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भगनी निवेदिता को भारत रत्न की मांग

सागर विवेकानंद केन्द्र कन्याकुमारी सागर द्वारा भागिनी निवेदिता की साद्धशती कार्यक्रम के दौरान एवं होटल में आयोजित विचार गोष्ठी में भारत निर्माण कार्य के लिए विदेशी होकर भी भारतीय संस्कृति के लिए जीवन उत्सर्ग करने वाली भगिनी निवेदिता को भारनरत्न दलिाने की चर्चा हुई।

बैठक को प्रान्त संगठक सुश्री रचना जानी जबलपुर ने कहाकि विवेकानन्द केन्द्र एवं अध्यात्म प्रेरित सेना संगठन हैं। कन्याकुमारी से गहरा सम्बंध हैं उन्होने कहाकि भगिनी निवेदिता आयरिश लेडी का भारत के लिए कार्य करने को प्रेरणा युवा सन्यासी विवेकानन्द ने दी। उन्होने जन्म 1895 में ब्रिटेन में पहली बार जब स्वामी विवेकानन्द के भारतीय दर्शन पर भाषण को सुना तो अत्यंत प्रभावित हुई। उन्हे आश्चर्य हुआ कि जो देश भारत पर शासन कर रहा है वही वह संयासी उन्हे भारतीयता से अवगत करा रहा है। वे उसी क्षण ब्रिटेन छोड कर भारत आ गई वे उसके पहले कट्रटर ईसाई थी और ब्रिटेन के प्रति भी उनकी भावना थी कि यह देश जो कहता है वह करता भी है। उन्होने ब्रिटेन मे धर्म और उसकी वास्तविकता को देखा। वह उसके बाद एक ब्रम्हचारी के आहवान पर एक ब्रम्हचारिणी के रूप में अपना जीवन भारत की सेवा मे अर्पित कर दिया।

सब ने कहा कि निवेदिता ने भारत कें स्वाधीनता अंदोलन में भाग लिया तथा क्रांतिकारीयों सा कार्य किया। उन्होने निःश्वार्थ रूप से एक रामकृष्ण विवेकानन्द के विचारों पर कार्य करती रही। ऐसी महिला को भारतरत्न मिलना चाहिए। कार्यक्रम का संचालन अर्जुन सेना वालो ने किया।

कार्यक्रम ग्वालियर से प्रांत प्रमुख कुंवर सिंह राजपूत, विभाग प्रचारक राजेन्द्र, जिला पंचायत सी ई ओ मंजु खरे, आलोक मेहता, के.एस.पित्रे, उमाकांत मिश्रा, आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहें।



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