विपक्ष के गैरजरूरी कारनामों से ही बढ़ रहा भाजपा का ग्राफ

भारत की जनता की उदासीनता भारतीयता का महाकाल बनती जा रही है। इसमे तथाकथित अच्छे लोगों का बहुत बड़ा कायराना हाथ है। जिन्होंने राजनीति से दूरी बनाने व बनाए रखने के लिए शनैः शनैः एक माहौल क्रिएट किया। इसके दुष्परिणाम ऐसे रहे कि राजनीति मे बुरे से बुरे व्यक्ति का प्रवेश होता रहा और अच्छाई का लोप होता रहा। जिसका परिणाम मिल रहा है कि भारत की राजनीति गंदगी का गटर बना हुआ है और इसमे सीधा सीधा तमाम तथाकथित निष्पक्ष पत्रकार गिरोह का बहुत बड़ा हाथ है। 

ऐसे गिरोहबाज पत्रकारों को देश से नहीं ऐश से मतलब होता है। कुछ सत्ता लोलुप नेताओं की कमजोरी भांप कर कुछ मामलों को बेजा ही तूल देते हैं। इनकी कलम और जुबान के तराजू का एक पलरा हमेशा शर्मनाक तरीके से झुका मिलेगा। हाल-फिलहाल गौरी लंकेश की मौत पर देश के नामी गिरामी चैनल के द्वारा एक बार फिर असहिष्णुता का राग दबी जुबान से अलापा जा रहा है। ये असहिष्णुता इन्हे तब नजर आती है जब इनके गिरोह पर हमला होता है अन्यथा बाकी कितनी भी मौत हो जाएं, स्वयं एक कम्युनिस्ट साथी ने कहा था कि हम अहिंसावादी नहीं है और उसने एक संघ स्वयंसेवक की मौत पर सच बात कही थी कि हम मारकर भी सत्ता मे आते हैं। 

जब कोई संघी मारा जाता है और जब आप संघ पर अनावश्यक अभद्र टिप्पणी करते हैं। उस वक्त आप तनिक सा भी नहीं सोचे कि कल के दिन हम पर भी हमला हो सकता है। मेरा दोनो पक्ष से कोई संबंध नहीं है। मेरा रिश्ता देश और समाज की उस जनता से है जो अमन, शांति व समृद्धि चाहती है परंतु इन लोगों की उदासीनता को खत्म करना होगा। राजनीति का अर्थ चुनाव लड़ना जीतना और संसद पर पहुंचना ही नहीं है बल्कि विचारों के माध्यम से राष्ट्र को सशक्त बनाना भी है। देश की जनता स्वयं विचार कर ले कि कुछ तथाकथित पत्रकार वैश्विक जगत पर भारत को कमजोर करने के लिए उसे असहिष्णु बताते हैं। इसके पहले इन्हे असहिष्णुता ना दिखने का कारण भी आप सब जानते हैं कि इनका पेट खूब भर दिया जाता था और ये जब बोलते थे तब शाम को सियार की तरह बोलते थे। 

अभिव्यक्ति की आजादी संघ और भाजपा के दमन के लिए चाहिए ? जिसमे आप कुछ भी अनाप शनाप बक सकें ? आइए कभी एक गांव मे एक दिव्यांग किसान है जिसके खेत तक गांव के दबंग प्रधान की वजह से ट्रैक्टर नहीं पहुंच पा रहा है। वो चल नहीं सकता और उसकी सुनने वाला व सुनाने वाला कोई नहीं है, बनायेगा कोई इसे नेशनल न्यूज ? ऐसा करने से कोई आपको रोकेगा नहीं। 

हमे तो कभी महसूस नहीं हुआ कि अभिव्यक्ति की आजादी नहीं है। गौरी लंकेश ने व्यक्तिगत दुश्मनी खड़ी कर रखी थी और वो अपनी ही क्रिया पर प्रतिक्रिया से मृत्यु शैया मे लेट गई। जहाँ आपको प्रिय सोनिया गांधी और राहुल गांधी सहित कर्नाटक सरकार को घेरना चाहिए वहाँ मोदी और भाजपा को घेर रहे हैं ? गौरी लंकेश ने मोदी को निशाने पर लिया था पर यहाँ तो लोग रोज मोदी पर निशाना साधते हैं फिर वो लोग क्यों क्यों जिंदा हैं ? 

आप स्क्रीन काली कर लो या फेयर लवली से हफ्ते भर मे गोरी कर लो अथवा बागों मे बहार सूखी जुबान से चीख लो आपका षड्यंत्र देश की जनता समझ जाती है और यही कारण है कि तमाम जमीनी समस्याएं होने के बावजूद भी लोग अंतिम भरोसा नरेन्द्र मोदी पर जता कर सत्तासीन कर देते हैं। इस देश मे विकास हो या ना हो, रोजगार मिले या ना मिले, जमीनी हकीकत बहुत अच्छी ना रहे लेकिन जिस प्रकार से विपक्ष और तथाकथित निष्पक्ष पत्रकार कृत्य करते हैं। उसी वजह से भाजपा का ग्राफ बढ़ता जा रहा है। 

देश की जनता सूचना क्रांति की युग मे बारीक सी बारीक बात को आसानी से समझ रही है बस अपील इतनी सी है कि राजनीति के लिए अच्छे लोगों को समर्थन करिए, उनकी मदद करिए जिससे देश बचाया जा सके वरना एक गौरी लंकेश की वजह से देश की कितनी गौरी की जान चली जाए इन्हे फर्क नहीं पड़ता। 


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