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शरदोत्सव में दूसरे दिन लोकनृत्यों की धूम रही

शारदोत्सव के दूसरे दिन लोकनृत्यों की धूम रही। जिसमें राजस्थान के सुप्रसिद्ध मांगणियार गायन और भोपाल की कल्याणी वैदही फगरे ग्रुप के द्वारा नर्मदा परिक्रमा नृत्य देखकर दर्शक मंत्र मुग्ध हो गये। यह माना जा रहा है कि नृत्य अभिव्यक्ति का सबसे अच्छा माध्यम होते हैं। ऐसे में किसी राज्य की संस्कृति से रूबरू होने के लिये वहाँ की लोक नृत्य कलाओं को जानना सबसे अच्छा रहता है।

शरदोत्सव की दूसरी सांस्कृतिक संध्या का शुभारम्भ राजस्थान के सुप्रसिद्ध मांगणियार गायन से किया गया। मरू भूमि का पारम्परिक एवं मीठा संगीत मांगणियार राजस्थान की एक जाति है जो भारतीय ज्ञान परम्परा के विभिन्न आख्यानों को गाॅंव-गाॅंव जाकर गाते हैं और भिक्षा प्राप्त करते हैं। इसमें बाडमेर से आये भुट्टे खाॅं एवं उनके साथी कलाकारों द्वारा प्रस्तुत किया गया।

उसके बाद भोपाल की कल्याणी वैदेही फगरे गु्रप द्वारा नर्मदा परिक्रमा नृत्य नाटिका के माध्यम से नर्मदा कथा को कलाकारों ने नृत्य के माध्यम से पिरोया और शास्त्री नृत्य शैली में भाव मुद्रा व संगीत पक्ष को एक साथ प्रदर्शित किया। मध्य प्रदेश के डिंडोरी जिले के गौंड जनजाति के कलाकारों के द्वारा कर्मा और शैला नृत्य का प्रदर्शन किया गया।

गौंड जनजाति का कर्मा नृत्य कर्म की प्रेरणा देने वाला नृत्य और शैला नृत्य शरद पूर्णिमा की चांदनी रात में किया जाता है। फसल कटने के उपरांत जब फसल खलिहान में आ जाती है तो जिन्दुआ नृत्य और खुशी के अवसर पर भांगड़ा नृत्य की प्रस्तुति की जाती है। कार्यक्रम में सबसे अंतिम प्रस्तुति टीकमगढ़ के प्रसिद्ध भजन गायक पवन तिवारी ने भक्ति गीतों की अनूठी छटा विखेरी। सुप्रसिद्ध भजन इकबार जो रघुवर की नजरों का इशारा हो जाये, मैं तेरी लगन में खो जाऊं, दुनिया से किनारा हो जाये के साथ मंच से विदा लिया। कार्यक्रम का संचालन महात्मा गाँधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के संगीत विभागाध्यक्ष लल्लूराम शुक्ल ने किया।

 

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  • राजकुमार याज्ञिक

    चित्रकूट जनपद के ब्यूरो चीफ एवं भारतीय राष्ट्रीय पत्रकार महासंघ के जिलाध्यक्ष राजकुमार याज्ञिक चित्रकूट जनपद के एक वरिष्ठ पत्रकार हैं। पत्रकारिता में स्नातक श्री याज्ञिक मुख्यतः सामाजिक व राजनीतिक मुद्दों पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं।, .

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