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भूजल-भू सतही जल का संचय एवं पुनर्भरण आवश्यक: योगेंद्र नाथ वर्मा

बढ़ती जनसंख्या, नगरीकरण,औधोगिकरण और जल के दुरूप्रयोग एवमं बरबादी के कारण हम सभी को जल संकट का सामना न करना पड़े इसके लिए भारत सरकार एवं राज्य सरकार भूजल संरक्षण दिवस मनाकर एवम  अनेक आयोजनों द्वारा जल का संचय करने हेतु जनजागरूकता फैला रही है । इसी क्रम में पूर्व माध्यमिक विद्यालय मड़ावरा रोड महरौनी  में भूजल संरक्षण दिवस पर एक संगोष्ठी एवमं चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन खण्ड शिक्षा अधिकारी योगेंद्र नाथ वर्मा की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। खण्ड शिक्षा अधिकारी योगेंद्र नाथ वर्मा ने कहा कि वर्षा के जल को एकत्र करके उसे कुओं,तालाबों तथा गड्ढों में फिर से भरके पानी की समस्या को दूर कर सकते है।

सह समन्वयक राजेश रिछारिया ने कहा कि वर्षा का जल व्यर्थ न जाने पाए इसलिए इसको हम कृत्रिम पुनर्भरण द्वारा भू-जल एवमं भू-सतही जल  के रूप में संचित करके जल संकट से बच सकते है। प्रधानाध्यापक लखन लाल आर्य  ने कहा कि धरती पर पानी का मुख्य स्रोत वर्षा का जल है।जो जनसंख्या बृद्धि,सिचाईं एवमं औधोगिक कार्यों के लिए जल के उपयोग,कम वर्षा होने के कारण,तालाबों,पोखरों,टैंकों आदि प्राचीन साधनों का उपयोग न करने के कारण भूजल की कमी के कारण  जल संकट बढ़ता जा रहा है जिसे रोकने के लिए हम सभी को भू जल संरक्षण की महती आवश्यकता है।

शिक्षिका सुमन लता सेन आर्या ने कहा कि पहले लोग तालाब,पोखर,नालों,गड्ढों, आदि जलस्रोत में भू-सतही जल के रूप में वर्षाजल  को एकत्र करते थे। अब ये जल के स्रोत मिट्टी के भराव एवम आबादी के विस्तार के कारण सिकुड़ते एवमं समाप्त होते जा रहे है ।जल के इन स्रोतों की मरम्मत करके तथा नए निर्माण द्वारा हम जल का संचय एवमं पुनर्भरण कर सकते है । इस अवसर पर बच्चों ने भूजल संरक्षण पर चित्रकला बनाकर संरक्षण का संदेश दिया और जल संरक्षण की सभी ने शपथ ली। कार्यक्रम में रविन्द्र पटैरिया,सन्तोश,बन्दना राजपूत,नेहा पुरोहित,निशान्त सिंह,पुष्पेंद्र अहिरवार आदि उपस्थित रहें। संचालन शिक्षिका सुमन लता सेन ने किया ।

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