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नीरव मोदी और मेहुल चौकसी के भागने मे पी एम का हाथ - कांग्रेस

'2015 से 1 मार्च 2018 तक अर्थात लगभग 3 वर्ष तक प्रधानमंत्री कार्यालय ने नीरव मोदी और मेहुल के खिलाफ फ्रॉड की जानकारी होते हुए भी कार्यवाही जानबूझकर नहीं की  ताकि 4 जनवरी 2018 को पहले ही नीरव मोदी और मेहुल चोकसी देश छोड़कर भागने में कामयाब हो जाएं।' यह आरोप कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में लगाएं।

सुरजेवाला ने कहा कि 7 मई 2015 को पहली बार वैभव खुरानिया और आर एम ग्रीन सोल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड ने मिनिस्ट्री ऑफ कॉर्पोरेट अफेयर्स और प्रधानमंत्री कार्यालय को इस पूरे फ्रॉड की जानकारी लेकर तथ्यों और साक्ष्य सहित उपलब्ध कराई थी। उन्होंने कहा कि इसकी कॉपी एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट और हीनियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन कार्यालय को भी दी गई थी। 

सुरजेवाला ने इसकी प्रतिलिपि प्रेस को उपलब्ध कराते हुए कहा कि 26 मई 2015 को प्रधानमंत्री कार्यालय ने इस बाबत दी गई शिकायत की रसीद भी उपलब्ध कराई है। उन्होंने कहा कि इससे यह सिद्ध होता है कि नीरव मोदी और मेहुल चौकसी  द्वारा किए जा रहे फ्रॉड की जानकारी प्रधानमंत्री कार्यालय को 7 मई 2015 को ही मिल गई थी।

सुरजेवाला ने इसकी रसीद भी प्रेस के समक्ष उपलब्ध कराई। उन्होंने कहा कि इसी प्रकार की एक और शिकायत मुंबई पुलिस कमिश्नर को भी की गई थी। सुरजेवाला ने इस सिलसिले में उस शिकायत की प्रतिलिपि भी प्रेस को उपलब्ध कराई और कहा कि इसके अलावा दिग्विजय सिंह जडेजा नामक व्यक्ति ने भी गुजरात इकनोमिक अफेंस  विंग में इस बाबत शिकायत दर्ज कराई थी।

उन्होंने उसकी प्रतिलिपि भी प्रेस को दी। उन्होंने कहा कि जडेजा द्वारा गुजरात हाईकोर्ट में एक शपथ पत्र देकर मुकदमा दायर किया गया कि मेहुल चौकसी और नीरव मोदी ने 10 हजार करोड रुपए से ज्यादा का पैसा बैंक से लिया है और यह देश छोड़कर भाग जाएंगे, जडेजा ने इस मुकदमे में भारत सरकार और गुजरात सरकार को भी पार्टी बनाया है।

सुरजेवाला ने इस शपथ पत्र की प्रति भी प्रेस को जारी की है। उन्होंने कहा कि 26 जुलाई 2016 को भी हरिप्रसाद नामक एक चौथे व्यक्ति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सीधे एक शिकायत पहुंचाई थी, जिसमें कहा गया था कि नीरव मोदी और मेहुल चौकसी बहुत बड़े फ्रॉड हैं जो बैंकों का पैसा ले कर भागने वाले हैं। उस शिकायत की प्रतिलिपि भी सुरजेवाला ने प्रेस को जारी की। 

सुरजेवाला के अनुसार 3 मई 2017 को वैभव खुरानिया  ने पुनः सेबी को शिकायत की इस शिकायत की प्रतिलिपि जारी करते हुए सुरजेवाला ने कहा कि प्रधानमंत्री कार्यालय से लेकर वित्त मंत्रालय और एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट से लेकर सेबी तक सभी प्रमुख एजेंसियों को यह जानकारी थी कि नीरव मोदी और मेहुल चौकसी ने 10 हजार  करोड़ रुपए का घोटाला किया है और वह भागने वाला है। 

सुरजेवाला ने कहा कि कपिल सिब्बल ने इस बारे में संसद में जवाब मांगा था जिसके जवाब में प्रधानमंत्री ने स्वीकार किया था कि मेहुल चौकसी और नीरव मोदी के खिलाफ शिकायतें विभिन्न एजेंसियों तथा प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंच चुकी हैं। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि 1 मार्च 2018 को वित्त मंत्रालय सहित अन्य एजेंसियों द्वारा इस बारे में उठाए गए कदमों का ब्यौरा प्रधानमंत्री कार्यालय को दिया गया था। 

सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने संसद को यह नहीं बताया कि मेहुल चौकसी और नीरव मोदी 4जनवरी 2018 में देश छोड़ चुके थे। उन्होंने कहा कि मार्च 2018 में प्रधानमंत्री कार्यालय जागा। सुरजेवाला ने कहा कि 26 मई 2015 से लेकर जनवरी 2018 तक दोनों आर्थिक अपराधियों के खिलाफ कोई कदम ना उठाना इस बात का सबूत है कि प्रधानमंत्री कार्यालय, वित्त मंत्रालय से लेकर अन्य एजेंसियों  तक यह सूचना पहुंच चुकी थी,  वह सब इन दोनों आर्थिक अपराधियों को भगाने में संलिप्त थे।

सुरजेवाला ने कहा कि रिपोर्ट ली गई 1 मार्च 2018 को जबकि भगोड़े भाग गए 4 जनवरी 2018 को। सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि 3 वर्ष तक मोदी सरकार ने मेहुल चौकसी और नीरव मोदी के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की, इसके लिए सीधे-सीधे प्रधानमंत्री जिम्मेदार हैं। सुरजेवाला ने यह भी आरोप लगाया कि एंटीगुआ में मेहुल चौकसी को सुरक्षित पनाह मुहैया कराने में भी मोदी सरकार की भूमिका है।

उन्होंने कहा कि एंटीगुआ की सरकार ने भारत के विदेश मंत्रालय सहित अन्य जवाबदेह एजेंसियों से मेहुल चौकसी के विषय में पूछताछ की थी, उन्होंने मेहुल चौकसी को मई और जून 2017 में क्लीन चिट देते हुए एक तरह से एंटीगुआ की नागरिकता थाली में परोस कर दे दी। सुरजेवाला ने कहा कि नवंबर 2017 में एंटीगुआ की नागरिकता भगोड़े मेहुल चौकसी को मिल गई 4 जनवरी 2018 को वह देश छोड़कर भाग गए।
 

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