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अक्टुबर में है परीक्षा, अब तक नहीं पहुंचीं किताबें

किताबों के बिना बच्चें कैसे पढ़गे ? जब पढ़ेगे ही नही तो परीक्षा कैसे देगें विद्यार्थी। आदि सबाल इन दिनों सुर्खियों मे है। परिषदीय विद्यालयों में शिक्षा का स्तर सुधारने के दावे तो बड़े-बड़े किए जा रहे हैं। इनमें तैनात शिक्षकों के लिए आए दिन नए-नए फरमान भी जारी होते हैं। छात्र-छात्राओं की संख्या बढ़ाने के लिए भी जाने कितने जतन किए जा रहे हैं, लेकिन विद्यालयों में सबसे जरूरी किताबें अब तक नहीं पहुंची हैं। जिले के विद्यालयों का यही हाल है। किताबों के अभाव में पढ़ाई प्रभावित हो रही है। यह हाल तब है जब अक्तूबर में अर्द्धवार्षिक परीक्षा भी होनी है। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक के विद्यालयों में विद्यार्थी से लेकर शिक्षक तक किताबों का इंतजार कर रहे हैं।

 

जनपद के परिषदीय विद्यालयों में हिन्दी, अंग्रेजी, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, गणित, संस्कृत, उर्दू आदि की किताबें छात्र-छात्राओं के लिए मुफ्त वितरित की जाती हैं। इसके अतिरिक्त विभिन्न विषयों की वर्क बुक भी दी जाती है। परिषदीय विद्यालयों में शैक्षिक सत्र अप्रैल में शुरू हो गया था। उस वक्त तक को किताबों की छपाई का टेंडर तक नहीं हो सका था, नए शैक्षिक सत्र की शुरूआत बिना किताबों के हो गई । इसके बाद 20 मई के बाद ग्रीष्मवकाश हो गया। एक जुलाई को विद्यालय खुलने के सप्ताहभर बाद किताबें बेसिक शिक्षा कार्यालय पहुंचना शुरू हुईं, वह भी कुछ ही विषयों की। लेकिन संख्या मे कम ही थी। किताबों की जितनी खेम शिक्षा कार्यालय मे आती उन्हैं विद्यालयों में भेज दिया जाता। यह क्रम अभी भी जा रहा है, लेकिन सभी विषयों की किताबें आज तक न होने के कारण शिक्षकों के सामने समस्या खड़ी हो रही है।

हालांकि कुछ विद्यालयों में शिक्षक पुरानी किताबों से पाठ्यक्रम पुराना कराने का प्रयास कर रहे हैं। इस मामले मे एडी बेसिक मजरूद्दीन अंसारी का कहना है कि किताबों की सप्लाई 29 अगस्त तक होनी है। अभी करीब 65 फीसदी किताबें आई हैं, जिनका वितरण भी जारी है। उन्होनें दावा किया कि अगस्त माह के अंतिम दिनों तक किताबों का शत-प्रतिशत वितरण हो जाएगा।



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