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तो क्या मानें मोदी लहर खत्म ही नही हुई थी ?

भारतीय राजनीति के इतिहास मे पहली बार एक ऐसी लहर ने जन्म लिया जिसने लोकसभा -2014 के चुनावों मे कई पार्टियों ,राजनीति के कई मिथकों और सियासत के मौजूदा स्टाइल सबको एक झटके मेँ बदल रख दिया। इस लहर को बाद मे विशेषज्ञो ने सुनामी तक का नाम दिया, ये लहर 'मोदी लहर' थी।

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भी लोकसभा चुनाव की तरह मोदी लहर और जनता का जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। सभी क्षेत्रों मे बीजेपी विरोधियों पर बढ़त बनाए दिख रही है। पिछले 2012 के विधानसभा चुनाव में राज्‍य की 403 सीटों में से बीजेपी को 47 सीटें मिली थीं। इस चुनाव में बीजेपी तीसरे स्‍थान पर रही थी। लेकिन उसके दो साल के बाद ही जब लोकसभा चुनाव से पहले नरेंद्र मोदी ने अपना चुनावी अभियान शुरू किया तो यूपी की सियासत मे शुरुआती परिवर्तन भाजपा के पक्ष मे दिखने लगे।

सात चरणों के मतदान खत्म हो जाने के बाद साफ है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सभी जाति और वर्गों के लोगों में सबसे लोकप्रिय नेता बने हुए हैं। उत्तर प्रदेश में बीजेपी के पक्ष में हवा का हाल यह है कि अभी तक देश के जो बड़े पत्रकार या टीवी चैनल  बीजेपी के खिलाफ लिखने के लिए जाने जाते थे, वे भी राज्य चुनाव में मोदी लहर होने की बात कबूल करने लगे हैं !


 ग्राउंड रिपोर्ट और सर्वे तो यही कहते हैं कि यूपी इलेक्‍शन में मोदी लहर लगातार बढ़ती जा रही है और अगर कल के परिणाम बीजेपी को सत्ता का स्वाद चखाते हैं तो एक बार फिर इसे 'मोदी लहर' ही माना जाएगा। यूपी के चुनाव को जीतने के लिए यानी स्‍पष्‍ट बहुमत हासिल करने के लिए किसी पार्टी को 202 सीटों (कुल 403 में से) की दरकार है. स्‍पष्‍ट है कि इसके लिए करीब 35 प्रतिशत वोट शेयर चाहिए। अभी तक के एक्जिट पोल की मानें तो भाजपा के पक्ष मे तकरीबन इतने प्रतिशत वोट तो मिलेंगे ही। बहरहाल  लोकसभा चुनाव में पश्चिमी यूपी में बीजेपी को समर्थन देने वाला जाट वोटबैंक नोटबंदी से नाराज है और विश्‍लेषकों ने अजित सिंह की रालोद की तरफ इसके फिर से जाने के कयास लगाए थे।

लेकिन बीजेपी को 2014 की तुलना में कुछ अतिरिक्‍त अगड़ी जातियों का समर्थन मिलने की उम्‍मीद है। इसके पीछे यह वजह मानी जा रही है कि सपा-कांग्रेस गठबंधन के मुस्लिम-यादव तबके की तरफ अधिक केंद्रित होने से अगड़ी जातियों का अतिरिक्‍त तबका बीजेपी के खाते में जा सकता है।

अगर हम यूपी के सबसे बदहाल क्षेत्र 'बुंदेलखंड' की बात करें तो यहाँ भी भाजपा की सीटों मे जबरदस्त उछाल देखने को मिल सकता है ! ये उछाल इसलिए भी महत्वपूर्ण होंगे क्योंकि पिछले कई दशक से लगातार भाजपा बुंदेलखंड की कई सीटों पर वनवास झेल रही है।

कल दोपहर तक यूपी सहित अन्य सभी चार राज्यो के चुनावी परिणामों की तस्वीर स्पष्ट हो जाएगी और ये भी  पता चला जाएगा की मोदी लहर की तीन वर्षों बाद अब क्या स्थिति है ! अगर भाजपा को बहुमत प्राप्त होता है तो एक बात और स्पष्ट  हो जाएगी की 2014 की  मोदी लहर (सियासी सुनामी) कभी खत्म ही नही हुई !