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मूर्ति निर्माण में पश्चिम बंगाल की कला को मात दे रहा है बुन्देली कलाकार

कस्बे का एक मूर्ति कलाकार पश्चिम बंगाल की कला को मूर्ति निर्माण में मात दे रहा है। शुद्ध देशी मिट्टी तथा कांस, बांस रस्सी का प्रयोग कर यह मूर्तिकार देवी मां की नयनाभिराम मूर्तियां गढ़ने में जुटा है। अभी तक विभिन्न जिलो से इस कलाकार का 101 मूर्ति बनाने के आर्डर मिल चुके है जिनको गढ़ने में यह रात दिन जुटा है। जीएसटी के कारण साज सज्जा का सामान मंहगा होने से मूर्ति की लागत इस वर्ष बढ़ी है। मौदहा तहसील के बिगहना गांव में क्षत्रिय परिवार में जन्में रघुराज सिंह का बचपन से ही कला के प्रति रूझान था। दस वर्ष की उम्र से इसने मूर्ति बनाने के हुनर सीखने शुरू कर दिये थे।

युवा होते-होते यह मूर्ति बनाने का हुनर सींखकर पिछले 20 वर्षो से कस्बे के देवगांव चैराहा में निवास बनाकर मूर्तियां गढ़ने में जुटा है। रघुराज ने बताया कि वैसे तो वह सभी तरह की मूर्तियां बनाने का आर्डर लेता है लेकिन देवी प्रतिमा बनाने में इसकी अलग रूचि है। उसने बताया कि उसने मूर्ति बनाने की शुरूआत देवी मां दुर्गा की प्रतिमा से की थी तब से आज तक वह इस प्रतिमा को बनाने में तरह-तरह के हुनर आजमा रहा है। उसने बताया कि उसके द्वारा तैयार किये गये शेर का माडल अन्य कलाकार चोरी कर चुके है लेकिन देवी मां का चेहरा आज तक कोई चोरी नही कर सका है। क्योंकि चेहरे के लुक में वह प्रतिवर्ष कुछ नया करता है। उसने बताया कि सभी कलाकार मुकुट मूर्ति में हमेशा रेडीमेट ही लगाते है जबकि वह मिट्टी में तैयार मुकुट को चेहरे के साथ ही बना देता है। उसने बताया कि मिट्टी, कांस, बांस, रस्सी के साथ मोती कलर का प्रयोग मूर्ति बनाने में किया जाता है।

रघुराज ने बताया कि पिछले 20 वर्षो में अपने साथ काम करने वाले दो दर्जन युवाओं का मूर्ति निर्माण की कला में निपुण कर चुका है। अब उसके साथ राजकुमार, जफर खान, रानी देवी, बादल, राजू, ज्ञान बाबू, कन्हैया, रामजी आदि युवाओं को मूर्ति बनाने के गुर सिखाने मंे जुटा है। उसने बताया कि कलकत्ता के कारीगर मूर्ति में तमाम विषैले रंगो का प्रयोग करते है इस वजह से बुन्देलखण्ड तथा आस पास के लोग नवरात्र में इस तरह की मूर्तियों को स्थापित करने में परहेज करने लगे है।

इस वर्ष उसे महोबा, बांदा, जालौन, फतेहपुर, कानपुर, कानपुर देहात, मानिकपुर के अलावा जनपद के हमीरपुर, कुरारा, मौदहा, सरीला, राठ, मुस्करा से मूर्ति बनाने के 101 आर्डर मिले है। महोबा जनपद के कबरई कस्बे से अलग तैयार की दुर्गा प्रतिमा तैयार करने का आर्डर मिला है। जिससे वह कुछ नया करने में रात दिन जुटा है। उसने बताया कि इस वर्ष जीएसटी लागू हो जाने से साज सज्जा का सामान महंगा हुआ है इससे मूर्ति निर्माण की लागत बढ़ी है। पूर्व में एक मूर्ति के निर्माण में लगभग 4 हजार की लागत आती थी। इस वर्ष लागत बढ़ने से एक मूर्ति के निर्माण में लगभग 5 हजार रुपये का खर्च आ रहा है। इसके बाद भी वह देवी भक्तों से श्रद्धानुसार धनराशि लेकर मूर्ति देने का काम करता है।



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