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बीजेपी और कांग्रेस के आय एवं व्यय का विश्लेषण वित्तीय वर्ष 2016-17

राजनीतिक दल विभिन्न स्त्रोतों से दान प्राप्त करते है इसलिए जवाबदेही और पारदर्शिता उनके कामकाज का महत्वपूर्ण पहलू होना चाहिए। व्यापक और पारदर्शी लेखा प्रणाली के लिए पार्टियों को सही वित्तीय स्थिति प्रदर्शित करना आवश्यक है।
यहां पर ध्यान दिया जाना चाहिए की एडीआर ने राष्ट्रीय दलों पर Analysis of Income & Expenditure National Political Parties For DY - 2016-17 रिपोर्ट का विश्लेषण किया था जिसमें बीजेपी और कांग्रेस पार्टी का आॅडिट रिपोर्ट की जानकारी नही थी क्योंकि इन दो दलों को आॅडिट रिपोर्ट उस समय सार्वजानिक रूप से उपलब्ध नही था।

राष्ट्रीय दलों में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी), इंडियन नेशनल कांग्रेस (कांग्रेस), बहुजन समाज पार्टी (बसपा), नेशनल कांग्रेस पार्टी (एनसीपी), कम्यूनिस्ट पार्टी आॅफ इंडिया (सीपीआई), कम्युनिस्ट पार्टी आॅफ इंडिया (माक्र्सिस्ट) (सीपीएम) और आल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (एआइटीसी) है।

राष्ट्रीय दलों द्वारा प्रस्तुत आॅडिट रिपोर्ट

दलों द्वारा वार्षिक आॅडिट रिपोर्ट प्रस्तुत करने की नियमित तिथि 30 अक्टूबर 2017 थी।

बसपा, सीपीएम और एआईटीसी तीनों पार्टियों ने ही अपने आॅडिट रिपोर्ट्स निर्धारित समयसीमा से पहले प्रस्तुत की है।

बीजेपी ने अपना आॅडिट रिपोर्ट निर्धारित समयसीमा के 99 दिन बाद, 8 फरवरी 2018 को जमा किया वहीं कांग्रेस ने 138 दिन बाद अपना आॅडिट रिपोर्ट 19 मार्च 2018 को चुनाव आयोग के प्रस्तुत किया।

राजनीतिक दलों के आय एवं व्यय - वित्तीय वर्ष 2016-17

वित्तीय वर्ष 2016-17 के दौरान 7 राष्ट्रीय दलों की कुल आय रु 1,559.17 करोड़ था।
बीजेपी ने कुल रु 1,034.27  करोड़ का आय और रु 710.057 करोड़ का कुल व्यय घोषित किया।
कांग्रेस ने वित्तीय वर्ष 2016-17 में कुल रु 225.36 करोड़ का आय घोषित किया है परन्तु पार्टी ने कुल आय से (43 प्रतिशत) रु 96.30 करोड़ अधिक खर्च किया है।
वित्तीय वर्ष  2016-17 में बीएसपी ने कुल आय का 70 प्रतिशत और सीपीआई ने अपने कुल आय का 31 प्रतिशत और सीपीएम के कुल आय का 6 प्रतिशत खर्च नही किया।


वित्तीय वर्ष 2016-17 के लिए राष्ट्रीय दलों की कुल आय

राष्ट्रीय दलो की आय पूरे भारतवर्ष से विभिन्न स्त्रोतों से संकलित की गई है जैसा की उन्होंने अपने आॅडिट रिपोर्ट में प्रस्तुत किया है।
कुल आय रु 1,034.27 करोड़ के साथ राष्ट्रीय दलों में से बीजेपीने सबसे अधिक आय घोषित की है जो इन 7 दलों के कुल आय का 66.34 प्रतिशत है।
दूसरे स्थान पर कांग्रेस ने रु 225.36 करोड़ घोषित किया है जो राष्ट्रीय दलों के पुरे आय का 14.45 प्रतिशत है।
सीपीआई ने रु 2.079 करोड़ की सबसे कम आय घोषित की है जो वित्त 2016-17 के दौरान 7 राष्ट्रीय दलों की कुल आय का मात्र 0.13 प्रतिशत है।

वित्तीय वर्ष 2015-16 और 2016-17 के बीच राष्ट्रीय दलो की कुल आय की तुलना

वित्तीय 2015-16 और 2016-17 के बीच बीजेपी की आय में 81.18 प्रतिशत (रु 463.41 करोड़) वृद्धि हुई है। वित्त 2015-16 में बीजेपी की आय रु 570.86 करोड़ थी जो वित्त 2016-17 में बढ़कर रु 1,034.27 करोड़ हो गयी है।
कांग्रेस की आय में 14 प्रतिशत (रु 36.20 करोड़) की गिरावअ हुई है। कांग्रेस ने वित्त 2015-16 में रु 261.56 करोड़ दर्शाया था लेकिन पार्टी की आय वित्त 2016-17 में घटकर रु225.36 करोड़ हो गयी है।
बसपा की आय में 266.32 प्रतिशत (रु 126.195 करोड़) की वृद्धि हुई और एनसीपी की आय में 88.63 प्रतिशत (रु 8.098 करोड़) की वृद्धि हुई है।
यहां पर ध्यान देने की बात है कि पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना मंे इस साल वित्त वर्ष 2016-17 में एआइटीसी की आय 81.52 प्रतिशत (रु 28.188 करोड़) घटा है जबकि सीपीएम की आय में 6.72 प्रतिशत (रु 7.224 करोड़) कमी देखी गयी है।

बीजेपी और कांग्रेस के आय के प्रमुख 3 स्त्रोत

बीजेपी और कांग्रेस के शीर्ष तीन मुख्य आय स्त्रोतों मे से सबसे अधिक धन स्वैच्छिक योगदान से प्राप्त किया है। बीजेपी रु 999.12 करोड़ और कांग्रेस रु 50.626 करोड़।
वित्तीय वर्ष 2016-17 मे, बीजेपी को पूरे भारतवर्ष से स्वैच्छिक योगदान से सबसे अधिक रु 997.12 करोड़ प्राप्त हुआ है जो पार्टी की कुल आय का 96.41 प्रतिशत है। कांग्रेस को सबसे अधिक आय रु 115.644 करोड़ "Revenue from issuance of Coupons" से प्राप्त हुआ है जो कुल आय का 51.32 प्रतिशत है।



राष्ट्रीय दलों द्वारा घोषित आय के सभी स्त्रोत

वित्तीय वर्ष के दौरान, राष्ट्रीय दलों ने सबसे अधिक 74.98 प्रतिशत (रु 1,169.07 करोड़) की आय ”स्वच्छिक योगदान“ से अर्जित की है।
सभी राष्ट्रीय दलों ने बैंकों से ब्याज और एफडी से रु 128.60 करोड़ की आय प्राप्त की है।
वित्तीय वर्ष के दौरान सभी राष्ट्रीय दलों ने "Revenue from issuance of Coupons" से 7.98 प्रतिशत यानि की रु 124.46 करोड़ की आय जमा किया है।



अवलोक और सुझाव

7 राष्ट्रीय दलों में से 4 दलों (बीजेपी, कांग्रेस, एनसीपी और सीपीआई) ने अपना आॅडिट रिपोर्ट पिछले पांच सालों से लगातार देरी से जमा कर रहे है। शीर्ष प्रमुख दलों में से बीजेपी और कांग्रेस ने अपना आॅडिट रिपोर्ट हर साल औसतन लगभग 6 महीने देरी से भरते है।

विश्लेषण करते समय यह देखा गया है कि 7 राष्ट्रीय दलो  की आय में रु 525.99 करोड़ की वृद्धि हुई है जो पिछले साल की तुलना में 51 प्रतिशत अधिक है। वित्तीय वर्ष 2015-16 में इन 7 दलों की कुल आय रु 1,033.18 करोड़ थी जो वित्तीय वर्ष 16-17 में बढ़कर रु 1,559.17 करोड़ हो गयी। 

7 राष्ट्रीय दलों ने वित्तीय वर्ष 2016-17 के दौरान स्वैच्छिक योगदान से सबसे अधिक 74.98 प्रतिशत (रु 1,169.07 करोड़) की आय अर्जित की है। इसके तुलना में वित्तीय वर्ष 2015-16 मे  इन दलों की स्वैच्छिक योगदान से केवल 60 प्रतिशत (रु 606.05 करोड़) ही आय प्राप्त की थी।

सुप्रीम कोर्ट ने 13 सितम्बर 2013 को यह घोषित किया कि उम्मीदवारों के शपथपत्र का कोई भी हिस्सा खानी नहीं रहना चाहिए इसी के तर्ज पर फार्म 24ए (जो कि राजनीतिक दलों द्वारा रु 20,000 से ज्यादा दान देने वाले लोगों के लिए प्रस्तुत किया जाता है) का भी कोई हिस्सा खाली नही होना चाहिए।

क्योकि राजनीतिक दलों की आय का अधिकतम प्रतिशत (80 प्रतिशत) अज्ञात स्त्रोतों से आता है, दानदाताओं की पूरी जानकारी, सार्वजनिक जाँच के लिए आम जनता को उपलब्ध होनी चाहिए। भूटान, नेपाल, जर्मनी, फ्रांस, इटली, ब्राजील, बल्गेरिया, अमेरिका तथा जापान जैसे देशों में ऐसा किया जा है। इन देशों में से किसी भी देश में रानीतिक दलों के आय स्त्रोत का 80 प्रतिशत अज्ञात रहना असम्भव होगा।

आईसीएआई का यह दिशा निर्देश की राजनीतिक दलों के आॅडिट रिपोर्ट का इनकम टैक्स डिपार्टमेन्ट द्वारा छानबीन की जानी चाहिए। किन्तु इसका पालन नही होता है। राजनीतिक दलों को सूचना का अधिकार अधिनियम के अन्तर्गत निरन्तर तौर पर जानकारी प्रदान करनी चाहिए। ऐसा करने से ही राजनीतिक दल चुनाव प्रक्रिया एवं लोकतंत्र सशक्त होगा।

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