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जन-सहभागिता से ही समृद्धि सम्भव है

समृद्धि के लिए संकल्प लेना जिससे नये भारत का निर्माण हो सके इसके लिए आवश्यक है कि हमे किसानों की आय दुगनी करने के लिए भारत सरकार के द्वारा जो कदम उठाये जा रहे है उसके लिए जन-जन की सहभागिता आवश्यक है।

कुछ महत्वपूर्ण कदम जैसे- बुन्देलखण्ड में जल की समस्या को देखते हुये जल संरक्षण, परती कृषिकोपयोगी भूमि की जुताई कर नमी संग्रहित करने, एकीकृत फसल प्रणाली जिसमें फसल के साथ-साथ पशुपालन, बागवानी, मुर्गीपालन, मछलीपालन इत्यादि को अपनाकर, कृषि में कुल लागत कम करते हुये तथा मृदा परीक्षण एवं समय पर फसल बीमा कराकर निश्चित तौर पर कृषि में आय को बढाया जा सकता है यह बाते भैरों प्रसाद मिश्र, सांसद बांदा-चित्रकूट ने बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, बांदा एवं कृषि विज्ञान केन्द्र, बांदा के संयुक्त तत्वावधान में भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा प्रस्तावित कार्यक्रम ‘‘संकल्प से सिद्धि न्यू इंडिया मंथन‘‘ का आयोजन  कृषि विश्वविद्यालय में कृषि महाविद्यालय के बहुउद्देशीय सभागार में किया गया था, में बतौर मुख्य अतिथि कही।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि द्वारा 2022 तक नये भारत को बनाने के लिए उपस्थित कृषको एवं अन्य उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों को संकल्प दिलाया गया। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि सदर विधायक प्रकाश द्विवेदी ने अपने उद्बोधन में कहा कि मनुष्य का उद्गम एवं उत्थान  प्रकृति में समाहित है अतः हमें प्रकृति के संरक्षण एवं विकास के लिए हर सम्भव प्रयत्नशील रहना चाहिये इसके लिए आवश्यक है कि वृक्षारोपण करे और इससे भी महत्वपूर्ण कार्य उन वृक्षो का  संरक्षण करना है।

अन्ना प्रथा पर बोलते हुये उन्होने कहा कि हमें समझाना होगा  कि इस प्रथा कि शुरूआत किसने कि तथा इसके समाधान क्या है। अन्ना प्रथा के लिए हम ही जिम्मेदार है और हमें संगठित होकर इसे समाप्त करने के लिए विचार करना होगा। विश्वविद्यालय के मा0 कुलपति डा0 एस0एल0 गोस्वामी ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कृषि के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश का योगदान बताते हुये यह बताया कि उत्तर प्रदेश मक्का, आलू, दुग्ध एवं सब्जी उत्पादन इत्यादि के क्षेत्रो में देश में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। बुन्देलखण्ड की परिस्थितियों एवं विशेषताओं को देखते हुये उन्होने कहा कि यह अतिशयोक्ति नही होगी कि इस जोन को भी जैविक क्षेत्र के रूप में विकसित कर कृषि के क्षेत्र में विकास की नयी सम्भावनाये खोजी जा सकती है।

कार्यक्रम में निदेशक प्रसार, प्रो0 एन0के0 बाजपेयी ने अपने सम्बोधन में यह कहा कि कृषि विश्वविद्यालय एवं इसके अन्तर्गत आने वाले सभी कृषि विज्ञान केन्द्रों पर क्षेत्रानुकूल शोध एवं उनके प्रसार के कार्यो को गति प्रदान करने हेतु समय-समय पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन तथा कृषक वैज्ञानिक संवाद भविष्य में आयोजित किये जाते रहेगें।

उन्होने कृषकों की आय को दोगुना करने में कृषि विविधीकरण के विभिन्न घटको जिसमें प्रमुख रूप से एकीकृत कृषि पद्धति को अपनाना बताया जिससे कृषक बन्धुओं विशेषकर छोटे एवं मध्यम जोत के कृषको का आर्थिक एवं सामाजिक स्तर उठ सके।

कृषि विज्ञान केन्द्र के प्रभारी अधिकारी एवं सह-अधिष्ठाता उद्यान डा0 एस0वी0 द्विवेदी ने समस्त आये हुये अतिथियों, अधिकारियों, कर्मचारियों, दूर-दराज से आये हुये कृषक बन्धुओं एवं उपस्थित सभी जन का धन्यवाद ज्ञापन करते हुये कहा कि कार्यक्रम की सफलता सब की सहभागिता से ही होती है उसी तरह से नये भारत का निर्माण जन सहभागिता से ही सम्भव है। कार्यक्रम का संचालन डा0 बी0के0 गुप्ता, सहायक प्राध्यापक एवं सहायक निदेशक प्रसार ने किया।

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  • अनवर रजा रानू

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