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भारत गुटखा के 11 स्थानों पर छापा

शहर के मर्दननाका मोहल्ले में करीब डेढ़ दशक से फल फूल रहे भारत गुटखा के प्रतिष्ठान और आवास में कानपुर से आई आयकर विभाग की पांच टीमों ने छापा मारा। छापे के दौरान कई घन्टे रिकार्ड खंगालाने और कर्मचारियों से पूछताछ का मामला चलता रह और छापामार कार्यवाही से मीडिया को दूर रखा गया।

शहर के मर्दननाका में वर्षों से भारत गुटखा बनाने का काम होता हैं इनके तकरीबन 11 आवास व प्रतिष्ठान है जहां इस अवैध धन्धो का कारोबार होता है। घटिया सुपाड़ी, केमिकल युक्त तम्बाकू मिश्रित इस गुटखे का निर्माण चोरी हुये स्थानों में किया जाता है। कहने को तो बाँदा में गुटखा बनाने के 10 प्रोडेक्ट रजिस्टर्ड है। इनमें कम से कम पंाच फर्म एक ही व्यक्ति के है जो अलग-अलग नामों से चल रही है।

बताया जाता है कि भारत गुटखा सबसे ज्यादा घटिया है। गुटखा खोलकर देखने में सुपाड़ी के अलावा इतना कचरा निकलता है कि लोग दो गुटखा खरीदने के बाद ही एक गुटखा खा पते है। इस घटिया गुटखे का निर्माण चोरी छुपे ढ़ंग से किया जाता है। जो मजदूर इसे बनाने में लगाये जोते है उन्हे तब तक बन्द रखा जाता है। जब तक पूरा काम खत्म नही हो जाता है। माल तैयार होन के बाद गड़ियों में भरकर गुटखांे की खेप बाहर भेजने से पहले पुलिस व सेल टैक्स अफसरों की मुट्ठी गरम की जाती है। कहा तो यह भी जाता है कि एक या दो गुटखा मशीनों का पंजीकरण कराया जाता है। जबकि चोरी से कम से कम 10-12 मशीनों को चलाकर गुटखा बनाया जाता हैं। सेल टैक्स वालों को इस बात की जानकारी रहती है। लेकिन हरमाह मोटी रकम मिलजाने से विभागीय अधिकारी चुप्पी साध लेते है।

आज भी सवेरे से गुटखा व्यवसायी के प्रतिष्ठान व आवास में छापामार गया। तीन गाडियों में पहुंचे अधिकारियों ने 11 मकान व प्रतिष्ठानों में पुलिस कर्मियों को तैनात कर दिया ताकि मीडिया के लोग अन्दर न जोन पाये। अन्दर छापामार कार्य वाही की महज औपचारिकता पूरी की जाती रही। सूत्र तो यह भी बताते है कि हमेशा की तरह इस बार भी गुटखा व्यवसायी और सेलटैक्स अफसरों के बीच ‘डील’ हो गई है। जिससे लगता नही है कि कोई बड़ी कार्यवाही होगी।



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