बुंदेलखंड में अगस्त के बाद सितंबर में भी मानसून की बे"/>

अगस्त के बाद सितंबर में भी मौसम की बेरुखी जारी

बुंदेलखंड में अगस्त के बाद सितंबर में भी मानसून की बेरुखी जारी है। तीखी धूप से फसलें मुरझा गई हैं। मानसून की दगाबाजी से किसान हैरान और परेशान हैं। मोटर पम्प और डीजल इंजन से सिंचाई कर फसलों को बचाने की उनकी हर कोशिश बेकार जा रही है। सितंबर माह में अब तक नाम मात्र की बारिश हुई।

उसके बाद से बारिश होने का ग्राफ गिरता चला गया। कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार इस माह के सात दिनों में हल्की फुल्की फुहारे पड़ी। मौसम के अनुकूल नहीं रहने के कारण ही इसबार धान की खेती लक्ष्य से पिछड़ गयी है। अब जरूरत के अनुसार बारिश नहीं होने के कारण फसलों को बचाने में किसानों को पसीने छूट रहे हैं। इस साल दो माह ही हुई बारिश।

जनवरी से अगस्त के दौरान सिर्फ दो माह ही ऐसा है। जब जिले में बारिश वह भी अपेक्षा से कम दर्ज की गयी है। कृषि विभाग के अनुसार साल की शुरुआत से अप्रैल तक औसत जिले में जितनी बारिश होनी चाहिए थी, उससे कम हुई। जुलाई में मानसून हाल ठीकठाक रहा । अगस्त में एक बार फिर मानसून रुठ गया। अब सितंबर का हाल भी कुछ ऐसा ही है।

एक बीघा खेत की सिंचाई में तीन सौ का डीजल लगता है। धान के फसलों को 3 से 4 दिनों के अंतराल पर सिंचाई करनी पड़ती है। खेत में पानी की कमी के कारण अधिक घास उग गए हैं। इससे फसलों की वृद्धि कम गयी है। सुबह में खेत की सिंचाई करते हैं और शाम होते.होते पानी सूख जाता है। कृषि अधिकारियों का कहना है कि मानसून की बेरुखी से किसानों की परेशानी बढ़ी है।



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