मुख्यालय में प्रशासन के नाक के नीचे मौरंग की चोरी का खेल बदस्तूर"/>

प्रशासन के नांक के नीचे हो रहा अवैध बालू खनन-100 डायल सहायक बनी अवैध बालू खनन माफियाओं की

मुख्यालय में प्रशासन के नाक के नीचे मौरंग की चोरी का खेल बदस्तूर जारी है। अभी भी भारी वाहनों व रिक्शों से चोरी की मौरंग की ढुलाई का धंधा चल रहा है। लेकिन मुख्यालय में रिक्शों द्वारा होने वाली बालू की आपूर्ति पर रोक नहीं लग पा रही है। कोतवाली पुलिस ने कुछेछा रिक्शा चालकों को पकड़ा जरूर था, मगर किसी पर भी कोई असर नहीं हुआ है। फिर से शहर की सड़कों में मौरंग की बोरियों से भरे हुए रिक्शों की आवाजाही बेरोक-टोक हो रही है। दिनदहाड़े ही नावों की मदद से नदी की जलधारा से मौरंग निकाली जा रही है।

हालांकि आज पुलिस के अधिकारियो ने नदी से बालू निकाल कर रिक्शे मे ले जा रहे लोगो के खिलाफ धर-पकड की कार्यवाही जरूर की थी लेकिन वह ज्यादा प्रभावशाली साबित नही हुई। शायद इसीलिये इन रिक्शे वालों को न तो पुलिस का भय है और न ही किसी आलाधिकारी का। और यह लोग धडल्लें से रिक्शे के द्वारा अवैध बालू का काम जोरों पर कर रहे  है। इतना ही नही यह लोग रिक्शे के द्वारा अवैध रूप से  बालू की सप्लाई कुछेछा, कुण्डौरा, नारायणपुर,  सुमेरपुर, इंगोहटा व मौदहा  तक करते है।

इनका बालू सप्लाई करने का तरीका यह होता है कि रिक्शे में लदी बालू का चालक एक मोटर साइकिल चालक  से रिक्शे के पीछे से धक्का लगवाता है  जिससे रिक्शे चालक को ज्यादा जहमत भी नही उठानी पडती और आसानी से अवैध रूप से बालू की सप्लाई भी हो जाती है। जिला प्रशासन सीबीआई जांच  के दायरे में होने बाद भी अवैध बालू खनन और ओवर लोडिंग रोकने में जिलाधिकारी के आदेशों का पालन नही कर रहे है।



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