< देर रात और अल सुबह होती थी मवेशियों की तस्करी Hindi News - Breaking News, Latest News in Hindi, हिंदी में समाचार, Samachar - Bundelkhand News

देर रात और अल सुबह होती थी मवेशियों की तस्करी

बुन्देलखण्ड में अन्ना मवेशियों के तस्करों की खूब चांदी कटी और इन्होंने इस धंधे में पशुओं की तस्करी करके खूब कमाई भी कर ली है। हालांकि कुछ माह से तस्करों पर कड़ी लगाम के चलते अब तस्कर भी हाथ पटकर कर रह गए है। लेकिन बीते कुछ माह तक की बात करें तो कई ट्रक पकड़े गए और अन्ना मवेशियों को मुक्त भी कराया गया। इनके साथियों में गांव के कुछ दलालों की भी भूमिका होती है, जो इन्हें अन्ना मवेशियों की सूचना देकर जेबें भरते रहे।

अन्नदाता अब अन्न की रखवाली करने के लिए ही कड़ी मशक्कत कर रहा है और पूरी रात खेतों पर काट रहा है। किसानों की मंशा है कि फसलों को किसी तरह से बचाकर जो भी उत्पादन हो वो घर ले जाएं। वहीं मवेशियों के तस्करों को कई बार दबोचे जाने से अब ऐसे माफियाओं पर लगाम लगती दिखाई दे रही है।

हालांकि पिछले छह माह पर ही नजर दौड़ाएं तो ट्रकों में भरकर ले जाते कई स्थलों पर अन्ना मवेशियों को पकड़ा गया। इसमें मऊरानीपुर तहसील में करीब पांच माह पूर्व ही पुरानी मऊ से सुखनई नदी की ओर जाने वाले रास्ते पर तीन ट्रकों को पकड़ा गया था। जिसमें कई मवेशी थे। इसको लेकर हंगामा हुआ था, इसमें हिन्दू संगठन भी कूद पड़े थे। ड्राईवर वाहन छोड़ कर भाग गए थे। ट्रक में इंजेक्शन और दवाएं भी मिली थी, जिससे पशु हल्ला न करें।

इसी तरह मोंठ में भी करीब 4 माह पूर्व ट्रक से करीब एक सैकड़ा मवेशियों को पकड़ा गया था। जिसमें आधा सैकड़ा से अधिक गौवंश पकड़ा गया था। करीब ढाहई माह पूर्व झांसी- कानपुर हाईवे पर भी गौ तस्करों के वाहन को पकड़ा गया था। जिसको लेकर अब गौ तस्करों में दहशत है और काफी दिनों से गौ तस्कर हाथ पर हाथ धरे बैठे है।

कैसे करते थे प्लानिंग

तस्करों ने अन्ना मवेशियों की तस्करी करने के लिए टाईिमंग का पूरा खाका बना रखा था। देर रात गांव के पास घूमते अन्ना मवेशियों को उठाने के लिए ये ट्रक में पटिया, और रस्सियों का प्रयोग करते है। देर रात गांव में जब सन्नाटा हो तब इन्हें बांधकर ट्रक में भर लेते थे। ट्रक के पीछे पटियों से बंद करते थे ताकि पीछे से आ रही गाड़ियों की लाईट न पड़े।

बोले किसान नेता

किसान नेता शिवनारायण परिहार ने कहा कि अन्ना मवेशियों की तस्करी पर तो गिरावट हुई है। लेकिन अब प्रशासन का काम है इन्हें आश्रय स्थलों तक पहुंचाए ताकि इनके पेट खाली न रहें और किसान की खेती बर्बाद न हो।

About the Reporter

अन्य खबर

चर्चित खबरें