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बुन्देलखण्ड को खुशहाल और समृद्व बनाना शासन का लक्ष्य मोनिका गर्ग

प्रदेश की प्रमुख सचिव लघु सिंचाई एवं भू.गर्भ जल विकास श्रीमती मोनिका गर्ग ने सोमवार को विकास भवन सभागार में बुन्देलखण्ड समाकलित जल स्त्रोत प्रबंधन से सम्बन्धित कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए कहा कि बुन्देलखण्ड की समस्या स्लोव ;ढालद्ध हैए क्योंकि बरसात की पानी सीधा बेतवा नदी में गिर जाता है। इसे रोकने के लिए जल्द ही एक योजना तैयार की जाए ताकि पानी नदी में ना जाए और संचय किया जाए। यह जरुरी है अतः इसे समयबद्व चरण में किया जाना अति आवश्यक है। इस कार्य के लिए दो वर्ष में कार्ययोजना तैयार करे । क्षेत्र की जल समस्या के लिए जितने भी तालाब हैए यदि उन्हे वर्षा जल से भरा जा सकेए तो जलसंचय के साथ जलसम्बर्धन में भी लाभ होगा।

बुन्देलखण्ड समाकलित जल स्त्रोत प्रबंधन से सम्बन्धित कार्यशाला में प्रमुख सचिव लघु सिंचाई एवं भू.गर्भ जल विकास श्रीमती मोनिका गर्ग ने कहा कि तीन वर्ष में मण्डल के 200 तालाबों को नहरए नदी से जोड़ा जाना हैए इस कार्य में विभिन्न विभाग आपसी सहयोग और समांजस्य के साथ कार्य करेए तो परिणाम जल्द व आशातीत होगे। लघु सिंचाई विभाग इस कार्य का नोडल विभाग बनाया गया है। प्रदेश के 15 विकास खण्ड शामिल है इसमें झाँसी मण्डल के विकास खण्ड बामौर व तालबेहट को इस मिशन में शामिल किया गया है। अतिशीध्र 32 विकास खण्डों को शामिल कर लिया जाएगा। जहां पीपीपी माडल के माध्यम से जलसंचय और जलसम्बर्धन के कार्य हेतु योजना बनायी जाएगी। इसकी जिला स्तर पर जिलाधिकारी के द्वारा समीक्षा की जाएगी। उन्होने कहा कि चिन्हित विकास खण्डो में किसानों को कम पानी खपत वाली फसले के लिए प्रोमोट किया जाएगाए इसके साथ ही जनसहभागिता और जनता को जागरुक करने का भी कार्य किया जाएगा।

प्रमुख सचिव लघु सिंचाई एवं भू.गर्भ जल विकास ने कार्यशाला में सम्बोधित करते हुए कहा कि ग्राम में भू.जल सेनाए जलदूतए पानी पंचायत आपसी समंजस्य और सहभागिता से कार्य करेए ताकि जलसंरक्षण परिलक्षित हो सके। उन्होने शासन के वरिष्ठ अधिकारियों तथा 2030 डब्ल्यूआरजी के पदाधिकारियों के साथ.साथ विश्व बैंक के विशेषज्ञए स्वयं सेवी संस्था के पदाधिकारीए उद्योग जगत के प्रतिनिधियों एवं अन्य गणमान्य व्यक्तियों को बुन्देलखण्ड पर ज्यादा फोकस करने पर जोर दिया। इससे किसानो को अधिक लाभ दिलाया जा सके और उनकी आय दोगुनी की जा सके। उन्होने आमंत्रित स्वयं सेवी संस्था के पदाधिकारीए उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से कहा कि जो भी मास्टर रिचार्ज प्लान बनायेए उससे समस्त ब्लाक संतृप्त हो जाए।

मण्डलायुक्त अमित गुप्ता ने बुन्देलखण्ड समाकलित जल स्त्रोत प्रबंधन से सम्बन्धित कार्यशाला में मण्डल की जलवायु और भौगोलिक स्थिति की जानकारी दी और लगातार कम वर्षा होने की जानकारी दी। उन्होने कहा कि मण्डल की मनरेगा के माध्यम से तालाबों की सिल्ट सफाईए तालाबों को नहरो से जोड़ना और वृक्षारोपण के माध्यम से जलसंचय व जलसम्बर्धन कार्य किया गया है। इसके परिणाम अच्छे रहे है। उन्होने बताया कि ग्रामीण क्षेत्र के जनसामान्य से भी जलसंचय हेतु चैकडेम व बन्धी बनाने का सुझाव लगातार लेते रहे है। जिनके निर्माण से क्षेत्र में भू.गर्भ जल में बढ़ोत्तरी हुई है। उन्होने कहा कि मण्डल के अधिक से अधिक तालाबों को नहरो के माध्यम से भरे जाने हेतु कार्ययोजना तैयार करा ली गयी है। जिससे वर्षा न होने पर भी तालाबों मे पानी उपलब्ध रहेगा।

विकास भवन सभागार में आयोजित कार्यशाला में अनिल सिन्हा सिविल एडवाईजर ने पीपीपी माॅडल से जलसंरक्षणए जलसम्बर्धन कार्य हेतु बुन्देलखण्ड में इजराइल व नीदरलैण्ड योगदान देगे की जानकारी दी। उन्होने बताया कि बजाज फाउण्डेशनए डीटीसी ग्लोबलए परमार्थए सीआईआई एवं टीटीसी आदि कम्पनीए एनजीओ भी यहां कार्य करने हेतु योगदान देने को तैयार है।

निदेशक भू.गर्भ जल विभाग वी के उपाध्याय ने आयोजित कार्यशाला में मिशन एक्शन प्लान में क्या.क्या कवर किया गया है कि बुन्देलखण्ड में उसकी जानकारी दी। उन्होने बताया कि सारा प्लान वाटरशेड पर ही आधारित है। उन्होने आर्टीफिशियल रिचार्ज के उपयुक्त स्थल चयन के सम्बन्ध में संकल्प पत्र पढ़ा। उन्होने बताया कि 271 ब्लाक में मास्टर रिचार्ज प्लान तैयार किया जा रहाए यह प्लान दिसम्बर तक बेवसाइड पर उपलब्ध होगा। डीडीएम नावार्ड अजय कुमार सोनी ने कार्यशाला में बताया कि जल बहुमूल्य है अतः जहां कार्य करना है वहां कितना श्रमदान होगाए यह देखा जाता हैए उसके बाद प्लानिंग की जाती है। पानी की उपलब्धता से फसल का चयन की जानकारी किसानों को दी जाती है। जलदूत के माध्यम से गांव.गांव जाकर जलसंग्रह हेतु प्रेरित किया जाता है। डीडीएम ललितपुर विवेक गुप्ता ने ललितपुर में निष्प्रयोज्य माइन्स को जलसंग्रह हेतु तैयार कराया जा रहा है इसका सीधा लाभ किसानों को मिल रहा है। परमार्थ एनजीओ से संजय सिंह ने सूखे से निपटने के लिए तत्कालिक प्रयास बिन्दुवार जानकारी दी और कहा कि बुन्देलखण्ड को बचाना है तो जलसंचयए वाटरवार्डी को बचाना होगा। छोटी.छाटी नदियों एवं प्राकृतिक जलस्त्रोतों का पुनरुद्वार होना आवश्यक है।

विकास भवन सभगाार में आयोजित बुन्देलखण्ड समाकलित जल स्त्र्रोत प्रबंधन से सम्बन्धित कार्यशाला का शुभारम्भ अतिथियों द्वारा दीपप्रज्जवलित कर किया गया। जिलाधिकारी कर्ण सिंह चैहान ने कहा कि कार्यशाला अपने उददेश्यों की पूर्ति करेगी और जो सुझाव कार्यशाला से निकलकर आयेगेए उनका सदुपयोग करते हुए क्षेत्र की जल समस्या का निस्तारण होगा।

इस मौके पर जिलाधिकारी जालौन डाॅण् मन्नान अख्तरए ललितपुर मानवेन्द्र सिंहए मुख्य विकास अधिकारी अन्नावि दिनेश कुमारए ललितपुर प्रवीण लक्ष्यकारए जालौन एसण्पीण् सिंहए मुख्य अभियंता लघु सिंचाई पी आर चैरसियाए अधीक्षण अभियंता लघु सिंचाई एन चैधरीए अधिशाषी अभियंता लघु सिंचाई ए पीण्वर्मा सहित मण्डल व जिलास्तर के विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

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