हादसा अप्रत्याशित होता है। असमय ही बुरी दुर्घटना घट"/>

रेल हादसे के दौरान सिविल सोसायटी के लोगों के द्वारा हाथ साफ किया जाना

हादसा अप्रत्याशित होता है। असमय ही बुरी दुर्घटना घटित हो जाती है। जिसमें आम जनजीवन बुरी तरह से हताहत हो जाता है। रेल हादसा भी उनमें से एक ऐसा हादसा है जिसकी कल्पना से भी रूह कांप जाती है।

कई दशक से रेल हादसा समय समय पर होता रहा है। जिसमें एक अमानवीय तथ्य उभरकर सामने आया कि कुछ ऐसे लोग सक्रिय हो जाते हैं कि उनका मकसद यात्रियों के सामान की लूटपाट करना रहा है।

जहाँ मानव को मानव की मदद करनी चाहिए। वहाँ हमारे ही अपने बीच के लोग डकैत बन जाते हैं। एक जिंदगी भी ना बचाकर वे कीमती से कीमती सामान लूटने की फिराक में सक्रिय हो जाते हैं।

इस दौरान कुछ स्वयंसेवी संगठन के लोग आपदा क्षेत्र मे पहुंचकर मदद करते हैं। जब भी कभी कोई ऐसी दुर्घटना हुई आरएसएस के स्वयंसेवक ने सक्रियता से भागीदारी निभाई है।
हाल ही में जब मुजफ्फरनगर जिले के खतौनी में उत्कल एक्सप्रेस दुर्घटनाग्रस्त हुई तो डेरा सच्चा सौदा के लोग भी मदद के लिए आगे आए थे। लेकिन इसी बीच एक और तस्वीर सामने आई कि पूर्व की भांति कुछ अराजक तत्व मदद के नाम पर घायल और मृत यात्रियों के सामान लूटने में मस्त रहे।

ये मानवता को शर्मसार करने वाली हास्यास्पद घटना है। हम डकैत और लुटेरों को सजा देने की बात करते हैं। एक चोर को घृणा कक निगाह से देखते हैं। लेकिन जो लोग मदद के फरिश्ते की पोशाक पहनकर पहुंचते हैं, वही जब लुटेरे बन जाते हैं तब हताहत मानव आखिर और कितना हताहत किया जायेगा।

इसमें किसी सरकार, संविधान और कानून का दोष नहीं है। बल्कि गिरता हुआ सामाजिक स्तर है और कहा जा सकता है कि मानवता का ग्राफ कितना उतर चुका है।

हमेशा कहा जाता है कि बेरोजगारी और तंगहाली की वजह से युवा और कुछ लोग अपना रास्ता भटक जाते हैं। जिससे अपराध की ओर मुखर हो जाते हैं। बेशक ऐसा हो जाता है लेकिन हमें इस पक्ष की ओर भी चिंतन करना होगा कि मुश्किलें ए हालात कितने भी खराब हों अगर जीवन मूल्य उच्च स्तरीय और उत्तम हैं तब कोई भी अपना रास्ता नहीं भटक सकता है। कम से कम रेल हादसे जैसे हालात पर सिविल सोसायटी के लोगों के द्वारा हाथ साफ किया जाना समाज के मुंह पर कालिख ही पोतता है।



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