< प्रदूषण में किसानों की बड़ी भूमिका की अपेक्षा जागरूकता की उपेक्षा Hindi News - Breaking News, Latest News in Hindi, हिंदी में समाचार, Samachar - Bundelkhand News किसान हमेशा से बलि का बकरा बनाया जाता है। अब प्रदूषण "/>

प्रदूषण में किसानों की बड़ी भूमिका की अपेक्षा जागरूकता की उपेक्षा

किसान हमेशा से बलि का बकरा बनाया जाता है। अब प्रदूषण को लेकर बहस में निशाने पर पंजाब और हरियाणा के किसान हैं। जानकारों का कहना है कि किसान पलारी जलाते हैं, जिसकी वजह से दिल्ली में हवा के साथ धुंध छा जाती है एवं हवा प्रदूषित हो जाती है।

लेकिन किसानों की समस्या से शायद ही कोई रूबरू होता है। किसान फसल कटाई हेतु कम्बाइन हार्वेस्टर का प्रयोग करते हैं। जो फसल को जड़ से नहीं काटता एवं लागत भी अधिक हो जाती है। इस हार्वेस्टिंग कटाई की वजह से चावल के दाने टूट भी जाते हैं। जिससे किसानों को वाजिब दाम भी नहीं मिल पाता है। अर्थात किसान पीठ और पेट दोनो तरफ मार खाता है।
जानकारी के अभाव में किसान देखा देखी इस विधि का प्रयोग करता है। जहाँ मजदूरों की कमी और मजदूरी मंहगी होने की मजबूरी भी है। लेकिन एक किसान विवेक चतुर्वेदी ने कटाई का विकल्प तैयार किया परंतु वो विकल्प सरकार के लिए प्रचार प्रसार का संकल्प नहीं बन सका।

बुन्देलखण्ड के किसान भी खेत पर फसल जलाते हैं। जो जमीन के लिए बहुत नुकसानदेय है। इससे मिट्टी जड़वत हो जाती है और जल धरातल तक प्रवेश नहीं कर पाता है। जिससे कम उपज का खतरा मडराता जा रहा है।

प्रदूषण में मुख्य भूमिका किसानों की उतनी नहीं जितनी की आधुनिक साधन संसाधनों की हो चुकी है। बल्कि किसानों को इस अज्ञान से बाहर निकालने की जरूरत है। जिससे किसान अच्छी पैदावर के साथ अच्छे दिन का सुखभोगी हो सके।

About the Reporter

अन्य खबर

चर्चित खबरें