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हस्त शिल्प मेले में छाई उदासी, शिल्प मेला बना व्यापार का अड्डा

झांसी में इन दिनों शिल्प मेला अपने पूरे शबाब पर चल रहा है। प्रतिदिन हजारों दर्शक मेले का आनंद उठा रहे हैं। मेला में लगे मनमोहक झूले, कार सर्कस, टावर झूला आदि के साथ खाने-पीने की व्यवस्था जैसे स्नेक्स, आइस क्रीम, मिठाई, पान आदि के स्टाॅल वाले आने वाली जनता से  मनचाहा चार्ज भी वसूल रहे।

किन्तु हस्त शिल्प वाले स्टाॅलों पर सूनसान पड़ा है और हस्त शिल्पियों में उदासी छाई हुई है। इस बार हस्त शिल्पियों का बाजार अलग होने के वावजूद भी कोई उनके लिए कोई आकर्षक द्वार भी निर्माण नही किया गया। शिल्प मेले की मनमोहक दृश्र्य के सामने मेले में आने वाली जनता का हस्त शिल्प मेले की ओर ध्यान ही नही जाता, तो फिर कैसे जनता शिल्पियों का हौसला बढ़ाने को आगे आ सकेगी। जिसके मुख्य कारण हैं हस्त शिल्प मेला में व्याप्त कमियां।

स्वच्छता अभियान की उड़ाई जा रही धज्जियां
एक तो दर्शक और घूमने वालों को नही मिल पा रही आवश्यक सुविधाएं, जैसे पीने के पानी की व्यवस्था नगर निगम ने नही की, दूसरी जन सुविधाएं जो कि मुख्य द्वार के बाहर प्रधानमंत्री का स्वच्छता अभियान की धज्जियां उड़ाती हुई नजर आ सकती हैं। मेले के व्यवस्थापक द्वारा शौचालय का प्रबन्ध भी ऐसे स्थान पर किया गया है जहां पहुंच पाना भी जनता के लिए बड़ी मुश्किल का काम है।

मेले का मुख्य उद्देश्य हस्त शिल्प कारीगर को एवं हस्त शिल्प को बढ़ावा देना है किन्तु इस बार सिर्फ व्यापार की दृष्टि से इस मेले का आयोजन किया गया है। और मेले का नाम भी ‘हस्त शिल्प मेला’ से बदलकर ‘शिल्प मेला’ कर दिया गया। आखिर कैसे छोटे उद्यमियों को पहचान मिलेगी।

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