दमोह में तपती  हुई दोपहर में एक विशेष नमाज़ का आय"/>

38 सालो बाद हुई इस्तिस्का नमाज़

दमोह में तपती  हुई दोपहर में एक विशेष नमाज़ का आयोजन 38 सालो के बाद फिर किया गया। दमोह सूखे की ज़द में है और बारिश ना होने से परेशान दमोह के मुस्लिम समाज ने इस्तिस्का नमाज़ अदा की जिसमे पानी न गिरने पर बारिश के लिए विशेष नमाज़ अदा की और दुआ मांगी। इन दुआओ का असर भी हुआ और घंटे भर बाद तेज़ बारिश भी होने लगी।

दमोह के लोग बीते काफी दिनों से बारिश ना होने से परेशान है खेती सूखने की कगार पर थी और लोगों को दो बख्त नलो में पानी तक नसीब नही हो पा रहा ऐंसे में मुस्लिम समाज ने ईदगाह मस्ज़िद में एक खास नमाज़ इस्तिस्का जामा मस्जिद के पेश इमाम हाफिज मुनव्वर रज़ा साहब ने पढ़ाई इस मौके पर नमाज अदा  बिना टोपी लगाय की गई और बाद नमाज दुआ की के खुदा रहमत की बारिश बर्षा कर उन्हें इस मुसीबत से निजात दिलाये।ऐंसा माना जाता है की ये सब आफ़त हमारे ज़रिये हुए अनजाने में गुनाहों के लिए है ,इसकी माफी मांगकर हम दुआएं करे तो वो हरगिज़ पूरी होती है।

दमोह में चिलचिलाती हुई धूप में हुई इस नमाज़ के बाद हुई दुआओ का असर भी साफ नजर आया और शहर में चंद घंटों में ही झमाझम बारिश हो गई, समाज सेवी संतोष भारती ने मुस्लिम समाज के लोगों की इस पहल को सरानीय बताते हुए खा की सबकी दुआ का असर हुआ और वर्ष भी हो गई ।लोगो का मानना है कि ऐंसी दुआओं में उठे हाथो की तारीफ भी की जाना चाहिए जिनके आगे प्रकृति भी बारिश करने मजबूर हो गई।

जब जब प्रकृति के साथ हमने खिलवाड़ किया है तो हमे उसका नुकसान उठाना पड़ा है अभी वख्त है कि मिला है मौका हमे गलतियां सुधारने का तो क्यों ना हम सजग हो और कर ले ऐंसे गुनाहों से तौबा ताकि फिर ना फैलाना पड़े हमे तौबा के लिए हाँथ। नमाज पढ़ने के तमाम इंतजाम ईदगाह कमेटी के अध्यक्ष आज़म खान और उनकी कमेटी के लोगों ने किया।



चर्चित खबरें