< जिला पंचायत अध्यक्ष को हटाने का दाँव नया नही Hindi News - Breaking News, Latest News in Hindi, हिंदी में समाचार, Samachar - Bundelkhand News जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती निर्मला सिंह चैधरी अध्य"/>

जिला पंचायत अध्यक्ष को हटाने का दाँव नया नही

जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती निर्मला सिंह चैधरी अध्यक्ष है जिनके सिर पर अविश्वास प्रस्ताव की तलवार लटक रही है। इसके पहले भाजपा और सपा के दो-दो व बसपा के एक अध्यक्ष को अविश्वास प्रस्ताव आने पर कुर्सी गंवानी पडी है।

मौजूदा जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती निर्मला सिंह सपा के वरिष्ठ नेता लाखन सिंह की चाची है। लाखन सिंह उनका प्रतिनिधि बनकर जिला पंचायत की कमान संभाल रखी थी। सूबे की सरकार बदलते ही जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी हथियाने की कवायद तेज हो गई थी। इधर 30 में से 16 सदस्यो द्वारा डी एम को शपथ पत्र देकर आविश्वास व्यक्त किया गया और कल डी एम महेन्द्र बहादुर सिंह ने अविश्वास प्रस्ताव की तिथि 23 जनवरी तय कर दी। इसके बाद यह तय हो गया कि जिला पंचायत की कुर्सी सपा से छिन जायेगी।

जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी छीनने का कोई यह नया खेल नही है। इसकी शुरूआत 1997 मे तत्कालीन अध्यक्ष कृष्ण कुमार भारतीय के समय हुई। भाजपा के कम सदस्य होने के कारण उन्हे कुर्सी गंवपनी पडी। उनके बाद भाजपा के जगराम सिंह चैहान जिला पंचायत के अध्यक्ष चुने गए। 25 मे 15 सदस्योे ने उन्हे वोट दिये। अविश्वास प्रस्ताव की दूसरी बारी 2007 मे आई उस वक्त सपा के कुशलध्वज सिंह अध्यक्ष थे। सदस्यो की बगावत की भनक लगते ही कुशल ने अविश्वास प्रस्ताव के पहले ही पद से इस्तीफा दे दिया था। कुशल के बाद बसपा के समर्थन से शकील अली की जिला पंचायत अध्यक्ष पर ताजपोशी हुई। उनके कार्यकाल मे अविश्वास प्रस्ताव की नौबत नही आई।
उनके बाद 2011 मे बसपा की किरन वर्मा निर्विरोध जिला पंचायत की अध्यक्ष चुनी गई। लेकिन सवा साल बाद ही सत्ता परिवर्तित होते ही किरन वर्मा की कुर्सी डगमगाने लगी। उनके खिलाफ सपा के सदस्य अविश्वास प्रस्ताव लाये और मतदान मे उन्हे पराजय का सामना करना पडा। उनके  बाद 7 माह तक संचालन समिति ने कार्यभार संभाला। 2012 मे महेन्द्र सिंह वर्मा बसपा से सपा मे आ गये और 28 जनवरी 2013 मे 13 वोट पाकर अध्यक्ष चुने गये। लेकिन कुछ ही दिनो बाद उन्हे भी अविश्वास प्रस्ताव का सामना करना पडा। अविश्वास प्रस्ताव मे सीट गंवा बैठे और बसपा के बल्देव वर्मा 21 दिसम्बर 2015 को  अध्यक्ष बन गये।

अब सत्ता बदलने के बाद निर्मला सिंह की कुर्सी भी डगमगा रही है। अब देखना है कि सपा की शामली निर्मला सिंह अपनी कुर्सी बचाने मे कामयाब हो पाती है या अन्य अध्यक्ष की भांति कुर्सी गंवा देंगी।

जिला पंचायत अध्यक्ष ने अपहरण के मामले को फर्जी बताया


जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की रस्सा कशी तेज हो गई है। भाजपा जिला मंत्री व उनकी जिला पंचायत सदस्य पत्नी का कथित अपहरण के मामले मे भाजपा अध्यक्ष द्वारा अपहरण का मुकदमा दर्ज कराने पर जिला पंचायत अध्यक्ष ने इसे निराधार और अपने खिलाफ साजिश करार दिया है।

भाजपा के जिलाध्यक्ष इन्द्रपाल सिंह पटेल ने भाजपा संगठन मंत्री सीताराम व उनकी जिला पंचायत सदस्य पत्नी आशा के रहस्यमय गायब हो जाने पर जिला पंचायत अध्यक्ष निर्मला सिंह, उनके भतीजे व प्रतिनिधि लाखन सिंह बाबू सिंह व उनके पुत्र टिंकू के खिलाफ अपहरण का मुकदमा दर्ज करया है। मजेदार बात यह है कि  आशा वर्मा सदस्य जिला पंचायत ने डीएम के नाम शपथ पत्र भेजकर दावा किया है कि उसका अपहरण नही हुआ है। वह अपनी रिश्तेदारी मे गई है फिर भी बिसण्डा थाने मे अध्यक्ष व उसके परिजनो के खिलाफ मुकदमा दर्ज हो गया है। इधर जिला पंचायत अध्यक्ष ने इसे फर्जी करार देते हुए साजिश बताया है।

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