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गंगा एक्ट बनाने की मांग को लेकर तप कर रहे स्वामी सानंद का निधन

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश में भर्ती स्वामी सानंद का गुरुवार दोपहर निधन हो गया। स्वामी सानंद को बुधवार को हरिद्वार प्रशासन ने एम्स में भर्ती कराया था। 87 वर्षीय आइआइटी कानपुर के पूर्व प्रो जीडी आग्रवाल ने जल भी त्याग दिया था। वह गंगा की अविरलता और निर्मलता को लेकर तपस्यारत थे। आज गुरुवार की दोपहर उनका शरीर शांत हो गया। एम्स के जनसंपर्क अधिकारी हरीश थपलियाल ने इस बात की पुष्टि की है।

बता दें कि इससे पहले 13 जून 2011 में गंगा रक्षा की मांग कर रहे निगमानंद की हिमालयन अस्‍पताल जौलीग्रांट में मौत हो गई थी। लगातार 114 दिन अनशन पर रहने के बाद निगमानंद की मौत हुई थी।गौरतलब है कि गंगा रक्षा के लिए गत 22 जून से मातृसदन आश्रम में तपस्यारत स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद ने नौ अक्‍टूबर से जल का भी त्याग कर दिया था। इसे देखते हुए बुधवार को प्रशासन ने उन्हें फिर ऋषिकेश एम्स में भर्ती करा दिया था। इससे पूर्व भी उन्हें एक सप्ताह के लिए एम्स में भर्ती कराया जा चुका था।

प्रशासन व चिकित्सकों की टीम उन्हें एंबुलेंस से एम्स ले गई थी। इससे पहले प्रशासन ने आश्रम व आसपास के क्षेत्र में निषेधाज्ञा लागू कर दी थी। बात दें किगंगा पर निर्माणाधीन जल-विद्युत परियोजनाओं को बंद करने, प्रस्तावित परियोजनाओं को निरस्त करने और कोई भी नई परियोजना स्वीकृत न करने समेत वर्ष 2012 में तैयार किए ड्राफ्ट पर गंगा एक्ट बनाने की मांग को लेकर स्वामी सानंद गत 22 जून 2018 से तप कर रहे थे।

इस अवधि में वह सिर्फ जल, नमक, नींबू और शहद ले रहे थे। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऋषिकेश को स्वामी सानंद अपना शरीर दान कर गए हैं। उनकी इस इच्छा का सम्मान करने के लिए एम्स प्रशासन जुट गया है। एम्स में डीन डॉ विजेंद्र सिंह ने बताया कि जब स्वामी सानंद स्वस्थ थे तो उन्होंने अपना शरीर एम्स को दान करने के लिए संकल्प पत्र हमें भिजवाया था। इस संकल्प पत्र का एम्स प्रशासन पालन करेगा और स्वामी सानंद की इस इच्छा का पूरा सम्मान किया जाएगा।

मातृ सदन के स्वामी शिवानंद महाराज का कहना है कि जिस तरह से उनके शिष्य ब्रह्मचारी निगमानंद की हत्या की गई थी, ठीक उसी प्रकार स्वामी सानंद की भी हत्या की गई है। हत्या करने वाले में जिलाधिकारी हरिद्वार, उपजिलाधिकारी मनीष कुमार सिंह, सीओ कनखल, एसओ कनखल, चौकी इंचार्ज जगजीतपुर व एक बड़े केंद्रीय मंत्री पर हत्या का आरोप लगाया गया है।

मातृसदन के  परमा अध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती ने घोषणा की है कि नवरात्रों के बाद वह स्वयं इस आंदोलन को आगे बढ़ाएंगे और स्वामी सानंद की हत्या में शामिल सभी अधिकारियों व मंत्रियों को सजा दिलाने की मांग को लेकर कठोर तपस्या (अनशन) करेंगे। पर्यावरणविद् राजेंद्र सिंह का कहना है कि पर्यावरणविद, राष्‍ट्रभक्‍त प्रो जीडी अग्रवाल का निधन बेहद दुख है। उन्‍होंने कहा कि सरकार तमाम तरह के बाबाओं से मुलाकात करती है, लेकिन सरकार ने इस संत की अनदेखी की है।

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद के देहावसान का समाचार पाकर विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल एम्स पहुंचे। प्रेमचंद अग्रवाल ने कहा कि स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद ने  गंगा की सेवा के लिए अपना जीवन आहूत किया है। उन्होंने स्वामी सानंद को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि गंगा की अविरलता व निर्मलता को लेकर उनकी मांगे जायज थी, जिन पर विचार किया जाना चाहिए था।

संभव है कि सरकार की कुछ मजबूरियां रही हैं। उन्होंने कहा कि स्वामी सानंद का देहावसान किन कारणों से हुआ यह पोस्टमार्टम के बाद ही पता चल पाएगा। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने स्वामी सानंद का व्रत तुड़वाने के लिए हर संभव प्रयास किया, इसलिए यह कहना गलत है कि केंद्र सरकार स्वामी सानंद के स्वास्थ्य को लेकर चिंतित नहीं थी।

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