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चित्रकूट में बंधुवा मजदुर की तरह काम कर रहे बिहार के नाबालिग बच्चे

बाल संरक्षण अधिनियम के अन्तर्गत 14 साल तक के बच्चो से मजदूरी करना अपराध है। इसके बावजूद चित्रकूट जनपद का ठेकेदार सारे नियम कानून को धता बताते हुए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना मे बिहार से लाये गए बाल मजदूरो से मजदूरी करवा रहा है।

आज सरकार द्वारा वित्तपाषित गा्रमिण विकास मंत्रालय की योजना के तहत 594.64 लाख रूपये की लागत से चित्रकूट जनपद के गा्रम भौंरी से हरदौली बधवारा सम्पर्क मार्ग का निर्माण हो रहा है। 15.700 किमी लम्बी इस सड़क का निमार्ण करने के लिए बिहार के औरंगाबाद जिले से 30 बाल मजदूर लाये गये है। जिनसे मजदूरी कराना अपराध की श्रेणी मे आता है लेकिन ठेकेदार को शासन प्रशासन और बालसंरक्षण अधिनियम की जरा भी परवाह नही है उल्टा वह यह कहते घूम रहा है कि जब यही मजदूर नही मिलते तो बिहार से लाना पडता है।

दिनभर कडी मशक्कत कराने के बाद इन्हे बंधुवा मजदूरो की तरह ऐसे स्थान पर रखा जा रहा है जहां रहना खतरे से खाली नही है। यह जगह विषैले जीव जन्तु का अड्डा है। बंद पडी गल्ला मंडी मे घनी झाड़िया ओैर घास उग आई है जहां जंगली जानवर और विषैले सर्प घुमते रहते है। ऐसे असुरक्षित स्थान पर रह रह रहे बाल मजदूरो का जीवन खतरे मे है। बताते चले कि मजदूरो को किसी भी काम पर लगाने से पहले उनका पंजीकरण जरूरी होता है। साथ ही उनका बीमा भी कराया जाता है।

ताकि किसी दुर्घटना हाने पर उन्हे लाभ मिल सकें पर इनसे बंधुवा मजदूरो की तरह काम करवाने वाले धर्मसिंह ठेकेदार को किसी बात की परवाह नही है। वह खुलेआम कहता घूम रहा है कि जन मजदूर स्वंय काम करना चाहते है तो मेरा क्या अपराध है।

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