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भगवान् विष्णु ने ली करवट तो करवट बदलने का मना जश्न

भगवान् विष्णु पिछले दो महीनो से सो रहे है और आज दो महीनो बाद भगवान ने करवट ली तो भक्त ना केवल खुश हुए बल्कि करवट बदलने का जश्न भी पूरी धूम धाम से मनाने में जुट गए .इतना ही नहीं इस जश्न का तरीका भी कुछ अलग अंदाज़ का है यहाँ भगवान् को  तो पूजा ही जाता है पर ख़ास बात ये है की इस जश्न में खुशियों के साथी ढोल नगाड़ों की पूजा की जाती है।

दो महीनों पहले भगवान् विष्णु गहरी नींद में गए थे. भगवान् के सोने के बाद भक्त उनकी सेवा में शांति से लगे थे पर आज यानी एकादशी के दिन जब भगवान् ने करवट ली तो भक्तों में जैसे आनद फ़ैल गया .. करवट बदलने की इस प्रक्रिया को भक्त उत्सव की तरह मानते है । दमोह के बकोली के राजा का दरबार यहाँ विराजमान भगवान् गणेश को आज के दिन भगवान् विष्णु का रूप दिया जाता है ..और भगवान् की करवट बदलने के बाद शहर के हज़ारों लोग यहाँ ज़मा होते है और फिर शुरू होता है रात भर का उत्सव .. इस उत्सव में हर वर्ग के लोग शामिल होकर पहले महा आरती का आयोजन करते है।

अपने तरह के इस अनोखे आयोजन में ख़ास बात ये है की यहाँ भगवान् के साथ ढोल नगाड़ों की पूजा की जाती है .. महा आरती के बाद शहर के सेकड़ों ढोल वाले यहाँ इकठ्ठा होकर रात भर अपनी कला के जौहर दिखाते है . ढोल ग्यारस के नाम से विख्यात इस उत्सव पर्व को विशेष रूप से ढोल नगाड़ों के लिए समर्पित किया गया है . वर्षों से चली आ रही इस परंपरा को पीड़ी दर पीड़ी निभाते चले आ रहे लोग कहते है की आज ढोल पूजन ढोल बजाने वाले नहीं वल्कि शहर भर के लोग करते है।

मान्यताओं को माने तो आज भगवान् ने करवट ली तो उत्सव तो मनाया ही जाता है पर भगवान् गणेश को भगवान विष्णु का रूप दिया जाना अपने आप में लोगों को हैरत में डालता है .वही ढोल नगाड़ों के पूजन के बारे में लोग मानते है की ये वाद्य यंत्र आम लोगों की खुशियों के साथी तो है ही पर इनमे सरस्वती और शारदा का वास होता है और इनके पूजन से घर परिवार में सुख समर्धि का वास होता है ढोल ग्यारस के दिन पूरे जिले से ढोल बजाने वाले आते है और ढोल बजाकर भगबान को मानाने का प्रयास करते है इस पूजा के दौरान ढोल नगाडो एवं उनके बजाने वालो की पूजा भी की जाती है बहरहाल इस अनोखे आयोजन का इंतज़ार ना केवल दमोह के लोगों को रहता है बल्कि आसपास के ग्रामीण इलाके और  शहरों के श्रद्धालु भी यहाँ बड़ी संख्या में शामिल होने आते है।

मान्यता है की ढोल ग्यारस के दिन इस पूजन में शामिल होने से तमाम तरह की बाधाये दूर होती है . वही अब भक्तों को दो महीने का इंतज़ार और है जब दीवाली के बाद आने वाली देव उठनी एकादशी के दिन भगवान् विष्णु नींद से जागेंगे .. अब आप अंदाज़ लगाइए की भगवान् के करवट बदलने का जश्न ऐसा है तो नींद से जागने के बाद का आलम क्या होगा ?



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