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आइये एक ऐसा मजहब चलाया जाये, जिसमें इंषा को इंसान बनाया जाये

मानव सत्संग समिति कोलकाता का 23वां साधना सिविर दीनदयाल शोध संस्थान के उद्यमिता परिसर में पालन किया जा रहा है। इसमें श्रीराम कथा का आनन्द प्राप्त हो रहा है। साधना षिविर 300 वरिष्ठ नागरिकांे को लेकर हर वर्ष एक धार्मिक स्थल पर की जाती है। इस षिविर द्वारा वरिष्ठ नागरिकों को अच्छा से अच्छा भोजन प्रदान किया जाता है। हर रोज श्रीराम कथा का आयोजन किया जाता है। 7 दिन की इस धार्मिक साधना षिविर में धार्मिक स्थलों का भ्रमण भी शामिल किया जाता है।

आज के इस आधुनिक युग में जहाँ बच्चों को अपने अभिभावकों के लिए धार्मिक यात्रा के लिए पैसे तो है पर समय, भाव और प्रेम का अभाव है। मानव सत्संग समिति कोलकाता इसके संस्थापक श्री घनष्याम दास मोदानी के नेतृत्व में विगत 17 वर्षों से 4 बार 84 कोस ब्रजयात्रा एवं 19 बार रामकथा का आयोजन विभिन्न धार्मिक स्थानों पर किया है। इस साधना षिविर के द्वारा संस्था प्रेम, संस्कार, धर्म एवं आध्यात्म को बढ़ावा देती है। इसमें भाग लेने वाले साधक भाव विभोर होकर दिन तारीख भूल जाते हैं। 23वां साधना षिविर में श्री रामकथा का श्रवण कथा व्यास परम पूज्य साध्वी डाॅ0 विष्वेष्वरी देवी जी (हरिद्वार धाम) द्वारा लाभान्वित हो रहा है। पंचम दिवस की कथा पर देवी जी नवधा भक्ति पर रामकथा अपने संगीत शैली में प्रस्तुत करते हुए कहा कि निराकार रूप से सर्वत्र विद्यमान परमात्मा ज्ञानियों को आनन्द प्रदान करते हैं, किन्तु भक्तों को आनन्द देने के लिए उन्हें निराकार से साकार बनकर आना पड़ता है। श्रीराम अवतार अनेक संस्कृतियों को जाति एवं भाषाओं को तथा खंडित भारत वर्ष को जोड़ने के लिए व उन्होंने अवध और मिथिला की संस्कृतियों को जोड़ा। किष्किंधा एवं लंका तक की यात्रा करके अनेक जातियों एवं पृथक आचार विचार वाले लोगों को जोड़कर अखंड भारत का निर्माण किया।

अयोध्या में राम जन्मोत्सव का दर्षन करने के लिए भगवान शंकर का भी आगमन हुआ। भगवान की बाल लीलाओं का वर्णन कथा के माध्यम से किया गया जिसका उद्देष्य है कि व्यक्ति को बालक की तरह निर्लेप जीवन व्यतीत करना चाहिए।

चारों भाई गुरूकुल में विद्या अध्ययन के लिए गए और पूर्णकाल तक गुरू सेवा गुरू आज्ञा का पालन करते हुए गुरू आश्रम में रहे। गुरू सेवा से ही सच्चा ज्ञान प्राप्त होता है। विष्वामित्र जी के माध्यम से श्रीराम जी ने ताड़का का वध किया एवं उनके यज्ञ को पूर्ण किया। यज्ञ संस्कृति के रक्षण के लिए ही भगवान के द्वारा ये लीलाएं पूर्ण की गयीं।

जनकपुर की लीला में भगवान ने भक्ति की प्रधानता का दर्षन कराया है। महाराज जनक राम दर्षन करने के बाद ज्ञानी से भक्त बन गए। पुष्पवाटिका में भक्ति स्वरूपा श्री जानकी जी का दर्षन भगवान को प्राप्त हुआ, जिसके पश्चात् भक्ति एवं भगवान के अटूट सम्बन्ध का प्रारम्भ हुआ। बिना भक्ति के भगवान नहीं मिलते। जनकपुरवासियों को जब श्री जानकी जी प्राप्त हो गयीं तो भगवान श्रीराम पैदल चलते हुए स्वयं जनकपुर में आ गये। श्री जानकी साक्षात् भक्ति हैं। अतः भक्ति की कृपा से जनकपुरवासियों को भगवान मिल गये। अभियान स्वरूप षिव धनुष का खण्डन करके भगवान ने संकेत दिया कि अभिमानी जीव का अभिमान जब तक खंडित नहीं होगा तब तक वह भगवत कृपा का अनुभव नहीं कर सकता। धनुष भंग के पश्चात् माता सीता जी ने भगवान को जयमाला पहनाई, उपस्थित श्रद्धालुओं ने अत्यंत आनंद पूर्वक भगवान के विवाह का उत्सव मनाया।   श्रीरामकथा का समय सुबह 10 बजे से अपरान्ह 1 बजे तक निष्चित किया गया है। इसका समापन 31 दिसम्बर को होना सुनिष्चित हुआ है। समस्त श्रीराम कथा प्रेमी सादर आमंत्रित हैं। इस समिति का परिचय बडे़ भाव से देते हुए श्री राकेष सिंह ने कहा.......

आइये एक ऐसा मजहब चलाया जाये, जिसमें इंषा को इंसान बनाया जाये।  

 

About the Reporter

  • राजकुमार याज्ञिक

    चित्रकूट जनपद के ब्यूरो चीफ एवं भारतीय राष्ट्रीय पत्रकार महासंघ के जिलाध्यक्ष राजकुमार याज्ञिक चित्रकूट जनपद के एक वरिष्ठ पत्रकार हैं। पत्रकारिता में स्नातक श्री याज्ञिक मुख्यतः सामाजिक व राजनीतिक मुद्दों पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं।, .

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