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बुंदेलखंड में सूखे की त्रासदी ने सिंचाई के पानी के लिए किसानों क"/>

सिचांई के लिये किसान कुछ भी करने को मजबूर

बुंदेलखंड में सूखे की त्रासदी ने सिंचाई के पानी के लिए किसानों को एक दूसरे का खून बहाने के लिए मजबूर कर दिया है। सर्वाधिक बांधाों का जिला होने के बाद भी महोबा में सिंचाई विभाग ने रबी की फसल के पलेवा व सिंचाई के लिए पानी दे पाने में हाथ खड़े कर दिए हैं। ऐसे में बांध के नजदीकी गांवों में नहर में रिस कर बह रहा पानी किसानों को जीवन की संजीवनी दिख रहा है। नतीजा हर कोई उस पानी से अपना खेत सींचने को आतुर है। अभी कुछ दिन पहले आधा दर्जन से अधिक गांवों के किसानों ने सिंचाई विभाग कार्यालय आकर पानी के की मांग की थी।

दरअसल बुंदेलखंड के लाखों किसान बीते दस साल से पांचवी बार सूखे के संकट से जूझ रहे हैं। इस बीच तीन बार कभी ओला वृष्टि तो कभी अतिवृष्टि से भी फसलें चैपट हुईं। सरकार की सिंचाई प्रणाली अरबों रुपए व्यय करने के बाद भी किसी काम नहीं आ पा रही। इस बार फिर सूखा के चलते न तो खरीफ की फसल हो पाई न ही रबी की बुवाई हो पा रही है। साल दर साल प्रकृति की मार झेल रहे किसान पूरी तरह कंगाल हो आत्महत्या करने को मजबूर हो रहे हैं। मंडल में अब तक पांच सौ से अधिक किसान प्रकृति जनित इस तबाही से पैदा हुई तंगहाली के कारण कर्ज मर्ज व बेटी की शादी का बंदोबस्त न कर पाने की निराशा में आत्महत्या कर चुके हैं। इस साल फिर सूखे की त्रासदी मौत बन कर किसानों के सामने है। जुलाई से अब तक प्रदेश सरकार ने कई बार बुंदेलखंड को सूखा ग्रस्त घोषित करने के लिए सर्वे कराए पर औसत की पचास फीसद से अधिक वर्षा होने के आंकड़े के कारण सरकार ने सूखा मानने से ही इंकार कर दिया। जब कि कृषि विभाग मानता है कि ज्यादातर जमीन परती पड़ गई है। उधर सरकार के सिंचाई विभाग ने भी सिंचाई के लिए पानी दे पाने से इंकार कर दिया है। हाल यह है कि मंडल में सर्वाधिक बांधों का जिला होने के बाद भी महोबा में ही सिंचाई तो दूर विभाग पलेवा के लिए भी पानी नहीं दे पा रहा। ऐसे में बांधों के नजदीक के गांवों में बांध से रिस कर नहर में बह रहा पानी किसानों को संजीवनी सा दिख रहा है।

हर कोई इस पानी को रोक अपना खेत सींचने के लिए हर हथकंडा अपना रहा है। कुछ दिन पहले एमपी सीमा से लगे लहचूरा बांध के पास के पनवाड़ी थाने क स्योड़ी गांव के किसानों नेे दबंगई दिखाते हुए नहर काट आगे बह रहा पानी रोक लिया। यह बात मसूदपुरा के किसानों को नागवार गुजरी तो वह कटी नहर ठीक करने पहुंच गए। बस इसी बात को लेकर दोनों गांवों के किसानों के बीच पहले विवाद हुआ और फिर लाठियां चटकनें लगीं।

घटना में आधा दर्जन लोग घायल हो गए। एक की हालत गंभीर होने के कारण सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पनवाड़ी के डाक्टरों ने उसे उपचार के लिए मेडिकल कालेज झांसी को रिफर कर दिया है। शेष का उपचार यहीं हो रहा है। प्रकरण को लेकर मसूदपुरा के किसान वृषभान की तहरीर पर तीन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ है। यह हाल केवल इन गांवों में ही नहीं जिले के आधा दर्जन से अधिक बांधों के आसपास के हर गांव में पानी को ले किसानों के बीच इसी तरह की तनातनी चल रही है। पिछले सप्ताह श्रीनगर कोतवाली क्षेत्र के उर्मिल बांध की नहर काट सिंचाई को पानी निकालने के कई मामले सामने आए।

प्रशासन इन प्रयासों को पानी चोरी मान किसानों पर मुकदमा दर्ज करा रहा है और किसान पीने के लिए आरक्षित इसी पानी से सिंचाई कर अपना पेट भरने का जुगाड़ करने को खून की कीमत पर पानी लेने को मजबूर है।बावजूद इसके सरकार को यहां का सूखा नहीं दिख रहा। वही पिछले सप्ताह ग्राम दिसरापुर, बीजानगर, बिलखी सहित दर्जनों गांवों के किसानों ने सिचाई विभाग कार्यालय आकर पानी की मांग की। इससे पहले वह कई बार जिलाधिकारी से भी नहर चालू करने की मांग कर चुके है।



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