हाफिज जैसे आतंकी वैश्विक समस्या हैं

पाकिस्तान एक ऐसा राष्ट्र हैए जो अपने जन्मकाल से लगातार आतंकवाद को पोषित करता रहा है। आतंकियों को हीरो बनाने का काम पाकिस्तानी नेता और सेना की मिलीभगत से होता रहा है।

हाल ही में मुंबई हमले के मास्टर माइंड हाफिज सईद को रिहा का करने का आदेश पाकिस्तान की कोर्ट से दिया गया। जिससे यह तय प्रतीत होता है कि वहाँ के कोर्ट भी सेना के इशारे पर काम करते हैं। जिस देश की न्यायपालिका भी स्वायत्त नहींए वहाँ की न्याय व्यवस्था का क्षरण और मरण वैश्विक परिदृश्य में खुल्लम खुल्ला जारी रहता है और विश्व का कोई भी देश इस एक देश से न्याय की उम्मीद बिलकुल ना करे।

हालांकि आतंकवाद को बढ़ावा देने में शुरूआत से पश्चिमी जगत का अनदेखी करना और भारत की बढ़ती ताकत और विकास की बढ़त को थामने के खिलाफ साजिशन आतंक को परोक्ष रूप से सह प्रदान करना रहा। अब उसी आतंक के खंजर से पश्चिमी जगत के तमाम राष्ट्र में लाशों का ढेर और खून से सनी जमीं बनने में पल भर का वक्त लगता है।

आतंक अपने पैर पसारने लगा और शनैः शनैः अमेरिका भी इससे अछूता नहीं रहा। अमेरिका एक शक्तिशाली राष्ट्र हैए जो ओसामा को मारकर अपने नागरिकों के बलिदान का बदला ले लेता है। लेकिन ओसामा को मौत के घाट उतार देने मात्र से आतंक की मौत अगर हो जाती तो आज दुनिया में शांति स्थापित हो जाती।
आतंक अकेले भारत के लिए समस्या नहीं बल्कि सम्पूर्ण अमन पसंद वैश्विक राष्ट्रों के लिए प्राणघाती समस्या है। जिसे दूरदर्शी सोच वाले समस्त राष्ट्राध्यक्ष समय रहते जितनी शीघ्र समझ सकते हैंए पूरी दुनिया के लिए उतना ही लाभदायी होगा।

हाफिज सईद का पाकिस्तान के न्यायालय से निकलकर कश्मीर की आजादी का नारा देना भारत के लिए बड़ी समस्या नहीं है। वह पाक प्रायोजित आतंकवाद से लगातार निपटता रहा है। एनडीए सरकार में कश्मीर के अंदर आतंक के खिलाफ बड़ी कार्रवाई हुई। जिसमें आतंकियो की मौत का आंकड़ा शीघ्र ही 200 पार कर जाएगा। इस वजह से पाकिस्तान के आतंकी बौखलाए हुए हैं।

पाकिस्तान ने भी विश्व बिरादरी में अपनी नाक बचाए रखने के लिए लगभग दस महीने हाइफ सईद को नजरबंद अवश्य रखा। परंतु शुरुआत से ही सईद पर बड़ी कार्रवाई करने से बचता रहा है और उसे हाफिज से आखिरी उम्मीद महसूस होती है। जो पाकिस्तान के कश्मीर वाले मंसूबे के लिए आतंक के जरिए कुछ कर सकता है। अलबत्ता पाकिस्तान को यह महसूस नहीं हो रहा कि आतंक के जरिए ऐसा कदापि संभव नहीं बल्कि पाक अधिकृत कश्मीर से भी आजादी के नारे उठने लगे हैं और मानवाधिकार के मामले में संयुक्त राष्ट्र में उसकी बड़ी खिचाई हो चुकी है।

आतंक परस्त इस राष्ट्र पर वैश्विक शूली ठोकने की जरूरत है और अमेरिका जैसे राष्ट्र को अब स्पष्ट नीति अपनाकर आतंक के खिलाफ भारत का साथ मुखरता के साथ देना चाहिए। क्योंकि अगर कश्मीर में आतंक की जड़े मजबूत होतीं है तो वहीं जड़े एक दिन विश्व के किसी भी हिस्से पर पहुंचने में सक्षम हो जाती हैं और फिर कितनी भी चिल्लाहट हो आतंकवादी अपने मकसद पर कामयाब होकर निर्दोषों की जान लेते हैं।

जिस राष्ट्र ने ओसामा को छिपाकर रखते हुए आतंक के खिलाफ खड़े होने की दुहाई देता रहा। उस राष्ट्र का दाना पानी पहले ही बंद कर दिया जाना चाहिए था। यह आतंक की फसल सिर्फ भारत के खिलाफ नहीं तैयार हो रही बल्कि विश्व के लिए भी बड़ी खरपतवार है। जिसे समय रहते नेस्तनाबूद करने की आवश्यकता है वरना पाकिस्तान के नेता और सेना इसी प्रकार के मौत के सौदागरों को पालित पोषित करते रहेंगे और हम क्या और क्यों करें की नीति पर चलते रहे तो एक दिन पूरी दुनिया के लिए आतंकवाद वह खतरा होगा। जिसे खत्म करने हेतु कितने भी आतुर हो जाएं फिर बड़ी कुर्बानी एकमुश्त देनी होगी और सारी दुनिया में पाकिस्तान जैसे आतंक परस्त राष्ट्र मातम मनवा कर ही मानेंगे। अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय को हाफिज के मामले को स्वतः ही संज्ञान में लेकर पाकिस्तान की दलील और भारत के सबूत के आधार पर सुनवाई कर फैसला सुनाना चाहिएए तब जाकर पाक अपनी करतूत पर स्वयं ही पाबंदी लगाने को मजबूर हो सकता है। अन्यथा ढाक के तीन पात की कहावत पर वह विश्व बिरादरी पर लगातार आंखो में धूल झोक रहा है।

अतएव चेतने की आवश्यकता अभी है और इसे सिर्फ कश्मीर समस्या के नाम पर आजादी की बात मानकर दुनिया भर के राष्ट्राध्यक्ष बड़ी भूल करने से समय रहते स्वयं को बचा लें तब ही वसुधैव कुटुम्बकम में अमन स्थापित हो सकेगा। 



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