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केन्द्र ने स्वीकार किया, कुओं का जल स्तर गिरा

देश के शहरी क्षेत्रों सहित 61 प्रतिशत कुओं में भूमि जलस्तर गिर रहा है। साथ ही प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता में उत्तरोत्तर कमी हो रही है।

यह बात कल राज्य सभा में जल संसाधन/नदी विकास और गंगा संरक्षण एवं संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सांसद चौधरी सुखराम सिंह यादव, विश्वम्भार प्रसाद निषाद और श्रीमती छाया वर्मा द्वारा पूछे गए अतरांकित प्रश्न के जवाब में कही। इन सांसदों ने सवाल किया था कि देश में भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा हे। जिससे कई क्षेत्रों में जल संकट पैदा हो रहा है और महानगरों व अन्य शहरों में जल की उपलब्धता की समस्या निरन्तर विकराल होती जा रही है।

इसके जवाब में राज्य मंत्री ने बताया कि केन्दीय भूूमि जल बोर्ड (सीजीडब्लूयूबी) देश में प्रेक्षण कुओ  के नेटवर्क द्वारा क्षेत्रीय स्तर पर वर्ष में चार बार भूमि जल की निगरानी करता है। सीजीडब्लूयूबी द्वारा एकत्र किये गए भूमि जल सम्बन्धी आंकड़ों की मानसून पूर्व (2017) की दशकीय औसत (2007-2016) के साथ तुलना करने पर पता चलता है कि देश की शहरी क्षेत्रों में जल स्तर गिर रहा है। 

उन्होंने कहा कि इसके कई करण है। तेजी से जनसंख्या में वृद्धि, तेजी से शहरी करण, औद्योगिक करण प्रमुख कारक है। कहा कि वर्ष 2001 की जनगणना के अनुसार देश में प्रति व्यक्ति वार्षिक जल उपलब्धता 1816 घनमीटर प्रति वर्ष थी जो 2011 की जनगणना में घटकर 1545 घनमीटर प्रति वर्ष हो गई है। इसके अतिरिक्त 2025 और 2050 में क्रमशः 1340 और 1140 घनमीटर प्रति वर्ष रह जायेगी। उन्होंने यह कहा कि कोई भी जलापूर्ति परियोजना चालू कराने में 3.5 वर्ष लग सकता है। ऐसे में लोगों को दूषित जल पीने देने का जोखिम नही उठाया जा सकता है। इसके लिए सभी राज्यों को जल शुद्धिकरण यंत्र लगाने की सलाह दी गई है।

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