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जाति पाति पूंछे नहीं कोई, हरी को भजे सो हरि का होई

निरंकारी सत्संग का आयोजन संत निरंकारी मण्डल शाखा ललितपुर द्वारा बांदा से चलकर आये ब्रम्हज्ञानी संत डाॅ0 सुरेश जी के सानिध्य सरस्वती ज्ञान मंदिर बालिका इण्टर कालेज, गजरा पैलेष की गली नई बस्ती में  किया जायेगा। ब्रम्हज्ञानी संत डाॅ0 सुरेश जी ने निरंकारी सत्संग में गुरू अमृत वचन प्रदान करते हुए कहा कि दुनिया में जितने भी इंसान हैं, सभी में एक आत्मा का निवास है। आत्मिक रूप में सभी एक समान है। धर्म का सम्बन्ध हमारे इसी स्वरूप से है। सन्तों महापुरूषों ने सदा मनुष्य को इसी स्वरूप के प्रति सचेत किया है। जितने भी महापुरूष, गुरू-पीर-पैगम्बर आदि हुए हैं, वे इन्सानों को जोड़ने का काम ही करते रहे हैं। जो इन्शानों को बांटने का ही कार्य करता है, वह धर्मी नहीं, अधर्मी हुआ करता है, धर्म जोड़ता है, तोड़ता नहीं।

निरंकारी सत्संग में बांदा से आये ब्रम्हज्ञानी संत डाॅ0 सुरेश जी कहा कि धर्मी इसंान, इंसानों के बची में दरारें पैदा नहीं करता, क्योंकि जो वास्तविक धर्म होगा, वह हमें यहीं नजर प्रदान करेगा, यहीं दृष्टि प्रदान करेगा कि सारे मानवों में एक प्रभु निवास करता है, सभी के शरीर पांच तत्वों के बने पुतले हैं। ये मानव काले रंग के हो सकते हैं, इनकी चमडी सफेद हो सकती है, ये कोंकनी भाषा बोलने वाले हो सकते हैं, मराठी बोलने वाले भी हो सकते हैं, ये पंजाबी बोलने वाले भी हो सकते हैं, उड़िया या इंग्लिश भाषा बोलने वाले भी हो सकते हैं। इनका खाने का ढंग और हो सकता है, इनका रहन-सहन का ढंग भी और हो सकता है, इनका पहनावा अलग-अलग हो सकता है। लेकिन आत्मिक रूप में वे एक हैं।

खान-पान पहरावे की अनेकता के कारण इन्होंने इंसानों को बेगाना नहीं माना है। उनको बांटा नहीं, बल्कि एक ही माना है। एक प्रभु, एक ही ईश्वर की ये संतान हैं। किसी हलवाई के पास कई बच्चे गए और एक बोला कि यह जो घोड़ा बना है, यह तो मिठाई है, और यह जो ऊंट की शक्ल की बनी है, ये मिठाई नहीं, तो दूसरे बच्चे उसके साथ लडने लगे, कहने लगे कि नहीं, ये जो ऊंट की शक्ल में है, यही तो मिठाई है, हांथी की शक्ल वाली मिठाई नहीं है। उनका विवाद अज्ञानता के कारण है।

अज्ञानता के कारण ही एक दूसरे को भला बुरा कहते हैं, क्योंकि वे ये नहीं जानते कि चाहे ऊंट की शक्ल की बनी हुई है, चाहे हांथी की शक्ल बनी हुई है, हलवाई ने तो उनमे एक जैसी शक्कर डाली है, एक जैसा ही खोया डाला है। उसनके लिए कोई फर्क नहीं है। इसी तरत से इस मालिक, इस प्रभु के लिए कोई फर्क नहीं है। सच्चा धर्म हमें मानव के इसी शाश्वत स्वरूप के साथ जोड़ता है, आत्मा का परमात्मा से सम्बन्ध बनाता है।

निरंकारी सतसंग में मुखी महात्मा अमान साहू, सुरेन्द्र निरंकारी, विनीता निरंकारी, मंगल सिंह, गुलाब, महेश निरंकारी, दयाराम, बलराम यादव, मान सिंह मीडिया प्रभारी, सुप्रिया, प्रतिभा, हर्षित, हार्दिंक, नीलम, सपना, घनश्याम साहू, गनेशराम, पथिक, दीपक कुमार, सोनू, उदयभान यादव, आदि सहित सभी महापुरूषों का योगदान सराहनीय रहा।

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