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न्याय पंचायत के बावजूद भी नहीं है अस्पताल व पानी की टंकी

कहने को तो केन्द्र व राज्य सरकार भले ही गांव के विकास के लिए करोड़ों रू खर्च कर रही हो लेकिन कुछ गांव आज भी ऐसे हैं जो आज भी विकास की आस लगाए बैठे हैं। ऐसा ही एक गांव महरौनी तहसील का ग्राम बिल्ला है, जो आज भी विकास के लिए तरस रहा है। कहने को तो यह गांव न्याय पंचायत है लेकिन अगर बात की जाए यहां के विकास की तो विकास के मामले में यह गाँव काफी पिछड़ा है। इस गांव की आबादी लगभग 7000 है लेकिन यहां के वाशिंदे आज भी विकास की आस लगाए बैठे हैं। इस गांव में सबसे बड़ी समस्या पेयजल की होती है क्योंकि इस गांव में हैण्ड पम्प तो हैं लेकिन उनमें पानी नहीं निकलता है। गरमी के मौसम में तो यह समस्या विकराल रूप धारण कर लेती है और गर्मियों में पानी की हा-हाकार मच जाती है और लोगों को कोसों दूर से पानी लाना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि इस गांव में पानी की टंकी का बनना बहुत जरुरी है, तभी इस समस्या से हम लोगों को छुटकारा मिलेगा।

अगर बात की जाए शिक्षा की तो शिक्षा के मामले में भी यह गाँव काफी पीछे है क्योंकि इस गांव में आठ तक तो स्कूल हैं लेकिन इसके आगे की शिक्षा के लिए गाँव के छात्रों को बानपुर या जिला मुख्यालय ललितपुर आना पड़ता है। जिस कारण गाँव के बच्चे उच्च शिक्षा ग्रहण नहीं कर पाते हैं और घर बैठ जाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इस गांव में एक इण्टर कालेज की आवश्यकता है। अगर गांव में इण्टर कालेज बन जाएगा तो हम गांव वालों को यह कालेज वरदान साबित होगा और हमारे बच्चों को अच्छी शिक्षा मिलने लगेगी। कहने को तो यह गांव बहुत बड़ा गाव है लेकिन यहां पर ना तो कोई अस्पताल है जिस कारण गांव वालों को मजबूरन झोलाछाप डाक्टरों से इलाज करवाना पड़ता है। अगर रात्रि में कोई बीमार हो जाता है तो उसे बानपुर या ललितपुर लाना पड़ता है।

ग्रामीणों का कहना है कि अस्पताल के संबंध में हम लोग विधायक व मंत्री से भी मिल चुके है लेकिन हम लोगों की अर्जी पर ध्यान नहीं दिया गया। अतएव इस गांव में एक सरकारी अस्पताल का होना बहुत जरूरी है। इस मामले में स्थानीय निवासी पुष्पेन्द्र राजपूत का कहना है कि हमारा गांव एक बहुत बड़ा गांव है लेकिन अभी तक इस गांव में अस्पताल नहीं बनी है हम गांव वालों को अस्पताल की बहुत जरूरत है ताकि हम लोगों को इलाज के लिए इधर उधर नहीं भटकना पड़ेगा।



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