ने भाजपा के कौशलेंद्र पटेल को मात देकर ये सीट छीन ली। इस बार भाजपा ने केसरी देवी पटेल को उतारा है तो गठबंधन की ओर से पंधारी यादव मैदान में हैं। कांग्रेस ने पंकज निरंजन को टिकट दिया है।

प्रतापगढ़ में मुकाबला दिलचस्प दिख रहा है। अपना दल (एस) के सांसद हरिवंश सिंह का टिकट काटकर भाजपा ने संगम लाल गुप्ता को मैदान में उतारा है। गुप्ता अपना दल के टिकट पर वर्ष 2017 में विधायक निर्वाचित हुए थे।

 

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