website statistics
पिछले दो दशकों से दैवीय आपदाओं के कहर से जूझ रहा किसा"/>

बारिश न होने से रबी की फसलो की बुवाई में लगा ग्रहण

पिछले दो दशकों से दैवीय आपदाओं के कहर से जूझ रहा किसान इस वर्ष भी सूखे की आहट से सहम गया है। बारिश न होने से रबी की फसलों की बुवाई में संकट मड़राने लगा है। खेतों में नमी की कमी तथा अधिक तापमान होने के कारण यहां का किसान अभी तक सरसो की बुवाई करने का साहस नही जुटा सका है। जबकि बुन्देलखण्ड में सरसों की बुवाई के लिये पितृपक्ष का समय सबसे मुफीद माना जाता है। खेती किसानी से जुड़ी एक कहावत है कि का बरसा जब कृषि सुखानी।

यह कहावत इस समय बुन्देलखण्ड के किसानों के मध्य सटीक साबित हो रही है। इस समय पानी की सख्त जरूरत है लेकिन बारिश नही हो रही है। पानी न बरसने से जहां खरीफ की फसल सूख रही है वहीं रबी की फसलों की बुवाई नही शुरू हो पा रही है। पिछले दो दशकों में अगर नजर डाली जाये तो यहां का किसान प्रत्येक दूसरे वर्ष में खेती में झटके दर झटके खा रहा है वर्ष 2015 मंे वह अभी तक सूखा झेल चुका है। 2016 में हालत कुछ सामान्य रहे है। 2017 में सूखे के कारण खरीफ की फसले हाथ से लगभग निकल गयी है।

रबी की फसलों में संकट के बादल मड़राने लगे है। क्षेत्र के किसान मान सिंह भदौरिया, सुरेश यादव, जयसिंह सेंगर, ज्ञान सिंह, लक्ष्मी नरायन यादव, राजेन्द्र निगम, रमाशंकर तिवारी, राजकुमार द्विवेदी आदि ने बताया कि खरीफ में बोयी गयी ज्वार, उरद, तिल, मूंग, अरहर लगभग सूख गयी है। इनमें उत्पादन के आसार नही है बारिश न होने से इन फसलों का विकास सही तरीके से नही हुआ है। साथ ही फल एवं फूल गायब है तो बीज कहा से होगा। किसानों ने बताया कि पितृ पक्ष में किसान सरसों, अलसी, चना आदि की बुवाई करने लगता था लेकिन इस वर्ष बारिश न होने से खेतों से नमी गायब है साथ ही तापमान अधिक होने के कारण बुवाई भी संभव नही दिख रही है।

अगर यही हालात बने रहे तो सूखा पड़ना तय है और यह सूखा किसानों के मध्य कोढ़ में खाज का कार्य करेगा। जिसको यहां का किसान शायद अब बर्दाश्त भी नही कर पायेगा। पूर्व कृषि अधिकारी  क्षेत्र के प्रगतिशील कृषक रामसनेही साहू कहते है कि हालत अच्छे नही है। वर्षा के आसार कम है भादौं मास सूखा गुजर जाने से अब पानी के आसार नही है। वाटरलेबिल नीचे खिसक रहा है इससे खतों की नमी गायब हो रही है।

जब तक खेतों में पर्याप्त नमी न हो तब तक रबी की बुवाई नही हो सकती है। यही कारण है कि पितृ पक्ष शुरू होने के बाद भी यहां का किसान रबी की फसलों की बुवाई करने का साहस नही जुटा सका है। कृषि रक्षा इकाई के प्रभारी मृत्युंजय सिंह यादव ने बताया कि सभी तक किसानों ने बीजों की डिमांड नही की है। बीज भण्डार में तोइया तथा सरसों का बीज उपलब्ध है। मटर, मसूर, चना, गेंहू का बीज एक सप्ताह के अंदर बीज गोदाम में उपलब्ध हो जायेगा। बारिश न होने के कारण किसान मायूश है अगर यही हालात बने रहे तो इस वर्ष किसानों के मध्य बीज बेंचना दूभर हो जायेगा।



चर्चित खबरें