अवैध खनन रोकने के लिए शासन और प्रशासन भले ही लाख वादे "/>

कथनी और करनी में अंतर, बेखौफ होकर बेतवा नदीं में चलाई जा रही मशीनें, हो रहा खनन

अवैध खनन रोकने के लिए शासन और प्रशासन भले ही लाख वादे करता हो। लेकिन हकीकत में अवैध खनन आज भी जारी है बस इसका तरीका बदल गया। इसका उदाहरण एक बार फिर उस समय नजर आया। जब बुन्देलखंड में झांसी के एरच के पास शमशेरपुरा एवं टेहरका गांव में बेखौफ होकर पोखलैंड मशीनों द्वारा अबैध खनन किया जा रहा है।

शमशेरपुरा कहकर टेहरका सीमा में से बालू उठा रहे हैं और नई योजना के तहत शासनादेश की खुलेआम धज्जियाँ उड़ाई जा रही है। बेतवा नदी का सीना चीरते हुए एनजीटी के आदेशों का उल्लघंन करते हुए मशीनों द्वारा खनन किया जा रहा है। और जिले के अधिकारियों की सख्ती केवल मीडिया की सुर्खियां बनी हुई है। हद तो तब हो गई जब देखा गया कि प्रकृति का सीना चीरते हुए नदी में लगभग 30 से 40 फीट नीचे से बालू निकालकर गहरे गहरे गड्ढे किए जा रहे हैं। दस दस पोकलैंड मशीनें बालू खनन करने में लगीं हुई है बालू माफिया इतने दबंग है कि बालू के साथ-साथ लाल मुरम भी पहाड़ से खोदकर बेच रहे हैं।

यह लाल मुरम शमशेरपुरा पहाड़ी को खोदकर निकाली जा रही है माफिया कितने दबंग हैं इसका अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि उन्हें किसी भी उच्चाधिकारी का खौफ नहीं है। क्योंकि सत्ता के सरंक्षण में जो हो रहा खनन।



चर्चित खबरें