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शिक्षा का काम विवाद को संवाद में बदलना होना चाहिए- प्रो. सुरेन्द्र दुबे

‘शिक्षा का काम विवाद को संवाद में बदलना होना चाहिए। आज के समाज में मानव का मानव और प्रकृति से संवाद खत्म हो गया है, जिसके कारण विवादों का जन्म हो रहा है और दिनोंदिन आपदायें घटित हो रही हैं। सामाजिक मूल्यों के पतन के इस दौर में समाज कार्य शिक्षा की अत्यन्त आवश्यकता है।

इस पाठ्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थी मानवीय मूल्यों आधारित समाज की संरचना में अपना योगदान दे सकते हैं। उपरोक्त विचार बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय, झाँसी के समाज कार्य संस्थान द्वारा विभागीय सभाकक्ष में आयोजित तीन दिवसीय ‘‘पाठ्यक्रम अभिविन्यास कार्यक्रम’’ के उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सुरेन्द्र दुबे ने व्यक्त किये।
 
कुलपति प्रो. दुबे ने कहा कि स्वतन्त्रता संग्राम आन्दोलन के समय लोगों का लक्ष्य देश को आजाद कराना था, बाद में समाज की जागरुकता से अनेकानेक कल्याणकारी कार्य हुए। आज सरकारें स्वैच्छिक संगठनों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं की मद्द से समाजोपयोगी कार्यों का निर्वहन कर रही है। उन्होंनें कहा कि समाज में अभी भी गरीबी और भुखमरी की समस्यायें विद्यमान है, जिनके खात्मे का काम शिक्षक और शिक्षार्थी का उद्देश्य होना चाहिए।
 
कार्यक्रम को मुख्य अतिथि के रुप में सम्बोधित करते हुए दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली के स्कूल आॅफ सोशल वर्क के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. संजय भट्ट ने कहा कि विश्वविद्यालयी शिक्षा के समस्त पाठ्यक्रमों में समाज कार्य शिक्षा अत्यन्त महत्वपूर्ण है। समाज कार्य अध्ययन व्यक्तित्व के विकास के अवसर प्रदान करता है। पूरे वर्ष विद्यार्थियों का समाज के साथ संवाद चलता रहता है। उन्होनंे कहा कि समाज कार्य व्यक्ति, समूह और समाज की नब्ज टटोलते हुए सामाजिक सच्चाईयों को सामने लाता है और उनके समाधान के प्रयास करता है। प्रो. भट्ट ने कहा कि आज के समाज में लोगों की मद्द करने में मानवीय गरिमा का ध्यान रखा जाये। लोगों को यह अहसास न हो कि उन पर कोई अहसान किया जा रहा है। उन्होनें कहा कि हमेशा सकारात्मक व्यक्ति ही समाज में परिवर्तन लाते हैं।

उद्घाटन सत्र को विशिष्ट अतिथि के रुप में सम्बोधित करते हुए महाराजा सायाजी राव गायकवाड विश्वविद्यालय, बडौदा गुजरात के प्रो. अंकुर सक्सेना ने कहा कि शिक्षा का व्यापक फलक को समझने के लिए हमें अपने दायरे से बाहर निकल कर देखना होगा। अपने कार्यक्षेत्र के अलावा लोगों से मिलना और उनसे सम्पर्क करना हमारे अनुभवों को बढाता है। उन्होनें कहा कि जिस प्रकार की समस्यायें बुन्देलखण्ड में देखने को मिलती है, वैसी गुजरात में नहीं है, वहां समाज कार्य विभाग द्वारा औद्योगिक संस्थानों की मद्द से सामजिक संरचना में गुणात्मक परिवर्तन किया है।
 
कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ वाराणसी के समाज कार्य विभाग के सह आचार्य डाॅ. बंशीधर पाण्डेय ने कहा कि विद्यार्थियों को अपनी लेखन व संचार क्षमता को विकसित करना चाहिए। जब तक हमारे व्यक्तित्व में इन गुणों का विकास नहीं होगा, तब तक सामाजिक नेटवर्क नहीं बढेगा और हमारे लक्ष्य भी सफल नहीं होगें।

उद्घाटन सत्र का प्रारम्भ समस्त अतिथियों द्वारा द्वीप प्रज्जवलन कर व मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर किया गया। तदुपरान्त समस्त अतिथियों का स्वागत विभागीय शिक्षकों द्वारा किया गया। छात्राओं दीप्ति माहौर व ज्योति राव द्वारा सरस्वती वंदना प्रस्तुत की गई। विभागाध्यक्ष प्रो. सी. बी. सिंह ने अतिथियों का स्वागत किया जबकि विषय प्रवर्तन डाॅ. यतीन्द्र मिश्रा ने किया।

कार्यक्रम का संचालन डाॅ. मुहम्मद नईम ने आभार समन्वयक नेहा मिश्रा ने किया। इस अवसर पर विभागीय शिक्षक अनूप कुमार, डाॅ. अभिषेक भारद्वाज, गंुजा चतुर्वेदी सहित समाज कार्य विभाग के विद्यार्थी उपस्थित रहे। उद्घाटन सत्र का समापन राष्ट्रगान से हुआ।
 
व्याख्यान के सत्र में प्रो. संजय भट्ट ने ‘‘समाज कार्य व्यवसाय: वैश्विक परिपे्रक्ष्य’’ व ‘‘समाज कार्य व्यवसाय के क्षेत्र’’ तथा डाॅ. बंशीधर पाण्डेय ने ‘‘समाज कार्य व्यवसाय: भारतीय परिपे्रक्ष्य’’ व ‘‘समाज कार्य उपागम-परिवार एवं बाल कल्याण’’ विषय पर व्याख्यान दिये गये।



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