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भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर विपक्ष एवं सत्ता पक्ष क"/>

मूडीज के मूड से सरकार को प्लस प्वाइंट

भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर विपक्ष एवं सत्ता पक्ष के कुछ नेता लगातार सवाल उठाते रहे। उनमें बीजेपी नेता एवं एनडीए से पूर्व वित्तमंत्री यशवंत सिन्हा ने अरूण जेटली पर खूब सवालिया निशान लगाए। जीएसटी को लागू करने की पद्धति एवं टैक्स की दर हेतु लगातार हमला बोलते हुए, उन्हे ही वित्त मंत्री प्रभार से हटाने की कवायद कर डाली। इससे सरकार भी काफी हताश महसूस हुई। वहीं विपक्ष को ऐसी ताकत मिली कि यशवंत सिन्हा के बयान के परिप्रेक्ष्य में सरकार पर विश्वास पूर्ण हमला करने लगे।

इन सबके बीच वैश्विक क्रेडिट रेटिंग एजेंसी मूडीज ने 13 वर्ष बाद भारत की रेटिंग को बीएए3 से सुधार कर बीएए2 कर दिया। मूडीज द्वारा जारी बयान में कहा गया कि वर्तमान की भारत सरकार ने अर्थव्यवस्था के सुधार कार्यक्रम में नोटबंदी और जीएसटी को लागू कर कारगर कदम उठाए हैं। सरकार आर्थिक एवं संस्थागत सुधारों की लंबी प्रक्रिया से गुजर रही है। सरकार द्वारा जिन सुधारों को लागू किया गया, वह भविष्य में दूरगामी सुदृढ परिणाम प्रदान करेंगे एवं आगे भी सुधार कार्यक्रम से निवेशकों के लिए सरल मार्ग का निर्माण होगा। जिससे भारतीय बाजार अर्थव्यवस्था के सुरक्षित होने के आसार अधिक बढ़े हैं।

इतना ही नहीं मूडीज ने कहा कि जीएसटी के लागू होने से आर्थिक वृद्धि दर मजबूती होगी और अगले एक दो वित्त वर्ष में वृद्धि दर 6.5 फीसदी एवं 7.5 फीसदी तक पहुंच सकती है।
मूडीज से जारी रिपोर्ट से सरकार का रिपोर्ट कार्ड विश्वास योग्य हो गया है। इसलिए वित्तमंत्री अरूण जेटली ने सरकार पर सवाल खड़े करने वालों को आत्ममंथन करने हेतु सुझाव दे दिया। तत्पश्चात केन्द्र सरकार अपनी बात की पुष्टि करने के लिए मूडीज के मूड का सहारा ले रही है। वहीं विपक्ष अपने द्वारा उठाए जा रहे सवाल पर कमजोर नजर आने लगा है। जबकि प्रसिद्ध अर्थशास्त्री पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी सरकार द्वारा नोटबंदी को संगठित लूट करार देकर सप्रंग की ओर से घेरने का काम किया था एवं जीएसटी को ठीक ढंग से लागू ना कर पाने की हिदायत देकर संप्रग के पक्ष में माहौल बनाने का बेहतर प्रयास किया था।

संप्रग ने नोटबंदी के दिन ब्लैक डे की घोषणा कर देश भर में इसके खिलाफ माहौल बनाने का प्रयास किया एवं जनता को लगातार यह समझाने की कोशिश की नोटबंदी अर्थव्यवस्था पर एक कुत्सित प्रयास है। लेकिन वैश्विक स्तर से आ रही अच्छी रिपोर्ट केन्द्र की मोदी सरकार को खासी राहत प्रदान करने लगी हैं।

केन्द्र सरकार के तीन वर्ष से अधिक कार्यकाल के दौरान विपक्ष ने सवाल जरूर खड़े किए परंतु नोटबंदी पर उनका कोई सुझाव नहीं आया। जबकि होना यह चाहिए कि सत्तावादी सोच से इतर राष्ट्रहित में अर्थव्यवस्था को राजनीति से इतर रखा जाना चाहिए। कम से कम अर्थवेत्ता मनमोहन सिंह से एक अर्थशास्त्री के नाते उम्मीद की जा सकती है कि नोटबंदी में अगर कोई ऐसी कमी थी कि जनता एवं सरकार नहीं समझ पा रही तो एक गहन अध्ययन के बाद सही सुझाव सड़क से लेकर संसद तक देना चाहिए। तब विश्वास किया जा सकता था कि देश की राजनीति सही दिशा में है एवं इस पर भी सुधार कार्यक्रमों का कुछ असर पड़ा है।

जिस प्रकार से केन्द्र सरकार नोटबंदी को लेकर अडिग रही एवं जीएसटी पर समयानुकूल प्रतिक्रिया के आधार पर बदलाव किए। इससे सरकार की श्रेष्ठता एवं सरलता दोनों का आभास महसूस होता है। ये सरकार कम से कम सुनने वाली सरकार है। जो अपनी नीतियों पर जन सुनवाई से बदलाव करने के लिए राजी होती है एवं अटकलों पर विराम भी लगा देती है।
हालांकि भारतीय राजनीति में एक सबसे बड़ा दोष छा गया है। यहाँ जो कुछ भी होता वह चुनावी जीत के लिए होता है। राज नेताओं द्वारा बयान भी चुनाव फतह करने के उद्देश्य से दिए जाते हैं। जिनमें जनता कितनी भ्रमित हो रही है ? , इसकी किसी को कोई चिंता नहीं रहती है। जबकि नेतृत्व का अर्थ यह कतई नहीं कि पार्टी वादी सोच के आधार पर सत्ता की लोलुपता से घिरकर देश की जनता को भ्रमित किया जाए। यह बात हर पक्ष व व्यक्ति पर लागू होती है कि नेतृत्व का गुण भ्रमित करना कभी नहीं सिखाता एवं राज नेता समय रहते समझे ना समझे परंतु सूचना क्रांति के दौर में जनता समय के साथ हद तक समझने लगी है।

इसी का प्रतिफल रहा कि विपक्ष द्वारा नोटबंदी के बाद से कितने भी सवाल खड़े किए गए हों लेकिन मौजूदा केन्द्र सरकार को कोई बड़ी जनसमस्या का सामना नहीं करना पड़ा एवं बीजेपी को कोई बड़ी हार का सामना नहीं करना पड़ा। आगे भी गुजरात हिमाचल के चुनाव परिणाम के बाद यह बात काफी हद तक स्पष्ट हो जाएगी। कुलमिलाकर मूडीज के मूड से केन्द्र सरकार के मूड को प्लस प्वाइंट प्राप्त हुआ है और मूड के अच्छे होने के जहाँ आसार बढे हैं, वहीं विपक्ष के इस मसले पर बैकफुट पर पहुंचने के आसार पर सहमति व्यक्त की जा सकती है। भविष्य में जिसका लाभ एनडीए सरकार को अवश्य मिलेगा।

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