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उपराष्ट्रपति की कुर्सी से हटने के बाद हामिद अंसारी क"/>

हामिद अंसारी आम मुस्लिम से हकीकत पूंछ ले बयान की हेकड़ी ढीली हो जायेगी

उपराष्ट्रपति की कुर्सी से हटने के बाद हामिद अंसारी को देश के मुस्लिमों की चिंता सताने लगी। अलबत्ता इस बाबत कभी किसी सामान्य मुस्लिम नागरिक की ऐसी कोई टिप्पणी 2014 के बाद से अब तक नही आई है।

पिछले दिनों एक वाकया हुआ था कि एक मुस्लिम परिवार का घरेलू मामला था। जिसमे उनके घर पर नजदीकी रिश्तेदार के द्वारा जबरन कब्जा किए जाने की बात थी। इस संबंध में एक मुस्लिम युवा नेता ने जबरन कब्जा करने वाले के पक्ष से कहते हुए यह कहा कि इनको हिस्सा दे दो अन्यथा सरकार योगी की है कहीं कोई सुनवाई नही होगी।

इस वकत मुसलमानो की कोई औकात नही रह गई। वो मुस्लिम परिवार भाजपाइयों के संपर्क में आया और उनकी पूरी न्यायिक मदद हुई। इसलिये धरातल पर ऐसा कुछ भी नही है, जैसा कि विपक्ष के द्वारा मुस्लिमो की असुरक्षा को लेकर विपक्ष द्वारा जिम्मेदार पद पर बैठे हुए लोगों के द्वारा शिगूफा का पटाका फुडवाया जा रहा है।

शायद हामिद अंसारी जी को पीएम की कुर्सी की कुछ जुगत महसूस हो रही हो और इस प्रकार का शिगूफा छोड़कर वो देश के अंदर मोबालाइजेशन करना चाहते हों, इस प्रकार का गैर जरूरी बयान एक उपराष्ट्रपति के द्वारा आना वास्तव में बेहद निराशाजनक है। जिससे कहीं कुछ हासिल नही होने वाला है। बल्कि उतना ही एनडीए को मजबूती प्रदान होनी है। विपक्ष है कि समझने को तैयार ही नहीं। वो दिन लद गए जब ऐसे बयान से कहीं कुछ फर्क पड़ा करता था।

- ये लेखक के अपने विचार है ।



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