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बाजार में बिक रहा मिलावटी सरसों का तेल, प्रशासन बना अनजान

मिलावटी सरसों के तेल से बाजार पटा है। सरसों तेल के 70 फीसदी बाजार पर मिलावटखोरों ने कब्जा कर लिया है। बताया जाता है कि पूर्व में सैंपल की जांच रिपोर्ट चौंकाने वाली है। कई ब्रांडेड कंपनियों के ऑयल तय मानकों पर खरे नहीं उतरे। वहीं, यह भी देखा गया है कि झांसी में भी काई बार सैंपल लेने गये अधिकारियों के साथ बदसलुकी की गई । अगर यहां पर भी तेल के सैंपल लेकर जांच किये जाए तो सरसों के तेल में खतरनाक केमिकल मिल सकते हैं।
 
पहले ऑयल टेक्नोलॉजी विभाग की टीम ने शहर के अलग-अलग इलाकों से 30 बड़ी कंपनियों के ऑयल के 120 सैंपल जुटाए। सभी सैंपलों की लैब में जांच कराई गई। जांच रिपोर्ट आई तो सभी के कान खड़े हो गए। बाजार से उठाए गए 120 सैंपल में से 84 सैंपलों में मिलावट पाई गई।

यह कुल सैंपल का 70 फीसदी है। तकनीकी पहलुओं की जांच में पता चला कि 30 प्रतिशत मस्टर्ड ऑयल में सेहत को हानिकारक पहुंचाने वाले केमिकल मिले थे। इसी तरह 15 फीसदी सैंपल ऐसे थे जिसमें 20 फीसदी ही सरसों तेल पाया गया। इन केमिकल की हो रही मिलावट सरसों तेल में मुख्य रूप से सिंथेटिक एलाइल आइसोथायोसाइनेट, अर्जेमान ऑयल, राइस ऑयल, प्याज का रस व पाम फैटी एसिड की मिलावट हो रही है।
 
ऐसे तत्वों की मिलावट से सरसों तेल में कैलोरी की मात्रा घट जाती है। शरीर के दूसरे आर्गन को भी बीमार करता है। मिलावटी सरसों तेल में मिले हानिकारक तत्व जलने के बाद और खतरनाक हो जाते हैं। इसमें एल्डीहाइट, कीटोन पालीमर्स जैसे हानिकारक तत्व होते हैं। पालीमर्स ऐसा तत्व है जो तले जाने के बाद कार्बोहाइड्रेट के साथ मिलकर कैंसर की कोशिकाएं तक विकसित कर सकता है। फैटी एसिड हृदय की धमनियों में जमता है इससे हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है।

जिला प्रशासन अगर सहीं ढंग से जांच कराये तो सारे तथ्य सामने आ सकते हैं। लेकिन वर्तमान में वृहद स्तर पर कार्रवाई नहीं की गई है। वहीं, जब जांच की जाती है तो व्यापारिक संगठन सडक़ पर उतर कर आंदोलन का रुख अपना लेते हैं।



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