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मां के दर्शन के लिये उमडा भक्तों का सैलाव

शारदीय नवरात्रि पर्व के दूसरे दिन भी तडके से ही शहर की शक्ति पीठ बडी मां चन्द्रिका देवी मन्दिर तथा छोटी चन्द्रिका देवी मन्दिर में मां की एक झलक पाने के लिये भक्तों का भारी सैलाब उमडा रहा। सुबह चार बजे से ही भक्तों ने भारी संख्या में मन्दिर पहुंच देवी मां की पूजा आराधना कर मां को प्रसाद चढाया। मां की आरती के समय पर भक्तों का भारी जन सैलाव मन्दिर व मन्दिर परिसर में देखा गया। मां चन्द्रिका मन्दिर प्रांगण में पूजा सामग्री व प्रसाद के अलावा भी विभिन्न दुकानें लगी थी। जिसमें श्रद्धालुओं ने मां के दर्शन के बाद खरीददारी की।

शारदीय नवरात्रि के दूसरेे दिन सुबह चार बजे से ही भक्त अपने-अपने घरों से निकल कर शक्ति पीठ मां बडी चन्द्रिका देवी के दर्शन करने के लिये मन्दिर पहुंचे। जहां माता रानी की एक झलक पाने के लिये भक्त लाईन में लगे रहे। मां के दर्शन कर भक्तों ने पूजा अर्चना कर नारियल चढाया। मां के नौ स्वरुपों में से मां के पहले स्वरुप मांता ब्रम्हचारिणी की आराधना की जाती है। ब्रम्हाजी की शक्ति होने से मां का यह स्वरूप ब्रम्हचारिणी रूप से प्रसिद्व हुआ। इनका उद्भव ब्रम्हाजी के कमण्डल से माना जाता है। ब्रम्हचरिणी उनकी शक्ति है। ब्रम्हचारिणी देवी ज्ञान, वैराग्य व ध्यान की अधिष्ठात्री है। इनके एक हाथ में कमण्डल तथा दूसरे हाथ में रूद्राक्ष की माला है। माता रानी का यह स्वरूप बडा ही मनमोहक तथा भक्तों को सुख सम्मृद्वि देने वाला है।

माता ब्रम्हचारिणी की आराधना के लिये भक्तों का सुबह से ही रेला उमडा रहा। बडी माता चन्द्रिका परिसर में माता रानी के नव दिनों तक भारी मेला लगा रहता है। जिसमें हजारों की संख्या में भक्तों का सैलाव उमडता हैं। इस बार उसपी गौरव सिंह ने महिलाओं के साथ हो वाली अभद्रता को देखते हुये मजनुओं पर पैनी निगाह रखी है। जगह जगह सीसी टीबी कैमरे लगवायें गये है। चन्द्रिका परिसर में महिला पुलिस कर्मी सादा भेष में तैनात रहेगी। जिनकी निगाह अराजक तत्वों व मजनुओं पर रहेगी। सुरक्षा व्यवस्था के लिये मन्दिर परिसर में महिला व पुरुष पुलिस सूरक्षा कर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है।

भक्तों द्वारा मन्दिर प्रांगण में प्रसाद वितरण व भण्डारे का कार्यक्रम सारे दिन चलते रहे। दर्शन के बाद भक्तों ने मां चन्द्रिका देवी प्रांगण मे सजी दुकानों से जमकर खरीददारी की तथा माता रानी का प्रसाद गृहण किया। माता रानी के प्रथम दिन में भक्तों ने अपने अपने घरों में जवारों का रोपण किया। जिनकी भक्त नौ दिनों तक व्रत रखकर उनकी सेवा पूजन करेगे।



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