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हिन्दू आतंकवाद का बड़ा सच: मेजर रमेश उपाध्याय

कांग्रेस शासनकाल के समय हिन्दू आतंकवाद जैसा एक शब्द खूब चर्चा में आया था। मालेगाँव ब्लास्ट में पूर्व मेजर रमेश उपाध्याय व साध्वी प्रज्ञा सिंह को आरोपी बनाकर जेल में डाल दिया गया था।

हाल ही में जमानत पर रिहा हुए रमेश उपाध्याय ने पुलिस की बर्बरता की हर परत खोल दी है। उन्होंने बताया कि मैं तो पुरूष था किन्तु आरोप स्वीकारने हेतु साध्वी प्रज्ञा सिंह से हद पार कर अश्लीलता की जाती एवं अश्लील आडियो वीडियो सुनाकर उनका चरित्र हनन किया जाता था। ये उस पुलिस की बर्बरता की कहानी है जो हमें सुरक्षा देने एवं जिसके कंधे पर देश के कानून के स्टार लगे रहते हैं।

चाईनीज टार्चर
मेजर उपाध्याय ने बताया कि मुझे आरोप स्वीकार करने हेतु चाईनीज टार्चर का पुलिस के बड़े अफसरों द्वारा प्रयोग किया जाता था। ये थर्ड डिग्री से भी भयानक होता है, जिसमें प्राइवेट पार्ट तक में जोर से वार करते थे एवं अंग अंग पर करंट का झटका दिया जाता था। जलन वाला तेल डालकर खूब तड़पाया जाता था। सेना के जवान पर हिन्दू आतंकवाद को इरादतन साबित करने के लिए पुलिस द्वारा बर्बरता की सारी हदें पार कर दी जाती रहीं।   इसी प्रकार से साध्वी प्रज्ञा की चीखें भी मेजर के द्वारा सुनी गईं। हाल ही में साध्वी प्रज्ञा ने कहा था कि एक औरत के साथ इतना गंदा सलूक शायद परतंत्र भारत में भी नहीं हुआ होगा।

इसलिये रमेश उपाध्याय ने चंद लाइन कही हैं-
जब मिली थी आजादी, तब थी आधी रात.
अचरज की बात ये है, हुआ सवेरा ही नहीं.

कहने का मतलब साफ है कि आजादी का सवेरा हुआ ही नहीं। भारत में तुष्टीकरण व हिन्दू आतंकवाद को साबित करने के लिए इतनी घिनौनी हरकत की जाएगी इसका भान शायद ही किसी को रहा हो। जिसके छीटे अब कांग्रेस पर अधिक पड़ रहे हैं। जैसे जैसे ये मामला गरमाएगा निश्चित ही कांग्रेस की राजनीतिक गर्दन पर कटारी रेतती जाएगी। भविष्य में कांग्रेस की साख और अधिक बट्टा लगने के पूर्ण आसार नजर आ रहे हैं।

अलबत्ता ये सच है कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता किन्तु हिन्दू आतंकवाद को साबित करने के लिए भारत देश में इतने घिनौने प्रयास किए गए। जिससे महसूस होता है कि आखिर जिसके भी इशारे पर यह हो रहा था वो शख्स तुष्टिकरण की राजनीति करने वाला भारत का सबसे बड़ा द्रोही होगा। क्योंकि रमेश उपाध्याय का कहना था कि बिना राजनीतिक इच्छाशक्ति ऐसा होना असंभव था।

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