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बाल श्रम नियोजनों के दुष्परिणामों से जनसामान्य को अवगत कराने हेतु जिलाधिकारी की अध्यक्षता में बैठक सम्पन्न

जिलाधिकारी मानवेन्द्र सिंह की अध्यक्षता में बाल श्रम नियोजनों के दुष्परिणामों से जनसामान्य को अवगत कराये जाने से सम्बंधित बैठक कलैक्ट्रेट सभागार में आयोजित की गयी। बैठक में श्रम प्रवर्तन अधिकारी द्वारा बताया गया कि बाल श्रमिकों के चिन्हांकन हेतु दिनांक 05.09.2017 से 20.09.2017 तक अभियान चलाया जा रहा है जिसके तहत ऐसे सभी स्थलों/प्रतिष्ठानों का चिन्हांकन किया जाना है जहां पर बाल श्रमिकों के नियोजन की पूर्ण सम्भावना है। प्रचार-प्रसार के माध्यम से बाल श्रमिकों के नियोजन के दुष्परिणामों से जनसामान्य को अवगत कराया जाना। रिपोर्टिंग प्रारूर के माध्यम से ऐसे बाल श्रमिकोें का विवरण उपलब्ध कराया जाना जिनकी आयु 18 वर्ष से कम हो। चिन्हित बाल श्रमिकों का शैक्षिक एवं आर्थिक पुनर्वास कराया जाना।

उन्होंने बाल श्रम (प्रतिषेध एवं विनियम) संशोधन अधिनियम 2016 के मुख्य बिंदुओं पर चर्चा करते हुए कहा कि बाल श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम 1986 में श्रम एवं रोजगार मंत्रालय भारत सरकार द्वारा संशोधन करते हुए 14 वर्ष तक की आयु के बच्चों का सभी प्रकार के कार्यों में कार्य किया जाना प्रतिबंधित कर दिया गया है तथा संशोधित अधिनियम में 14 से 18 वर्ष के किशोर/किशोरियों के लिए भी खतरनाक व्यवसायों में कार्य करने के लिए प्रतिबंधित किया गया है। संशोधित अधिनियम के अनुसार मुख्य संशोधनों की चर्चा करते हुए बताया कि धारा 3 के अन्तर्गत 14 वर्ष तक की आयु के बच्चों के लिए किसी भी प्रकार का श्रम कार्य प्रतिबंधित करते हुए इसे शिक्षा के अधिकार अधिनियम 2009 से जोड़ा गया है। धारा 3ए के अन्तर्गत अनुसूची में वर्णित खतरनाक व्यवसायों व प्रक्रियाओं में 14 से 18 वर्ष के किशारे-किशोरियों के कार्य करने पर प्रतिबंध इस सम्बंध में भारत सरकार द्वारा अधिसूचना के माध्यम से समय-समय पर खतरनाक व्यवसायों व प्रक्रियाओं को किया जायेगा।

वर्तमान में खतरनाक व्यवसायों व प्रकियाओं में खदानें, विस्फोटक सामग्री व कारखाना अधिनियम 1948 में वर्णित सभी खतरनाक व्यवसाय समिल्लित है। उन्होंने किशोर एवं किशोरियों के लिए गैर खतरनाक प्रक्रियाओं में कार्य करने की विनियमन शर्तों के बारेें बताया कि ऐसे किशोर एवं किशोरियों हेतु कार्य करने की अधिकतम सीमा छह घण्टे है, जिसमें एक घण्टे का विश्राम है, सायं 07ः00 बजे से प्रातः 08ः00 बजे तक कोई कार्य न कराया जाये, कोई ओवरटाइम नहीं होगा, साप्ताहिक अवकार रहेगा, चिकित्सा अधिकारी द्वारा आयु प्रमाण पत्र होना चाहिए, निरीक्षक को नियोजन की सूचना, रजिस्टर का रख-रखाव, कार्य स्थल पर स्वास्थ्य व सुरक्षा हेतु आवश्यक व्यवस्थायें होनी चाहिए। इसी दौरान उन्होंने दण्ड की धाराओं पर चर्चा करते हुए बताया कि धारा-3 व 3ए के अन्तर्गत किये जाने वाले अपराध संज्ञेय अपराध होगा, न्यूनतम 06 माह व अधिकतम 02 वर्ष की सजा, न्यूनतम 20000/- व अधिकतम 50000/- का जुर्माना अथवा दोनो, अपराध की पुनरावृत्ति पर न्यूनतम 01 वर्ष व अधिकतम 03 वर्ष की सजा का प्रावधान है।

धारा-3 व 3ए के उल्लंघन पर माता-पिता व अभिभावक जो कि वाणिज्यक कारणों व आय के स्त्रोतों के रूप में बच्चों से कार्य कराते हैं उन्हें दण्डित किये जाने का प्रावधान है कि प्रथम बार अपराध में कोई दण्ड नहीं दिया जायेगा। अपराध की पुनरावृत्ति पर रूपया 10000/-तक दण्ड लगाया जा सकता हैं। अंत में उन्होंने बाल एवं किशोर श्रम पुनर्वास कोष के बारे में बताया कि प्रत्येक जिले में बाल एवं किशोर श्रम पुनर्वास कोष का गठन किया जायेगा, नियोक्ताओं से वसूल की जाने वाली दण्ड की धनराशि इस कोष में जमा की जायेगी, राज्य सरकार प्रत्येक बच्चे जिसके सापेक्ष नियोक्ता से दण्ड की धनराशि वसूल कर कोष में जमा की गयी हो उसके सापेक्ष प्रति बच्चा रूपया 15000/- इस कोष में जमा करायी जायेगी।

इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डाॅ0 प्रताप सिंह, अपर जिलाधिकारी योगेन्द्र बहादुर सिंह, उप जिलाधिकारी सदर महेश प्रसाद दीक्षित, क्षेत्राधिकारी सदर हिमान्शु गौरव, श्रम प्रवर्तन अधिकारी राजकुमार सहित अन्य सम्बंधित अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।



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