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अगूढ़ तथ्यों को खोज यात्रा आज पहुंचेगी कांलीजर

भगवान राम की तपोस्थली चित्रकूट के ऐतिहासिक पौराणिक स्थलों के अगूढ़ तथ्यों की खोज कर विश्व धरोहर घोषित कराने के प्रयासों के उद्देश्य से सात सितम्बर से शुरू हुई यात्रा चैथे दिन भरतकूप से होते हुए मड़फा और कोल्हुआ पहुची।

यात्रा दल ने बताया कि श्रीराम को वनवास छोड़ वापस अयोध्या ले जाने के लिए भरत चित्रकूट आये थे। वह अपने साथ राम के राज्याभिषेक की सारी सामग्री भी लाये थे, लेकिन राम द्वारा राजतिलक से इंकार कर 14 वर्ष का वनवास पूरा करने के उपरान्त ही अयोध्या लौटने का निर्णय सुनाये जाने पर भरत ने गुरु वशिष्ठ की आज्ञा से अपने साथ लाये गए समस्त तीर्थों के जल को चित्रकूट के एक कुएं में डाल दिया था। भरत द्वारा जिस कुएं में वह जल डाला गया उसे भरतकूप और जिस जगह वह कुआं था उसे भारतपुर के नाम से जाना जाने लगा।

भरत द्वारा डाले गए सारे समुद्रों और नदियों के जल की वजह से इस कुएं में समुद्र के जैसी लहरें उठती रहती हैं। समस्त तीर्थों का जल होने के कारण इस कुएं के जल से स्नान करने पर सभी तीर्थ स्थानों में स्नान करने का पुण्य प्राप्त हो जाता है। पौराणिक महत्व की इस अति महत्वपूर्ण धरोहर का जैसा स्वरुप विकसित किया जाना चाहिए था, किन्तु वैसा कुछ भी नहीं हुआ। आज हालत यह है कि तमाम लोग यहां कब्ज़ा जमाकर अपनी दुकानंे बनाये हुए हैं। जिसकी वजह से चारों ओर गंदगी का साम्राज्य है।

स्थल की प्राचीनता और महिमा प्रदर्शित करने के लिए यहां कोई सूचना पट भी नहीं लगाया गया है। पुजारी रस्सी बाल्टी का दान करने से पुण्य प्राप्त होने की बात कह लोगों को ठगने का प्रयास करते हैं। मुख्य मंदिर के आसपास मंदिर बनाकर किसी में अन्न क्षेत्र के नाम पर तो किसी में अखंड ज्योति जलवाने के नाम पर लोगों की जेबों में डाका डाल यहां के पुजारी अपने परिवार का भरण पोषण करते हैं।

चित्रकूट के तमाम महत्वपूर्ण स्थलों को युनेस्को द्वारा विश्व धरोहरों की सूची सहित भारत के पर्यटन मानचित्र में स्थान दिलाने की मुहिम और इन स्थलों की वर्तमान स्थिति का सर्वे कर केंद्र व राज्य सरकारों तक उसकी रिपोर्ट भेज इन स्थलों का विकास कराये जाने की मांग को लेकर की जा रही यात्रा का अगला पड़ाव मानपुर गाँव के पास हरी-भरी पहाड़ियों के शिखर पर पांच मुख और आठ भुजाओं वाले क्रोधित स्वरुप में विराजे शिव के धाम मड़फा पहुंची। साहसिक पर्यटन प्रेमियों के लिए यह शानदार इलाका है।

महाभारत युद्ध के दौरान तीर्थ यात्रा पर निकले विदुर ने कुछ समय तक यहाँ निवास किया था। मडफा महादेव का यह स्थान ऋषि मुनियों और साधु संतों की साधना स्थली भी रहा है। स्थानीय लोगों की जानकारी के मुताबिक यह इलाका तेरहवीं शताब्दी में जैन सम्प्रदाय के शासकों की राजधानी हुआ करता था। दूर दूर तक फैले ध्वंसावशेषों, स्वामी महावीर की सैकड़ों खंडित व कुछ एक सबूत मूर्तियों, महलों के खंडहरों, शानदार सरोवर और शरीफे के पेड़ों से घिरे इस इलाके में प्राकृतिक गुफाओं की भी बहुलता है।

इस स्थान में पत्थरों की विशाल चट्टानों के नीचे बने आरामदायी प्राकृतिक विश्राम स्थली है। किसी राम भक्त सन्यासी द्वारा पर्वतों की गुफाओं में बेहद कलात्मक ढंग से लिखे गए सीताराम सीताराम अक्षर चित्रकूट के कण कण में राम के रमने का अहसास कराते है। अप्रतिम प्राकृतिक सौंदर्य वाले इस इलाके में एक घंटे से अधिक की रॉक क्लाइमिंबग के बाद ऊपर पंहुचने पर पर्वत की चोटी में बने तालाब में नहाने का आनंद निराला है। साहसिक पर्यटन प्रेमियों को चित्रकूट का यह धाम खूब भाता है। पर्यटन व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिए इस स्थान को विकसित किया जाना अति आवश्यक है।

मड़फा से आगे बढ़ते हुए यात्रा पांडवों के अज्ञातवास के साक्षी बने कोल्हुआ के जंगल पंहुची। बेहद घने जंगल वाला यह इलाका पूरी तरह निःशब्द था। शाम गहरा जाने के कारण यहां बहुत देर तक रुकना संभव न होने की मजबूरी के चलते यात्रा अपने पांचवे दिन के पड़ाव भगवान् नीलकंठ के धाम कालिंजर रवाना हुई। कालिंजर में ही यात्रा का रात्रि विश्राम हुआ।

About the Reporter

  • राजकुमार याज्ञिक

    चित्रकूट जनपद के ब्यूरो चीफ एवं भारतीय राष्ट्रीय पत्रकार महासंघ के जिलाध्यक्ष राजकुमार याज्ञिक चित्रकूट जनपद के एक वरिष्ठ पत्रकार हैं। पत्रकारिता में स्नातक श्री याज्ञिक मुख्यतः सामाजिक व राजनीतिक मुद्दों पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं।, .



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