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बुन्देलखण्ड में अन्नाप्रथा रोकने की दिशा में प्रशसन ने पहले गौ"/>

अन्ना प्रथा खत्म करने को बुन्देलखण्ड में गौमूत्र की बिक्री शुरू

बुन्देलखण्ड में अन्नाप्रथा रोकने की दिशा में प्रशसन ने पहले गौशाला बनाया और अब गौमूत्र खरीदने का काम शुरू कर दिया। 10 रुपये लीटर गौमूत्र की बिक्री होने से आशा व्यक्त की जा रही है कि किसान अन्ना गायों को बांधकर गौमूत्र बेचेंगे।

जनपद में अन्ना गाय किसानों के लिए मुसीबत बन गई है। ट्रैक्टरो से खेती होने से अब बैलों की जरूरत नही है जिससे किसानों ने अपनी-अपनी गाय छुट्टा छोड़ दी है। छुट्टा घूम रही गाय झुण्ड में एकत्र हो जाती है और जिस खेत मे घुस जाती है उस खेत की फसल चट कर जाती है। इस समस्या से निजात के लिए तमाम किसान संगठनों ने आंदोलन किये परन्तु नतीजा कुछ नही निकला। धीरे-धीरे अन्नाप्रथा बुन्देलखण्ड के लिए अभिशाप बन गई।
जहाँ एक ओर किसान सूखे की समस्या से परेशान रहता है वही खेत में खडी फसल जब अन्ना जानवर खा जाते है तो किसान सदमे से मर जाता है। अभी पिछले दिनो बबेरू के पतवन गाँव में एस युवा किसान ने केवल इसी बात पर फाँसी लगा ली थी। क्योंकि अन्ना गाय उसकी फसल खा गई थी। सूबे में सरकार बदलने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुन्देलखण्ड में अन्नाप्रथा से निपटने की रणनीति बनाई। इसके लिए गाँव-गाँव में गौशाला खोलने के निर्देश दिये। लेकिन जब भी किसानों का रूझान अन्नाप्रथा खत्म करने में नही बढ़ा। जिसे देखो वही अपनी अन्ना गाय छुट्टा छोडकर एक दूसरे पर आरोप मढ़ रहा है।

बाँदा में जिला आधिकारी महेन्द्र बहादुर सिंह ने मुख्य मंत्री की पहल पर जिले में अन्नाप्रथा खत्म करने का संकल्प लिया। पहले उन्होने गौशाला खोलने का बढ़ावा देते हुए कुछ गौशाला खुलवा दिया। लेकिन तब गाये छुट्टा घूमती रही। तब इस मामले में सख्ती बरतते हुए थानाध्यक्षों को निर्देश दिये कि जो किसान अपने जानवर छुट्टा छोड़ देते है उनके खिलाफ मुकदमे दर्ज किये जाये। इस आदेश पर भी पुलिस ने अमल किया। कुछ किसानों के खिलाफ मुकदमें भी दर्ज हुआ। फिर भी अन्नाप्रथा में कमी नही आई।

अब प्रशासन ने किसानो को गाय के गोबर व गौमूत्र के महत्व से किसानोें को न सिर्फ परिचित कराया बल्कि कीटनाशक बनाने के लिए गौमूत्र की खरीद भी शुरू कर दी। आज जिले के साड़ी गाँव में स्थित गौशाला से 10 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से 400 लीटर गौमूत्र खरीदा गया और गौमूत्र के महत्व के बारे मे किसानों को बताया गया। प्रशासन को अनुमान है कि गौमूत्र बेचने के लिए किसान अपनी गायों को बांध कर रखेगा। जिससे अन्नाप्रथा की समस्या खत्म हो जायेगी।



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